भारत
9 घंटे पहले
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विचारों
गर्मी का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि दुधारू पशुओं के लिए भी मुश्किल भरा होता है। खासकर अप्रैल से अक्टूबर के बीच जब तापमान लगातार चढ़ता रहता है, तब इसका सबसे ज्यादा असर गाय-भैंस जैसे पशुओं पर पड़ता है। इस दौरान उनमें हीट स्ट्रेस यानी गर्मी के तनाव की समस्या तेजी से बढ़ने का खतरा रहता है, जो उनकी सेहत और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर पशु बार-बार हांफने लगें, सामान्य से अधिक पानी पीने लगें, चारा कम खाएं, सुस्त और थके हुए नजर आएं या उनका दूध उत्पादन अचानक घट जाए, तो ये सभी गर्मी के गंभीर प्रभाव की ओर इशारा करते हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही सावधान हो जाना चाहिए।
इन संकेतों की समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी है, क्योंकि जरा सी लापरवाही पशुओं की सेहत बिगाड़ सकती है और इसका सीधा असर पशुपालकों की आमदनी पर भी पड़ता है।
विशेषज्ञों की सलाह
जानकारों का कहना है कि गर्मी के दिनों में पशुओं को छायादार जगह पर रखना चाहिए और उन्हें पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना चाहिए। दिन के सबसे गर्म समय में पशुओं को काम पर लगाने के बजाय आराम देना फायदेमंद रहता है।
कारगर देसी तरीके
ग्रामीण इलाकों में अपनाए जाने वाले कुछ पारंपरिक उपाय भी पशुओं को गर्मी से राहत दिलाने में काफी असरदार माने जाते हैं। इनमें पशुओं के शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करना और उनके आहार में हरे चारे की मात्रा बढ़ाना प्रमुख हैं। ये आसान उपाय पशुओं को ठंडक देने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।
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