उपनाम: झारखंड पर्यटन
बोकारो का खांजो वॉटरफॉल: भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में बसा एक खूबसूरत ठिकाना, मानसून में दिखता है जन्नत सा नजारा
झारखंड के बोकारो जिले में स्थित खांजो वॉटरफॉल पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक स्थल है, जहां मानसून के दौरान बहता हुआ पानी और चारों तरफ फैली हरियाली जन्नत का अहसास कराती है।
जमशेदपुर: बारिश के बाद डोबो पुल का अद्भुत नजारा बना लोगों की पहली पसंद, सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
झारखंड के जमशेदपुर में हुई भारी बारिश ने डोबो पुल के आसपास के प्राकृतिक वातावरण को और भी सुंदर बना दिया है। सूर्यास्त और नदी के बढ़ते जलस्तर का मेल लोगों को अपनी ओर खींच रहा है, जिससे यह स्थान शाम बिताने का प्रमुख केंद्र बन गया है।
रांची का दशम फॉल: बारिश में किसी विदेशी झरने जैसा दिखता है यह नजारा, जंगल के बीच 10 किलोमीटर की रोमांचक यात्रा
बरसात के मौसम में रांची का मशहूर दशम फॉल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के चरम पर होता है। घने जंगलों से होकर गुजरने वाला 10 किलोमीटर का रास्ता इसे पर्यटकों के लिए एक यादगार सफर बनाता है।
रांची का नेहलगढ़ गांव: पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बसा अनोखा पर्यटन स्थल, जहां मिलता है ऋषिकेश जैसा असीम सुकून
झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नेहलगढ़ गांव इन दिनों अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और अद्भुत शांति के लिए पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है।
पलामू का चियांकी पहाड़: 500 फीट ऊंची गुफा में विराजे हैं भोलेनाथ, प्राकृतिक खूबसूरती और आस्था का अद्भुत संगम
झारखंड के पलामू जिले में स्थित चियांकी पहाड़ सावन के पावन अवसर पर शिव भक्तों के लिए प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 500 फीट की ऊंचाई पर गुफा में स्थित शिवलिंग और यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।
रानी चुआ: स्वर्णरेखा नदी का रहस्यमयी उद्गम, जहां से सावन में कांवड़िए भरते हैं जल
झारखंड की राजधानी रांची में स्थित रानी चुआं न केवल एक कुआं है, बल्कि इसे स्वर्णरेखा नदी का उद्गम स्थल भी माना जाता है। सावन के पावन महीने में श्रद्धालु यहां से जल लेकर 25 किलोमीटर की पदयात्रा करते हैं और पहाड़ी बाबा मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते है...
देवघर में हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत: अब बाबा बैद्यनाथ धाम का हवाई दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु, जानें किराया
केदारनाथ की तर्ज पर देवघर में श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो गई है, जहाँ लोग मामूली शुल्क देकर बाबा बैद्यनाथ धाम और आसपास के धार्मिक स्थलों का आसमान से दीदार कर सकेंगे।
पलामू का काला पहाड़: प्राकृतिक खूबसूरती, रहस्य और आस्था का एक अनोखा संगम
झारखंड के पलामू जिले में स्थित काला पहाड़ अपनी विशिष्ट भौगोलिक बनावट और धार्मिक मान्यताओं के लिए मशहूर है। यह स्थल न केवल पर्यटकों के लिए एक आकर्षण है, बल्कि सावन और मकर संक्रांति पर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
जमशेदपुर का डिमना लेक बैक साइड: शहर की भागदौड़ से दूर सुकून और प्राकृतिक खूबसूरती का अनोखा ठिकाना
जमशेदपुर शहर से मात्र 12 किलोमीटर दूर स्थित डिमना लेक का बैक साइड पर्यटकों के लिए शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का नया केंद्र बन गया है, जहां लोग मछली पकड़ने और परिवार के साथ समय बिताने आ रहे हैं।
मानसून की छुट्टियों के लिए बेहतरीन जगह: परिवार के साथ बोकारो के कूलिंग पॉन्ड का आनंद लें
बोकारो के सेक्टर-9 में स्थित कूलिंग पॉन्ड मानसून के मौसम में घूमने के लिए एक शानदार पिकनिक स्पॉट है, जो अपनी हरियाली और पानी से घिरे टापू के लिए प्रसिद्ध है।
रांची का दशम जलप्रपात और एक अधूरी प्रेम कहानी
रांची के प्रसिद्ध दशम वॉटरफॉल का इतिहास केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक प्रेमी जोड़े की दुखद और भावुक प्रेम कहानी से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
सावन में शिव भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी, देवघर से गुवाहाटी तक अब सीधी उड़ान से करें सफर
बाबा बैद्यनाथ धाम और मां कामाख्या मंदिर के भक्तों के लिए हवाई सफर आसान होने जा रहा है, क्योंकि देवघर से गुवाहाटी के बीच नई सीधी हवाई सेवा 4 अगस्त से शुरू हो रही है।
सावन में देवघर जाने वाले कांवरियों के लिए खुशखबरी, ठहरने और मोबाइल चार्जिंग की मिलेगी मुफ्त सुविधा
सावन के पावन महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए देवघर प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने ठहरने के लिए आधुनिक टेंट सिटी और विश्राम गृहों का इंतजाम किया है। यहां कांवरियों को बेड, बिजली और स्नान जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त...
जसीडीह की मशहूर पापड़ी चाट: बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा का लाजवाब स्वाद
देवघर और जसीडीह आने वाले सैलानी बाबा के दर्शन के बाद यहां की खास पापड़ी चाट का स्वाद लेना कभी नहीं भूलते हैं। मात्र 40 रुपये की कीमत वाली यह चाट स्थानीय लोगों के साथ ही बाहरी पर्यटकों की भी पहली पसंद बनी हुई है।
रांची का 300 साल पुराना सुतियाम्बे किला: जहां शाम ढलते ही पसर जाता है खौफ, सुनाई देती हैं रोने और पायल की आवाजें
झारखंड की राजधानी रांची से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक सुतियाम्बे किला अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य समेटे हुए है, जहां शाम होते ही लोग जाने से डरते हैं।