55 साल की पूनम का दादी-नानी वाला स्वाद बना कमाई का जरिया, चावल की चिरौरी और तिसी की बड़ी के लिए घर तक आते ऑर्डर झारखंड 2 महीने पहले 50
रांची की 55 वर्षीय पूनम देवी साबूदाना पापड़, चावल की चिरौरी, तिसी की बड़ी और करीब 50 तरह के अचार बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं। पुराने पारंपरिक स्वाद की चाह में लोग खुद उनके घर पहुंचकर ऑर्डर देते हैं।

रांची की रहने वाली 55 वर्षीय पूनम देवी आज उन पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान दे रही हैं, जिन्हें लोग धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं। साबूदाना का पापड़, चावल की चिरौरी और कई तरह की बड़ी जैसे दादी-नानी के जमाने के स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। आज के दौर में लोगों के पास इन चीजों को घर पर बनाने का समय नहीं है, लेकिन स्वाद हर कोई चखना चाहता है, और यही वजह है कि पूनम का काम खूब चल निकला है।

पारंपरिक स्वाद जो आज भी सबकी पसंद

पूनम साबूदाना का पापड़, चावल की चिरौरी, अलग-अलग तरह की बड़ी और तिसी की बड़ी जैसी चीजें तैयार करती हैं। इन व्यंजनों को खासकर पुरानी पीढ़ी के लोग बेहद पसंद करते हैं। उनके बनाए हर पैकेट की कीमत 120 से 150 रुपये तक होती है। इसके साथ ही वह करीब 50 तरह के अचार भी बनाती हैं।

मां, दादी और नानी से सीखा हुनर

पूनम बताती हैं कि ये सारी चीजें बनाना उन्होंने अपनी मां, दादी और नानी से सीखा। बचपन से वह उन्हें ये सामान बनाकर धूप में सुखाते देखती थीं, जो सालभर तक चलता था और खराब भी नहीं होता था। समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि लोग इन परंपरागत व्यंजनों को भूलते जा रहे हैं।

उनका कहना है कि आज के युवाओं को शायद यह भी पता न हो कि साबूदाना का पापड़, चावल की चिरौरी और तिसी की बड़ी आखिर होती क्या है। लेकिन कुछ लोग आज भी ऐसे हैं, जिनका मन इन्हें खाने का करता है, मगर बनाना नहीं आता। घर में दादी-नानी नहीं रहीं, तो पूनम ने सोचा कि क्यों न इसी काम को आगे बढ़ाया जाए।

50 तरह के अचार से लेकर गुजिया तक

पूनम के पास अचार की करीब 50 अलग-अलग किस्में मिलती हैं। नींबू से लेकर मिक्स मिर्च तक हर तरह का अचार वह तैयार करती हैं। इसके अलावा बच्चों के लिए फ्लेवर कैंडी और खोवा की गुजिया भी बनाती हैं। उनका कहना है कि जब लोग सफर पर निकलते हैं या रांची से कोई अमेरिका तक जाता है, तो यह सामान अच्छी तरह पैक कराकर साथ ले जाता है। कई लोग तो एक बार में 5000 रुपये तक का सामान खरीदकर ले जाते हैं।

घर आकर देते हैं लोग ऑर्डर

पूनम के अनुसार आज लोग सीधे उनके घर पहुंचकर या फोन पर बात कर ऑर्डर दे देते हैं। हर दिन कम से कम 15 से 20 पैकेट तो आसानी से बिक ही जाते हैं। उनके पास मिर्ची का पापड़ भी मिलता है, जिसकी एडवांस बुकिंग तक होती है। कई बार ऐसा भी होता है कि लोग पहुंचते हैं और सामान उपलब्ध नहीं रहता। एक बार में लोग 30 से 40 पैकेट तक खरीदकर ले जाते हैं।

इस उम्र में भी अपने पैरों पर खड़ी

पूनम कहती हैं कि इस उम्र में भी वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और इसी काम की बदौलत उन्हें किसी से पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। आज उनकी महीने की कमाई अच्छी हो रही है और वह अपने दम पर घर चला रही हैं। साथ ही, इस काम को करने में उन्हें बेहद आनंद भी आता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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