झारखंड
3 घंटे पहले
3
विचारों
पहाड़ की चोटी पर विराजमान हैं महादेव
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान देश भर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पलामू जिले में स्थित चियांकी पहाड़ इन दिनों आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के अनूठे संगम के रूप में उभरकर सामने आया है। यहाँ समुद्र तल से करीब 500 फीट की ऊंचाई पर एक गुफा मौजूद है, जिसके भीतर प्राचीन शिवलिंग स्थापित हैं। सावन के महीने में यहाँ दूर-दराज से बड़ी संख्या में भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा करने के लिए पहुंच रहे हैं। पहाड़ की ऊंचाई से मेदिनीनगर शहर का जो नजारा दिखाई देता है, वह पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए किसी रोमांच से कम नहीं है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष अनुभव
पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह चियांकी पहाड़ न केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी नैसर्गिक छटा के लिए भी जाना जाता है। यहाँ पूजा करने पहुंचीं आकृति तिवारी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सावन के पवित्र अवसर पर भगवान शिव के दर्शन करना बहुत सुखद अनुभव है। उन्होंने कहा कि यहाँ दर्शन के साथ-साथ शहर की सुंदरता का जो मनोरम दृश्य देखने को मिलता है, वह दिल को मोह लेने वाला है। पहली बार इस स्थल पर आए अविनाश कुमार ने बताया कि चियांकी पहाड़ का शांत वातावरण मन को गहरा सुकून देता है। वहीं, पलक तिवारी ने कहा कि गुफा में भगवान शिव के विराजमान होने की जानकारी मिलने के बाद वे यहाँ खिंची चली आईं और यहाँ आने के बाद उन्हें अद्भुत शांति का अनुभव हुआ।
सैकड़ों साल पुरानी है परंपरा
मंदिर के पुजारी दीपक कुमार तिवारी के अनुसार, इस स्थान पर शिव पूजा और धार्मिक परंपराएं सैकड़ों वर्षों पुरानी हैं। गुफा के भीतर स्थित शिवलिंग के अलावा, पहाड़ के नीचे भी एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। इस मंदिर में भगवान शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण और हनुमान जी की दिव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इस मंदिर का निर्माण स्थानीय निवासी कृष्ण वल्लभ तिवारी द्वारा 15 फरवरी 2017 को करवाया गया था। पुजारी ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि 1960 के दशक में यह पूरा इलाका बेहद सुनसान था। उस दौर में पहाड़ पर बाघों का बसेरा हुआ करता था, जिसके चलते स्थानीय लोग गुफा के पास जाने से काफी डरते थे। आज भी यहाँ बंदरों और लंगूरों की टोली को अक्सर देखा जा सकता है, जो इस स्थान की प्राकृतिक जीवंतता को दर्शाते हैं।
बाबा योगीराज की गहरी मान्यता
चियांकी पहाड़ की धार्मिक आस्था के साथ 'बाबा योगीराज' की कथा भी जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों के बीच बाबा योगीराज को लेकर गहरी श्रद्धा है। मान्यताओं के अनुसार, पहले बाबा योगीराज पहाड़ के शिखर पर विराजमान थे और शिवशरण बैगा उनकी सेवा एवं पूजा करते थे। जैसे-जैसे शिवशरण बैगा की उम्र बढ़ी, उनके लिए पहाड़ पर चढ़कर पूजा करना कठिन हो गया। उन्होंने बाबा से नीचे आने की प्रार्थना की, जिसके बाद बाबा योगीराज का स्थान पहाड़ के नीचे माना जाने लगा। आज भी उस स्थान पर एक शिला के रूप में बाबा की पूजा की जाती है।
पर्यटन और विकास की नई राह
पुजारी दीपक कुमार तिवारी ने बताया कि पहले चियांकी पहाड़ तक पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन समय के साथ हुए विकास कार्यों ने इसे श्रद्धालुओं के लिए सुगम बना दिया है। अब पर्यटन विभाग द्वारा इस स्थल के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों के जरिए जब से लोगों को चियांकी पहाड़ के बारे में जानकारी मिली है, तब से यहां बाहरी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग आने लगे हैं। यह स्थान अब न केवल शिवभक्तों के लिए बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
Comments
0 comment