यूपी में दो महीने से अधिक समय से नहीं छप रहे अधिवक्ता कल्याण स्टाम्प, वकीलों ने सीएम योगी से लगाई गुहार उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 7
राजस्व विभाग की लापरवाही के चलते सवा दो माह से अधिवक्ता कल्याण स्टाम्प की छपाई ठप है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना स्टाम्प वकालतनामा दाखिल करने की सशर्त इजाजत दी है, वहीं वकीलों ने मुख्यमंत्री से योजना बचाने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता कल्याण स्टाम्प को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राजस्व विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण सवा दो माह बीत जाने के बाद भी अधिवक्ता कल्याण स्टाम्प की छपाई नहीं हो सकी है। इस स्थिति में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना स्टाम्प के वकालतनामा और अपीयरेंस स्लिप दाखिल करने की अनुमति दे दी है, लेकिन इसके साथ एक शर्त भी जोड़ी है।

हाईकोर्ट ने सशर्त दी राहत

अदालत ने यह छूट इस शर्त के साथ दी है कि जैसे ही टिकट उपलब्ध होगा, उसे दाखिल करना अनिवार्य होगा। दो माह से स्टाम्प की अनुपलब्धता के चलते इसकी बिक्री पूरी तरह बंद पड़ी है, जिसके कारण राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ चुका है।

कैसे जमा होती है यह राशि

पूरे प्रदेश में दस रुपये के अधिवक्ता कल्याण स्टाम्प की रकम ट्रेजरी के माध्यम से सरकार के कोष में जमा होती है। साल के अंत में सरकार इसमें से अधिकांश राशि अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा कर देती है।

किस काम आता है यह फंड

इसी राशि से मृत अधिवक्ताओं के वारिसों को सरकार पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। हर वर्ष 300 से अधिक वकीलों के परिवारों को पांच लाख रुपये की यह मदद दी जाती है। इसके अलावा वकालत छोड़ने वाले सदस्य अधिवक्ताओं को भविष्य निधि का भुगतान भी इसी फंड से किया जाता है।

भुगतान को लेकर अनिश्चितता

यदि इस फंड में कमी आती है तो सरकार को अपने कोष से भुगतान करना पड़ेगा। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह कैसे किया जाएगा, और इसकी जानकारी शायद अधिकारियों के पास भी नहीं है।

वकीलों ने सीएम से की मांग

अधिवक्ताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि अधिवक्ता कल्याण योजना को विफल होने से बचाया जाए।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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