गुजरात
14 घंटे पहले
3
विचारों
गुजरात से साइबर ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 72 वर्ष के एक व्यक्ति से जालसाजों ने 1.47 करोड़ रुपये हड़प लिए। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है और उन्होंने लोगों से ठगी के नए हथकंडों के प्रति चौकन्ना रहने की अपील की है। गृह मंत्रालय के साइबर सुरक्षा विभाग के मुताबिक, अपराधियों ने सीबीआई, ईडी और कुछ अन्य एजेंसियों के अधिकारी बनकर बुजुर्ग से संपर्क किया और उन्हें लगातार डराते-धमकाते हुए रकम वसूलते रहे।
साइबर विंग के अधिकारियों ने बताया कि ठगों ने वीडियो कॉल और नकली दस्तावेजों का सहारा लेकर एक मनगढ़ंत कहानी गढ़ी। इसी झूठी कहानी के आधार पर उन्होंने बुजुर्ग पर गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त होने का इल्जाम मढ़ा।
28 दिनों तक चला 'डिजिटल अरेस्ट' का खेल
जालसाजों ने बुजुर्ग को यकीन दिलाया कि वे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं और उनकी डिजिटल जानकारी लीक होने के बाद पुलिस को सब कुछ मालूम पड़ चुका है। दबाव और बढ़ाने के लिए उन्होंने बुजुर्ग को कथित रूप से डिजिटल अरेस्ट कर लिया और इस दौरान उनकी हर हरकत पर नजर रखी गई। अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित को करीब 28 दिनों तक लगातार मानसिक दबाव में रखा गया। ठगों ने उन्हें चेताया कि अगर उन्होंने परिवार के किसी सदस्य को इसकी भनक दी या किसी से मदद मांगने की कोशिश की, तो उनकी कानूनी मुश्किलें और गहरा जाएंगी। पीड़ित पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए जालसाज उन्हें लगातार भयभीत करते रहे।
सेटलमेंट का झांसा देकर हड़पे करोड़ों
ठगों ने पैसों की पुष्टि करने के नाम पर कई बार बुजुर्ग से अपने खातों में रकम मंगवाई और बाद में मामला बंद कराने का झांसा देकर भी पैसे वसूले। बुजुर्ग यही समझते रहे कि वे खुद को बचाने के लिए भुगतान कर रहे हैं और इसी क्रम में उन्होंने कुल 1.47 करोड़ रुपये आरोपियों के खातों में भेज दिए। इसके बाद ही उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
गृह मंत्रालय की चेतावनी
गृह मंत्रालय के साइबर विभाग ने कहा कि इस तरह के घोटाले तेजी से फैल रहे हैं, जिनमें ठग लोगों के डर और भरोसे का गलत फायदा उठाते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि असल में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था होती ही नहीं है, बल्कि अपराधी पीड़ितों को अलग-थलग करने के मकसद से इसका इस्तेमाल करते हैं। अधिकारियों ने साफ कहा कि कोई भी वैध कानून प्रवर्तन एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए न तो गिरफ्तारी करती है और न ही जांच, और न ही सत्यापन या मामले के निपटारे के लिए पैसे भेजने को कहती है।
शिकायत के लिए 1930 पर करें कॉल
सरकार ने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था को भी और मजबूत किया है। किसी भी ठगी की आशंका होने पर लोग राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर सकते हैं या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर घटना की जानकारी दे सकते हैं। अधिकारियों ने आगाह किया है कि डर ही ऑनलाइन जालसाजों का सबसे बड़ा हथियार है। ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि लोग धमकी भरे फोन को गंभीरता से न लें, भले ही सामने वाला किसी भी एजेंसी का होने का दावा क्यों न कर रहा हो। असली पुलिसकर्मी या किसी एजेंसी के अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर ही गिरफ्तारी करते हैं।
Comments
0 comment