बिहार का एक ऐसा गांव जहाँ 99 फीसदी आबादी खेती में है मशगूल, हरदा सब्जी मंडी की रौनक इन्हीं के दम पर बिहार एक महीने पहले 89
पूर्णिया जिले का नया टोला ठाडा गांव राज्य भर में किसानों के गांव के तौर पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। यहाँ की 99 प्रतिशत आबादी खेती को ही अपनी आजीविका का मुख्य साधन मानती है और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है।

किसानों का अनूठा गांव और उसकी पहचान

बिहार के पूर्णिया जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो खेती और किसानी को लेकर धारणाओं को बदल देती है। आमतौर पर देखा जाता है कि गांव के युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, लेकिन पूर्णिया जिले की हरदा पंचायत में स्थित नया टोला ठाडा गांव एक मिसाल बनकर उभरा है। इस गांव के 99 प्रतिशत निवासी आज भी पूर्ण रूप से कृषि पर निर्भर हैं। इस गांव की ख्याति केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में किसानों के गांव के रूप में फैली हुई है। यहां के निवासियों के लिए खेती सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।

नई पीढ़ी का खेती के प्रति लगाव

आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में युवा पीढ़ी खेती से दूर होती दिखती है, लेकिन नया टोला ठाडा गांव का परिदृश्य इसके उलट है। यहां बुजुर्गों के साथ-साथ युवा भी खेती के काम में बढ़-चढ़कर दिलचस्पी लेते हैं। यह गांव जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गांव में सरकारी नौकरी करने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है, जो यह साबित करता है कि स्थानीय लोग अपनी पुश्तैनी जमीन और खेती की कला को ही अपना करियर मान चुके हैं। गांव के किसान न केवल पारंपरिक फसलों की खेती करते हैं, बल्कि वे आधुनिक और नई तकनीकों को अपनाने में भी सबसे आगे रहते हैं।

सब्जी मंडियों की लाइफलाइन

हरदा बाजार की सब्जी मंडी में अगर सबसे ज्यादा सब्जियों की आपूर्ति की बात की जाए, तो इसमें इस गांव के किसानों का योगदान सबसे अधिक है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी कड़ी मेहनत के कारण ही क्षेत्र की मंडी में हर दिन ताजी सब्जियां पहुंचती हैं। स्थानीय निवासी विजय सिंह, भोला सिंह, हरेंद्र कुमार, पंकज कुमार और 73 वर्षीय बुजुर्ग रामचंद्र सिंह जैसे कई ग्रामीणों ने एक सुर में बताया कि खेती ही उनके गांव की आय का मुख्य स्रोत है। उनकी खेती की दक्षता ही है कि पूरा गांव एकजुट होकर इस कार्य में जुटा रहता है।

खेती की शुरुआत और तकनीकी बदलाव

गांव के इतिहास पर नजर डालें तो ग्रामीणों का कहना है कि करीब 55 साल पहले वैशाली से आए कुछ लोगों ने यहां खेती की नींव रखी थी। तब से लेकर आज तक यह गांव निरंतर प्रगति के पथ पर है। समय के साथ गांव के किसानों ने खेती के नए-नए तरीकों और आधुनिक उपकरणों का समावेश किया है, जिससे उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। नई तकनीक को अपनाने के कारण ही इस गांव के युवा न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि उन्हें विभिन्न सरकारी प्रदर्शनियों में भी सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, वे खेती के आधुनिक स्वरूप को अपनाकर दिन-प्रतिदिन अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं और जिले के अन्य गांवों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं। इस गांव के लोगों का मानना है कि कृषि के क्षेत्र में ही भविष्य है और मेहनत के बल पर खेती को एक लाभकारी पेशा बनाया जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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