जब बाजार में अंकल चिप्स और लेज का नाम तक नहीं था, मिथिला में तभी से घर-घर बनते आ रहे ये देसी आलू चिप्स, बिना केमिकल सालभर रहते कुरकुरे जीवनशैली एक महीने पहले 20
मिथिला के घरों में पीढ़ियों से हाथ से बने, धूप में सुखाए आलू के चिप्स की परंपरा कायम है, जिन्हें बिना किसी केमिकल या प्रिजर्वेटिव के सालभर स्टोर किया जाता है। आज भी मेहमानों को इन्हीं चिप्स और चाय से स्वागत करना यहां स्नेह की पहचान माना जाता है।

मिथिला की पहचान सिर्फ मखाना और पाग तक सीमित नहीं है। यहां की रसोई में एक ऐसा देसी स्वाद बसा है जो पीढ़ियों से हर घर की पहचान बना हुआ है, और वह है आलू के चिप्स। पर ये बाजार के पैकेट वाले चिप्स नहीं, बल्कि घरों में हाथ से तैयार किए, धूप में सुखाए और बड़े जतन से बनाए गए असली चिप्स हैं। खास बात यह कि इन्हें बिना किसी केमिकल और प्रिजर्वेटिव के बनाया जाता है और सालों-साल स्टोर करके रखा जा सकता है।

जब पैकेट वाले चिप्स का चलन ही नहीं था

दरभंगा में लोग बताते हैं कि जब बाजार में पैकेट वाले चिप्स मिलते तक नहीं थे, तभी से मिथिला के घरों में यह परंपरा चली आ रही है। आलू की फसल आने पर घर की महिलाएं बड़े आलू चुनकर उन्हें पतले-पतले स्लाइस में काटती हैं। यह हुनर दादी-नानी से सीखा हुआ होता है। कटे हुए स्लाइस को नमक मिले पानी में डालकर रखा जाता है, जिससे ये बाद में और ज्यादा कुरकुरे बनते हैं।

तेज धूप में तीन से चार दिन में हो जाते हैं तैयार

इसके बाद इन स्लाइस को धूप में सुखाने का काम शुरू होता है। इन्हें बांस की बड़ी टोकरियों में फैलाकर छत पर रख दिया जाता है। मिथिला की तेज धूप में ये 3 से 4 दिनों में सफेद-सुनहरे सूखे चिप्स में बदल जाते हैं। बिना किसी प्रिजर्वेटिव के ये लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और जब जरूरत हो, तभी तलकर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

पूरे साल का स्टॉक रखती हैं महिलाएं

दरभंगा की राजकुमारी देवी कहती हैं कि यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि एक परंपरा है। शादी-ब्याह हो या तीज-त्योहार, घर में मेहमान आते ही उन्हें गरमा-गरम चिप्स और चाय के साथ स्वागत किया जाता है। उनके मुताबिक हर घर में साल भर का चिप्स स्टॉक रखा जाता है ताकि कभी कमी न हो।

उपहार में भी दिए जाते हैं घर के बने चिप्स

सबसे खास बात यह है कि ये महज एक स्नैक नहीं, बल्कि मिथिला की मेहमाननवाजी की पहचान हैं। रिश्तेदारों को उपहार के तौर पर भी घर के बने चिप्स भेंट किए जाते हैं। यहां की महिलाओं का मानना है कि बाजार का सामान तो कोई भी ला सकता है, लेकिन घर के बने चिप्स में अपनापन और प्यार झलकता है।

बनाना भी बेहद आसान

शुद्धता से तैयार इन चिप्स को बनाना भी बहुत आसान है। सूखे चिप्स को गर्म तेल में डालते ही ये कुछ ही सेकंड में कुरकुरे और सुनहरे हो जाते हैं। ऊपर से काला नमक और लाल मिर्च डालते ही स्वाद और बढ़ जाता है। न किसी तरह की मिलावट, न कोई केमिकल, सिर्फ शुद्ध आलू और घर का प्यार। यही मिथिला की असली पहचान है, जहां परंपरा, स्वाद और अपनापन एक साथ मिलते हैं। बाजार के चिप्स आते-जाते रहते हैं, लेकिन घर में बने इन चिप्स का स्वाद आज भी उतना ही खास बना हुआ है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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