मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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भिंड जिले के मालनपुर क्षेत्र में वर्ष 2019 में सामने आए नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में गोहद स्थित स्पेशल कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और पीड़िता को 4 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया। खास बात यह रही कि सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसके परिजन अपने बयानों से पलट गए थे, फिर भी डीएनए जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को कसूरवार ठहराया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
घटना 10 अगस्त 2019 की है, जब मध्य प्रदेश के भिंड जिले के मालनपुर क्षेत्र की 17 वर्षीय छात्रा अचानक लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पड़ताल के दौरान सामने आया कि आरोपी आशीष उर्फ अवनीत परमार नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ पहले जयपुर और फिर विशाखापत्तनम ले गया था, जहां उसने नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाए।
इस वारदात का नतीजा यह हुआ कि पीड़िता गर्भवती हो गई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। मामले की सुनवाई गोहद के स्पेशल कोर्ट में हुई, जहां आरोपी को दोषी पाते हुए 20 साल की कठोर कैद की सजा दी गई। साथ ही अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए 4 लाख रुपये मुआवजे का आदेश भी पारित किया। इस मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने की।
पीड़िता और माता-पिता बयानों से मुकरे
यह मामला उस वक्त चुनौतीपूर्ण बन गया, जब ट्रायल के दौरान पीड़िता और उसके माता-पिता अपने पहले दिए गए बयानों से पलट गए और उनकी गवाही में विरोधाभास उजागर हुआ। ऐसी स्थिति में केवल मौखिक बयानों पर निर्भर रहने के बजाय अदालत ने वैज्ञानिक प्रमाणों को सबसे ऊपर रखा।
डीएनए रिपोर्ट बनी निर्णायक आधार
जांच के दौरान पेश की गई डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह साबित हुआ कि पीड़िता से जन्मे बच्चे का पिता आरोपी ही है। इसी वैज्ञानिक साक्ष्य को महत्वपूर्ण आधार मानते हुए कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।
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