पशुओं में दिखाई दें ये 5 संकेत तो देर न करें, 48 घंटे में जा सकती है जान! हरियाणा एक घंटा पहले 3
मौसम बदलते ही पशुओं में मुंहपका-खुरपका (एफएमडी) और गलघोटू जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पशुपालन विभाग ने समय पर मुफ्त टीकाकरण कराने और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करने की अपील की है।

मौसम में बदलाव के साथ ही पशुओं पर कई संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडराने लगता है। खासकर गर्मी और बरसात के शुरुआती दौर में मुंहपका-खुरपका (एफएमडी) और गलघोटू जैसी बीमारियां पशुपालकों की चिंता बढ़ा देती हैं। ये बीमारियां न सिर्फ पशुओं की सेहत को गहरा नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि समय रहते इलाज न मिलने पर पशु की मौत तक हो सकती है। ऐसे में पशुपालकों का सतर्क रहना और समय पर टीकाकरण कराना बेहद अहम है।

तेजी से फैल रहे हैं मुंहपका-खुरपका और गलघोटू रोग

अंबाला पशुपालन एवं डेयरी विभाग के एसडीओ डॉ. सुदेश कुमार के अनुसार इन दिनों पशुओं में मुंहपका-खुरपका और गलघोटू रोग तेजी से फैल रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार की ओर से पूरे प्रदेश में मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर पशुओं को टीका लगा रही हैं, ताकि इस घातक बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।

उन्होंने बताया कि यह बीमारी बेहद खतरनाक है और इसकी चपेट में आने के बाद एक स्वस्थ पशु की भी 24 से 48 घंटे के भीतर मौत हो सकती है। इतना ही नहीं, यदि एक पशु संक्रमित हो जाए तो वह दूसरे पशुओं में भी संक्रमण फैला सकता है। यही वजह है कि बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी हो जाता है।

टीकाकरण को लेकर फैली भ्रांतियां निराधार

डॉ. सुदेश कुमार ने बताया कि कई पशुपालकों में यह गलत धारणा है कि टीका लगवाने से पशुओं का दूध उत्पादन घट जाता है या गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने साफ किया कि ऐसी बातें पूरी तरह बेबुनियाद हैं। टीका लगने के बाद पशु को हल्का बुखार जरूर आ सकता है, लेकिन विभाग के चिकित्सक आवश्यक दवाइयां देकर उसे जल्द सामान्य कर देते हैं। इसके उलट, अगर पशु बीमारी की चपेट में आ जाए तो उसकी जान बचाना काफी कठिन हो जाता है।

ये पांच लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं इलाज

पशुपालन विभाग के मुताबिक मुंहपका-खुरपका रोग होने पर पशु में कुछ खास लक्षण उभरते हैं। सबसे पहले पशु के शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसके बाद उसके मुंह में छाले पड़ने लगते हैं और खुरों के बीच भी घाव या छाले बनने लगते हैं। संक्रमित पशु चारा खाना छोड़ देता है और उसके दूध उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है।

  • शरीर का तापमान बढ़ जाना
  • मुंह में छाले पड़ जाना
  • खुरों के बीच घाव या छाले बनना
  • चारा खाना बंद कर देना
  • दूध उत्पादन में भारी गिरावट

विभाग का कहना है कि ये पांचों लक्षण किसी पशु में दिखाई दें तो बिना देर किए पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने पर पशु को करीब 7 से 8 दिनों में आराम मिल सकता है।

अंबाला में टीकाकरण अभियान का लक्ष्य

अंबाला जिले में चल रहे टीकाकरण अभियान की जानकारी देते हुए डॉ. सुदेश कुमार ने बताया कि जिले में कुल 1 लाख 94 हजार पशुओं को टीका लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। इनमें से अब तक 91 हजार 702 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।

पूरी तरह निशुल्क है टीका

विभाग के अनुसार अंबाला शहर क्षेत्र में 43,960 पशुओं, अंबाला छावनी में 54,010 पशुओं, बराड़ा ब्लॉक में 42,360 पशुओं और नारायणगढ़ क्षेत्र में 53,670 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं और बीमारी के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें।

विभाग ने कहा है कि अगर गांव में कोई पशु टीकाकरण से छूट जाता है तो पशुपालक पशुपालन विभाग आकर यह टीका निशुल्क लगवा सकते हैं। साथ ही टीकाकरण का पूरा डाटा पशुधन ऐप पर अपलोड किया जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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