उपनाम: किसान
बिहार की भीषण गर्मी में लहलहा रहे पहाड़ी जैसे लाल रसीले सेब, चंपारण के किसान की मेहनत रंग लाई, मिल रहा मनचाहा दाम
पश्चिम चंपारण के शिशिर दुबे ने दो साल पहले अपने बाग में करीब 70 सेब के पौधे लगाए थे, जो अब अच्छा फल दे रहे हैं। गर्म इलाके में उगने वाला यह सेब बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
हनौता बांध बनकर तैयार, अब किसानों के सूखे खेतों तक पहुंचेगा पानी और लहलहाएंगी फसलें
सागर जिले की बहुप्रतीक्षित हनौता सिंचाई परियोजना का लगभग 95% काम पूरा हो चुका है और इसी रबी सीजन से किसानों को पानी मिलने लगेगा, जिससे करीब एक लाख एकड़ जमीन सिंचित होगी।
मानसून 2026 पर मंडराया 2015 जैसा सूखा! IMD के नए अलर्ट ने बढ़ाई किसानों की चिंता, कहां होगी सबसे कम बारिश?
मौसम विभाग ने 2026 के मानसून का अनुमान घटाकर एलपीए का 90 प्रतिशत कर दिया है, जिससे यह 2015 के बाद का सबसे सूखा साल बन सकता है। अल नीनो के कारण मानसून ब्रेक लंबा होने की आशंका है, जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे किसानों और ग्रामीण इकॉनमी पर पड़ सकता है।
तीन पीढ़ियों से मधुमक्खी पालन, बक्सों के साथ खेतों में डेरा डालने वाले इन लोगों की दिलचस्प तरकीब
अंबाला के बराड़ा इलाके में यमुनानगर से पहुंचे मधुमक्खी पालक फूलों की उपलब्धता के हिसाब से जगह-जगह घूमते हैं और सरसों-सूरजमुखी जैसे फूलों वाले खेतों में अपने लकड़ी के बक्से लेकर पहुंच जाते हैं।
उज्जैन मंडी में किसानों के लिए बड़ी राहत, 2 करोड़ के हाईटेक प्लांट में होगी फसल की मुफ्त सफाई, धूल-मिट्टी से नहीं गिरेगा भाव, बढ़ेगी आमदनी
उज्जैन कृषि उपज मंडी में करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक सारटेक्स क्लीनिंग और ग्रेडिंग प्लांट तैयार हो रहा है, जहां किसानों की उपज की निशुल्क सफाई और ग्रेडिंग होगी। निर्माण अंतिम चरण में है और जल्द ही यह सुविधा शुरू होने जा रही है।
गोबर खाद को सीधे खेत में डालना पड़ सकता है भारी, कृषि वैज्ञानिक से जानिए तैयार करने का सही तरीका
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गोबर को खुले में धूप में रखने से उसके लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। छायादार जगह पर नमी के साथ सड़ाकर तैयार की गई खाद ही फसल को दोगुना फायदा पहुंचाती है।
संकरैल में बनेगा अमूल का सबसे बड़ा डेयरी प्लांट, बंगाल में निवेश और रोजगार को मिलेगी रफ्तार
देश की अग्रणी डेयरी कंपनी अमूल पश्चिम बंगाल के संकरैल में अपना सबसे बड़ा डेयरी प्लांट लगाने जा रही है, जिसका भूमि पूजन 13 जून को होगा। इस परियोजना से राज्य में रोजगार, निवेश और डेयरी उद्योग को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बस एक बार छिड़काव और महीनों तक नहीं उगेगी खरपतवार, जानें फसल बचाने वाली कारगर तकनीक
बारिश के मौसम में तेजी से फैलने वाली खरपतवार किसानों की फसल के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है। फरीदाबाद के किसान सुरजीत सिंह के अनुसार सही दवाओं का इस्तेमाल इस समस्या से लंबे समय तक राहत दिला सकता है।
खरीफ की बुवाई से पहले मिट्टी परीक्षण क्यों जरूरी, खेत के किन हिस्सों से लें नमूना और क्या हैं नियम?
खरीफ फसल की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी परीक्षण बेहद अहम है, जिससे मिट्टी के पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है और उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल संभव हो पाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक खेत के अलग-अलग हिस्सों से सही तरीके से नमूना लेकर जांच कराना चाहिए।
खैरथल-तिजारा: बाजरे की बुवाई में आई तेजी, कपास और ग्वार से किसानों का घटता रुझान
जून की शुरुआती बारिश के बाद खैरथल-तिजारा जिले में खरीफ सीजन शुरू हो गया है और किसान बाजरे की बुवाई में जुट गए हैं। कम लागत और बेहतर पैदावार के चलते बाजरा किसानों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
धान की रोपाई से पहले करें यह जरूरी काम, खरपतवार की समस्या होगी 80% तक कम
बारिश का मौसम आते ही किसान धान की रोपाई की तैयारी में लग जाते हैं। रोपाई से 20-25 दिन पहले हल्की सिंचाई और कीचड़ वाली जुताई करने से खरपतवार की समस्या लगभग 80 प्रतिशत तक घटाई जा सकती है।
धान की बुवाई से पहले खेतों की जुताई क्यों है बेहद जरूरी? जान लें ये अहम बात
नौतपा की तेज गर्मी खरीफ फसल की तैयारी के लिए सही समय है। इस दौरान खेतों की जुताई करने से खरपतवार और कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे आगे फसल को नुकसान कम होता है।
एमपी का वह जैविक गांव, जहां कभी हर घर में बनती थी खाद, अब फैल रही रासायनिक खेती
मध्यप्रदेश का मलगांव कभी पूरे प्रदेश में 'जैविक ग्राम' के रूप में पहचाना जाता था, लेकिन आज यहां एक भी खेत पूरी तरह जैविक नहीं बचा और किसान रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर निर्भर हो गए हैं।