महराजगंज की छात्रा का कमाल: अब बिना बिजली और मेहनत के खेतों में होगा छिड़काव उत्तर प्रदेश 4 महीने पहले 121
उत्तर प्रदेश के महराजगंज की एक छात्रा ने अनोखा पेस्टिसाइड स्प्रेयर बनाया है, जो चलने से मिलने वाली ऊर्जा से चलता है और किसानों को बिजली व पंपिंग के झंझट से मुक्ति दिलाता है।

बिना बिजली-बैटरी चलने वाली मशीन

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में खेती को आसान बनाने के लिए एक छात्रा ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सिसवा बाजार स्थित आरपीआईसी स्कूल की छात्रा रंजू मद्धेशिया ने एक ऐसा पेस्टिसाइड स्प्रेयर तैयार किया है, जिसे चलाने के लिए न तो बिजली की जरूरत है और न ही हाथ से पंपिंग करने की मेहनत की आवश्यकता है। छात्रा ने इस मशीन को किसान वरदान 0.2 नाम दिया है।

कैसे काम करती है यह तकनीक

इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसके विशेष जूते हैं। इन जूतों के अंदर एक स्पेशल एयर ब्लैडर लगा हुआ है। जब किसान इन जूतों को पहनकर खेत में चलता है, तो हर कदम के साथ कंप्रेस्ड एयर जनरेट होती है। यह ऊर्जा एक पाइप के जरिए स्प्रेयर के टैंक तक पहुंचती है, जिससे कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव अपने आप होने लगता है।

पर्यावरण के अनुकूल और किफायती

रंजू मद्धेशिया के मुताबिक, यह यंत्र न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि किसानों का खर्च भी बचाएगा। इसे बनाने में रंजू की मदद उनकी सहेली निभा यादव ने की है। मशीन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • इसमें किसी भी प्रकार के बाहरी ईंधन या बिजली की खपत नहीं होती।
  • सामान्य स्प्रेयर के मुकाबले इसका वजन काफी कम है, जिससे इसे ढोना आसान है।
  • पंपिंग की जरूरत खत्म होने से किसानों की शारीरिक मेहनत बचती है।

केवल 700 रुपये में होगी तैयार

छात्रा ने बताया कि इस प्रोटोटाइप को बनाने में उन्हें पंद्रह सौ से सोलह सौ रुपये का खर्च आया है। हालांकि, यदि इस स्प्रेयर का बड़े स्तर पर निर्माण किया जाए, तो इसकी लागत केवल पांच सौ से सात सौ रुपये के बीच आएगी। रंजू पिछले एक साल से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थीं और इसे अंतिम रूप देने में उन्हें लगभग दो दिन का समय लगा। इस आविष्कार से स्थानीय किसानों को खेती के दौरान कम लागत और बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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