धर्म
एक घंटा पहले
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विचारों
पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास को पूजा-पाठ, व्रत और साधना के लिए सबसे शुभ काल माना गया है। इसी अधिक मास में संवत 2083 का आखिरी प्रदोष व्रत आ रहा है, जिसे बेहद ही विशेष बताया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस अवसर पर की गई पूजा-अर्चना और व्रत से भक्तों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं।
भगवान शिव की नित्य आराधना करने से जीवन सरल और सुखमय बनता है। भोलेनाथ की पूजा, उपासना और अभिषेक के लिए धर्म नगरी हरिद्वार में कई प्राचीन सिद्ध पीठ स्थल मौजूद हैं, जहां श्रद्धालु आकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
प्रदोष तिथियों का दुर्लभ संयोग
पंचांग के अनुसार एक संवत में भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए 24 प्रदोष तिथियों का आगमन होता है। किंतु तीन संवत बाद पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास के दौरान दो प्रदोष तिथियों का आना विशेष महत्व रखता है। संयोगवश साल 2026 में चल रहे संवत 2083 के अधिक मास का आखिरी प्रदोष व्रत बेहद शुभ घड़ी में आ रहा है। मान्यता है कि इस दिन सिद्ध पीठ मंदिर में जाकर श्रद्धा और भक्ति भाव से विशेष पद्धति से भोलेनाथ का अभिषेक करने पर शिव धाम के द्वार खुल जाते हैं।
आखिरी प्रदोष व्रत क्यों है खास
हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित पंडित कन्हैया बताते हैं कि पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास पूजा-पाठ और व्रत के लिए सबसे उत्तम समय होता है। उनके अनुसार संवत 2083 के अधिक मास का आखिरी प्रदोष व्रत बेहद ही खास होने वाला है। हरिद्वार में भगवान शिव के अनेक शिवालय स्थित हैं और इनमें से कुछ का वर्णन वेदों, पुराणों जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है।
इन सिद्ध मंदिरों में करें पूजा
हरिद्वार की उप नगरी कनखल को भगवान शिव की ससुराल माना जाता है। यहां स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर, बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर, गौरी शंकर महादेव मंदिर, नीलेश्वर महादेव मंदिर, गंगा किनारे स्थित तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर और दरिद्र भंजन महादेव मंदिर प्रमुख हैं। मान्यता है कि 12 जून शुक्रवार को इन मंदिरों में विशेष पद्धति से पूजा-आराधना करने पर भोलेनाथ की कृपा सदैव बनी रहती है।
खुल जाएगा शिव धाम का मार्ग
पंडित कन्हैया आगे बताते हैं कि 12 जून शुक्रवार को अधिक मास का आखिरी प्रदोष व्रत पड़ेगा। इस दिन इन सिद्ध पीठ स्थलों में जाकर श्रद्धा-भक्ति भाव से समर्पित होकर बेलपत्र, दूध, दही, शहद, जौ और गंगाजल आदि से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने पर मन की मनोकामनाएं बिना मांगे ही पूर्ण हो जाती हैं।
उनका कहना है कि इस दिन भोलेनाथ से केवल अपने लिए मंगलकारी वस्तुएं मांगने पर वे सभी इच्छाएं पूरी होती हैं, जिससे आने वाली कई पीढ़ियां भी सुख-शांति और समृद्धि के साथ जीवन व्यतीत कर पाती हैं। साथ ही शिव धाम जाने का मार्ग भी खुल जाता है।
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