उपनाम: पारंपरिक व्यंजन
रेसिपी: न घी न तेल, मिट्टी की हांडी में अरवा चावल से बनता है ढकनेसर पुआ, दूध में डूबते ही दोगुना हो जाता है स्वाद
झारखंड का पारंपरिक ढकनेसर पुआ अरवा चावल से बिना एक बूंद तेल के मिट्टी की हांडी में भाप पर सेंका जाता है और मीठे दूध में डुबोकर मेवे के साथ परोसा जाता है। जानिए इसे घर पर बनाने की आसान विधि।
देसी स्वाद का असली बादशाह है गोविंद गट्टे की सब्ज़ी, जिसके आगे शाही पनीर भी लगे फीका
पनीर, काजू और हरी मिर्च से भरे स्टफ्ड गट्टों को मसालेदार दही वाली ग्रेवी में पकाकर बनने वाली राजस्थान की मशहूर गोविंद गट्टे की सब्ज़ी अपने अनोखे और शाही स्वाद के लिए जानी जाती है। जालोर की गृहिणी मंजुला सोनी की बताई इस पारंपरिक रेसिपी से इसे घर पर ही आसान...
जब बाजार में अंकल चिप्स और लेज का नाम तक नहीं था, मिथिला में तभी से घर-घर बनते आ रहे ये देसी आलू चिप्स, बिना केमिकल सालभर रहते कुरकुरे
मिथिला के घरों में पीढ़ियों से हाथ से बने, धूप में सुखाए आलू के चिप्स की परंपरा कायम है, जिन्हें बिना किसी केमिकल या प्रिजर्वेटिव के सालभर स्टोर किया जाता है। आज भी मेहमानों को इन्हीं चिप्स और चाय से स्वागत करना यहां स्नेह की पहचान माना जाता है।
हर मौसम में पसंदीदा बघेलखंडी महेरी, महज 5 मिनट में तैयार स्वाद और सेहत का देसी खजाना
मट्ठा और चावल के मेल से बनने वाली बघेलखंड की पारंपरिक महेरी हर मौसम में चाव से खाई जाती है और इसे बनाने में सिर्फ पांच मिनट लगते हैं। जानिए स्थानीय निवासी मीना द्विवेदी से सीखी आसान बघेलखंडी रेसिपी।
55 साल की पूनम का दादी-नानी वाला स्वाद बना कमाई का जरिया, चावल की चिरौरी और तिसी की बड़ी के लिए घर तक आते ऑर्डर
रांची की 55 वर्षीय पूनम देवी साबूदाना पापड़, चावल की चिरौरी, तिसी की बड़ी और करीब 50 तरह के अचार बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं। पुराने पारंपरिक स्वाद की चाह में लोग खुद उनके घर पहुंचकर ऑर्डर देते हैं।
गर्मी में जरूर चखें छत्तीसगढ़ की देसी दही वाली फिश करी, सरसों-जीरे और दही का तड़का बनाता है खास
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक दही वाली फिश करी दही की हल्की खटास और देसी मसालों के कारण गर्मी के मौसम के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। यह स्वाद और सेहत दोनों के लिहाज से बेहतरीन है।