फेफड़ों के लिए ज्यादा घातक कौन — वायु प्रदूषण या धूम्रपान? जानिए विशेषज्ञ की राय स्वास्थ्य एक घंटा पहले 5
वायु प्रदूषण और स्मोकिंग दोनों ही फेफड़ों के लिए बड़ा खतरा हैं, लेकिन इनके असर और जोखिम में फर्क है। एक्सपर्ट से समझिए कि किससे फेफड़ों को ज्यादा नुकसान पहुंचता है और बचाव कैसे करें।

भारत उन देशों की सूची में आता है जहां वायु प्रदूषण लोगों की सेहत के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। दूसरी ओर, धूम्रपान भी सांस से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल मन में उठता है कि फेफड़ों के लिए आखिर ज्यादा घातक क्या है — वायु प्रदूषण या स्मोकिंग? विशेषज्ञ मानते हैं कि ये दोनों ही फेफड़ों के लिए बड़ा जोखिम हैं, लेकिन इनके असर और खतरे को अलग-अलग समझना जरूरी है। आइए जानते हैं कि इस बारे में एक्सपर्ट क्या कहते हैं।

धूम्रपान को क्यों माना जाता है ज्यादा घातक

विशेषज्ञों के अनुसार, सिगरेट के धुएं में 7,000 से ज्यादा रसायन पाए जाते हैं, जिनमें से सैकड़ों को हानिकारक और दर्जनों को कैंसर पैदा करने वाला माना गया है। जब कोई व्यक्ति सिगरेट पीता है तो ये नुकसानदेह तत्व सीधे फेफड़ों तक पहुंचते हैं और धीरे-धीरे उनकी कार्यप्रणाली को बिगाड़ने लगते हैं। स्मोकिंग की वजह से फेफड़ों की वायु नलियों में सूजन आ सकती है, उनकी कार्यक्षमता घट सकती है और फेफड़ों के कैंसर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

डॉ. मानव मनचंदा, डायरेक्टर एवं एचओडी – रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन, एशियन हॉस्पिटल का कहना है, "धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के फेफड़े लगातार जहरीले रसायनों की चपेट में रहते हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक स्मोकिंग करने वालों में COPD, फेफड़ों का कैंसर और सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।"

वायु प्रदूषण का खतरा भी कम नहीं

हालांकि एक्सपर्ट यह भी आगाह करते हैं कि वायु प्रदूषण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे महीन कण सांस के साथ फेफड़ों के भीतर पहुंचकर सूजन पैदा करते हैं। शहरों में रहने वाले लोग लंबे समय तक इसी दूषित हवा के संपर्क में रहते हैं, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और फेफड़ों की कार्यक्षमता में गिरावट जैसी समस्याएं पनप सकती हैं।

आखिर किससे ज्यादा नुकसान

डॉक्टर के मुताबिक, दोनों की सीधी तुलना करना उचित नहीं है, क्योंकि धूम्रपान और प्रदूषण के संपर्क की मात्रा तथा अवधि हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से धूम्रपान करता है, तो आमतौर पर उसके लिए स्मोकिंग का खतरा ज्यादा माना जाएगा। वहीं जो लोग धूम्रपान नहीं करते लेकिन बेहद प्रदूषित इलाकों में रहते हैं, उनकी सेहत पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

फेफड़ों की सुरक्षा कैसे करें

  • धूम्रपान और तंबाकू से बने उत्पादों के सेवन से पूरी तरह दूरी बनाएं।
  • प्रदूषण वाले दिनों में घर से बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें।
  • घर और दफ्तर में हवा के आवागमन यानी वेंटिलेशन का खास ध्यान रखें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करते रहें।
  • सांस से जुड़ी किसी भी परेशानी को अनदेखा न करें।
  • समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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