उपनाम: झारखंड पर्यटन
जमशेदपुर की भागदौड़ से दूर बसा यह शांत इलाका है पिकनिक के लिए बेस्ट, खूबसूरती देख आप भी कहेंगे वाह!
जमशेदपुर शहर से महज 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हलुदबनी गांव के पास एक नया और बेहद शांत पर्यटन स्थल लोगों का दिल जीत रहा है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों और जलाशय के लिए मशहूर यह जगह सुकून की तलाश करने वालों के लिए एक आदर्श पिकनिक स्पॉट बनती जा रही है...
रांची की तैमारा घाटी का रहस्यमयी मंदिर: नारियल चढ़ाते ही दूर हो जाते हैं हादसे का डर
रांची से 25 किलोमीटर दूर स्थित तैमारा घाटी में एक ऐसा मंदिर है, जहां श्रद्धालु अपनी सुरक्षा के लिए नारियल चढ़ाते हैं। लोगों का मानना है कि यहां माता काली और अन्य देवी-देवताओं के आशीर्वाद से सड़क हादसों में कमी आई है।
जमशेदपुर के पास सुकून भरी जगह: पाना सिली में प्रकृति का अनूठा संगम
अगर आप शहर की भागदौड़ से दूर वीकेंड बिताना चाहते हैं, तो जमशेदपुर के करीब पोटका का पाना सिली एक बेहतरीन विकल्प है। अपनी हरियाली और शांति के लिए यह जगह पर्यटकों की पसंद बनती जा रही है।
रांची का छिपा हुआ स्वर्ग: गूंगा नाला बना पर्यटकों की पहली पसंद, कश्मीर जैसी वादियों का मिलता है अहसास
झारखंड की राजधानी रांची का गूंगा नाला इन दिनों अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। घने जंगलों के बीच स्थित यह जगह किसी हिल स्टेशन से कम नहीं लगती है।
मानसून में घूमने का है प्लान, तो पलामू के बेतला से महुआडांड़ तक का सफर रहेगा यादगार
झारखंड में मानसून की दस्तक के बाद पलामू टाइगर रिजर्व का नजारा बेहद खूबसूरत हो गया है। बेतला से महुआडांड़ तक की सड़क यात्रा आपको जंगल सफारी जैसा रोमांच और सुकून देगी।
बोकारो का सत्खटिया जलप्रपात: मानसून में दो झरनों का अद्भुत मिलन
बोकारो और धनबाद की सीमा पर स्थित सत्खटिया वॉटरफॉल मानसून के दौरान पर्यटकों के लिए एक स्वर्ग जैसा अनुभव प्रदान करता है, जहां घने जंगलों के बीच दो झरनों का संगम देखने को मिलता है।
देवघर यात्रा का आनंद होगा दोगुना, बाबाधाम के पास दुमका की इन 5 जगहों पर जरूर जाएं
अगर आप देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन करने जा रहे हैं, तो मात्र 2 घंटे की दूरी पर स्थित दुमका की खूबसूरती देखना न भूलें। यहाँ धार्मिक आस्था और प्राकृतिक पर्यटन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
गढ़वा का सतबहिनी झरना: गर्मी में तन को राहत और मन को सुकून देने वाला तीर्थ
झारखंड के गढ़वा जिले में स्थित सतबहिनी झरना प्राकृतिक ठंडक, खूबसूरत नजारों और धार्मिक आस्था का संगम है, जहां हर साल हजारों सैलानी गर्मी से राहत पाने पहुंचते हैं।
जंगल के बीच बहता 'गूंगा नाला', रांची की यह अनदेखी जगह दे रही कश्मीर-मनाली को टक्कर
रांची से महज 30 किलोमीटर दूर सुपा गांव के पास स्थित 'गूंगा नाला' इन दिनों खूब वायरल हो रहा है, जहां का साफ पानी और घना जंगल पर्यटकों को कश्मीर-मनाली जैसा अहसास करा रहा है।
देवघर का जायका: 2 रुपये के नन्हे समोसे से लेकर तौलकर बनने वाले पराठे, पेड़ा और रबड़ी तक
बाबा बैद्यनाथ धाम के दर्शन के बाद देवघर की मशहूर गलियों का जायका जरूर चखें। यहां के छोटे समोसे, पेड़ा, चाट, तौलकर बनने वाले पराठे और रबड़ी का स्वाद जुबान पर ऐसा चढ़ता है कि भूलना मुश्किल हो जाता है।
झारखंड का बारनी घाट: चट्टानों पर अंकित रहस्यमयी निशान, जहां की मान्यता है देवताओं के विश्राम की
बोकारो के चास प्रखंड स्थित कुमरी गांव में दामोदर नदी के किनारे बसा बारनी घाट अपनी प्राकृतिक चट्टानों पर उभरी धार्मिक आकृतियों और कई शिवलिंगों के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है।
रांची के टॉप 5 पिकनिक स्पॉट, जहां की हरियाली के आगे फीकी पड़ जाए स्विट्जरलैंड की खूबसूरती
रांची में मानसून दस्तक दे चुका है और बारिश के इस मौसम में दसम फॉल, होरहाप जंगल, अंगढा गांव का हुंडरू फॉल और तैमारा घाटी पिकनिक के लिए शानदार जगहें हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता स्विट्जरलैंड को टक्कर देती है।
जंगल सफारी की शुरुआत भारत में यहीं से हुई थी, बेतला नेशनल पार्क का यह इतिहास चौंका देगा
झारखंड का बेतला नेशनल पार्क आज पर्यटकों के बीच मशहूर है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देश में संगठित जंगल सफारी और वन्यजीव पर्यटन की नींव यहीं रखी गई थी। साल 1966 के आसपास यहां इसकी शुरुआत हुई थी।
पलामू का टूनटुनिया पहाड़: जहां पत्थरों से गूंजती है टन-टन की आवाज, सुनकर हैरान रह जाएंगे आप
झारखंड के पलामू जिले में स्थित टूनटुनिया पहाड़ गर्मी के मौसम में पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। प्राकृतिक सुंदरता, ठंडे वातावरण और पत्थरों से निकलने वाली रहस्यमयी ध्वनि के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
रांची से सिर्फ 3 किमी दूर है यह गांव, जहां यूनिवर्सिटी और अस्पताल भी; लोग कहते हैं 'मिनी कश्मीर'
रांची के नामकुम से करीब 3 किलोमीटर दूर बसा राजा उल्लाटू गांव अपनी हरियाली, यूनिवर्सिटी, अस्पतालों और स्कूलों के कारण एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता है। पहाड़ों और वादियों की खूबसूरती के चलते लोग इसे मिनी कश्मीर भी कहते हैं।