समस्तीपुर में मत्स्य पालन के लिए शानदार मौका: 10 लाख की लागत पर सरकार दे रही 7 लाख तक की सब्सिडी बिहार एक महीने पहले 46
समस्तीपुर के एससी, एसटी और ईबीसी वर्ग के किसानों के लिए मत्स्य पालन व्यवसाय शुरू करने का बेहतरीन अवसर है, जहाँ सरकार 70 प्रतिशत तक अनुदान मुहैया करा रही है।

मछली पालन व्यवसाय के लिए विशेष सरकारी सहायता

बिहार के समस्तीपुर जिले में कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में काम कर रहे किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिला मत्स्य कार्यालय की ओर से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के किसानों के लिए एक विशेष पैकेज योजना शुरू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों की आय को बढ़ाना और उन्हें आधुनिक तकनीक से मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करना है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।

योजना की मुख्य विशेषताएं और सब्सिडी का गणित

इस मत्स्य पैकेज योजना की कुल लागत 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है। सरकार ने इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को कुल लागत का 70 प्रतिशत अनुदान देने का निर्णय लिया है। इसका मतलब यह है कि एक किसान को अधिकतम 7 लाख रुपये तक की सब्सिडी का लाभ मिल सकता है। विभाग ने इस योजना के तहत लाभार्थियों के लिए विशेष लक्ष्य तय किए हैं। इसके अनुसार, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए 14 यूनिट और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए 6 यूनिट का लक्ष्य रखा गया है।

किन सुविधाओं पर मिलेगा अनुदान?

जिला मत्स्य पदाधिकारी अर्पणा कुमारी ने जानकारी दी है कि इस योजना का दायरा केवल तालाब खोदने तक ही सीमित नहीं है। इसमें मछली पालन से जुड़ी आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों को भी शामिल किया गया है। योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी का लाभ इन कार्यों के लिए लिया जा सकता है:

  • नए तालाब का निर्माण।
  • मछली पालन से संबंधित शेड का निर्माण।
  • सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और पंपसेट की स्थापना।
  • पानी में ऑक्सीजन का स्तर उचित बनाए रखने के लिए एरेटर मशीन।
  • मछली पालन में काम आने वाले अन्य जरूरी उपकरण और इनपुट।

लीज पर जमीन लेने वाले किसान भी पात्र

एक महत्वपूर्ण राहत देते हुए विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन किसानों के पास अपनी निजी जमीन नहीं है, वे भी इस योजना का लाभ उठाने के योग्य हैं। ऐसे किसान लीज पर जमीन लेकर मत्स्य पालन शुरू कर सकते हैं। इसके लिए केवल 1,000 रुपये के स्टांप पेपर पर विधिवत लीज एग्रीमेंट होना अनिवार्य है। योजना के नियमों के मुताबिक, एक यूनिट के लिए कम से कम आधा एकड़ भूमि होना आवश्यक है। आधुनिक तकनीक के समावेश से न केवल उत्पादन क्षमता में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

आवेदन की प्रक्रिया

इच्छुक किसान जो इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, वे बिहार फिशरीज की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर जाकर 'पैकेज योजना' के विकल्प का चयन करना होगा और वहां पूछी गई सभी जानकारी दर्ज करने के साथ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे निर्धारित लक्ष्यों के भीतर चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए जल्द से जल्द आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर लें। यह योजना मछली पालन को पारंपरिक तरीके से हटाकर एक व्यावसायिक रूप देने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है, जिससे कम लागत में आधुनिक संसाधनों का उपयोग करना संभव हो पाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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