उपनाम: जल संकट
जाल जीवन मिशन की कछुआ चाल, मांडावास गांव के लोग दो साल से पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान
राजस्थान के पाली जिले के मांडावास गांव में जल जीवन मिशन का काम बीते दो साल से अधर में लटका है, जिससे ग्रामीण पीने के पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
अंबाला: शिवपुरी और गणेश विहार में गहराया जल संकट, लोग बोले- नौकरी करें या रात भर पानी का इंतजार
हरियाणा के अंबाला में भीषण गर्मी के बीच शिवपुरी कॉलोनी और गणेश विहार के निवासी बूंद-बूंद पानी को तरस गए हैं। प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।
जबलपुर के रांझी में जल संकट से राहत की उम्मीद, खुदाई में मिली पुरानी नहर
जबलपुर के रांझी इलाके में पानी की भारी किल्लत के बीच परियट जलाशय के पास खुदाई करने से एक पुरानी नहर मिली है, जिससे जलापूर्ति में सुधार की संभावना बनी है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्यासा सच: हर सवाल के साथ कैसे खर्च होता है लाखों लीटर पानी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तकनीक जितनी आधुनिक है, इसका पर्यावरण पर असर उतना ही गहरा है, विशेष रूप से पानी की बेतहाशा खपत के मामले में। जानिए आपके द्वारा पूछे गए हर एक सवाल के पीछे कैसे सर्वर गर्म होते हैं और उन्हें ठंडा करने के लिए पानी का कितना बड़ा...
सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान पर मंडराया जल संकट, बाढ़ ने बदली पूरी कहानी
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को रोकने के बाद पाकिस्तान को भीषण जल संकट का सामना करना था, लेकिन अगस्त 2025 में आई बाढ़ ने हालात बदल दिए और जलाशय लगभग लबालब हो गए।
हरियाणा के चानौत गांव में बवाल, पुलिस और ग्रामीणों में भिड़ंत, जमकर चले आंसू गैस के गोले
हरियाणा के हांसी जिले के चानौत गांव में पानी की पाइपलाइन से अवैध कनेक्शन हटाने पहुंची पुलिस और ग्रामीणों के बीच भीषण झड़प हो गई, जिसमें पांच लोग घायल हो गए हैं।
जबलपुर का रांझी इलाका भीषण जल संकट की चपेट में, 2 लाख लोग बूंद-बूंद को तरसे
मध्य प्रदेश के जबलपुर में परियट जलाशय सूखने से रांझी क्षेत्र के करीब 2 लाख लोग पानी के लिए बेहाल हैं, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
कभी लहराता था समुद्र, अब फैला है रेगिस्तान: सिर्फ 30 साल में जहाजों की जगह क्यों दौड़ने लगे ऊंट?
कभी दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अंदरूनी समुद्र रहा अरल सागर महज तीन दशकों में सूखकर रेगिस्तान में बदल गया। नदियों का पानी खेती की ओर मोड़ देने की एक योजना ने इस विशाल जलाशय को तबाह कर दिया।
महोबा का मुड़हरा गांव: सालों से बूंद-बूंद पानी को तरसते लोग, 40 से ज्यादा युवा कुंवारे, कोई बेटी ब्याहने को तैयार नहीं
महोबा मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर दूर मुड़हरा गांव पानी के भीषण संकट से जूझ रहा है। नमामि गंगे योजना के तहत ढाई साल पहले पाइपलाइन और टंकी तो बनी, पर नलों में आज तक एक बूंद पानी नहीं आया और पानी की किल्लत के कारण गांव के 40 से ज्यादा युवाओं की शादी तक अटक ग...
Ground Report: नल जल योजना बेअसर, झिरिया के भरोसे बुझ रही ग्रामीणों की प्यास
बालाघाट के घंघरिया गांव में जल जीवन मिशन की नल जल योजना बार-बार खराब होने से ग्रामीण मनकुंवर नदी में गड्ढा खोदकर बनाई झिरिया से पानी भरने को मजबूर हैं। नदी से रेत खत्म होने और भू-जल स्तर गिरने से संकट और गहरा गया है।
अधिकारियों ने टाली समस्या, नेता रहे बेखबर — गांव वालों ने खुद खोद डाला तालाब, बन गए 'दशरथ मांझी'
पन्ना जिले के आदिवासी बहुल जैतुपुरा गांव में वर्षों के जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद न मिलने पर खुद श्रमदान और चंदे से करीब चार लाख रुपये जुटाकर तालाब बना डाला। यह सामूहिक प्रयास पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है।
गया के दो गांवों में पीने के पानी के लिए रोज चढ़ना पड़ता है 500 फीट ऊंचा पहाड़, टंकी ही सैकड़ों परिवारों का सहारा
बिहार के गया जिले के पहाड़पुर और काईचक गांव में भूजल खारा होने के कारण लोग पीने के पानी के लिए रोजाना करीब 500 फीट ऊंचे पहाड़ पर चढ़कर टंकी से पानी भरते हैं। सक्षम परिवार बंद जार का पानी खरीदकर काम चलाते हैं।
देश का 'वॉटर टावर' कहलाने वाले उत्तराखंड की राजधानी में पानी की किल्लत, देहरादूनवासी बोले- जमाना बदल गया
जिस उत्तराखंड को देश का 'वॉटर टावर' कहा जाता है, उसी की राजधानी देहरादून से प्राकृतिक जल स्रोत लगभग गायब हो गए हैं और अब एक घूंट पानी के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ती है।
पलामू में हर साल बढ़ती तपिश: प्रकृति के साथ इंसानी लापरवाही भी जिम्मेदार, कहीं रेगिस्तान न बन जाए यह इलाका
कभी जंगलों और जल स्रोतों के लिए जाना जाने वाला पलामू आज तेजी से बढ़ते तापमान से जूझ रहा है। विशेषज्ञ जंगलों की कटाई और घटते जल स्रोतों को मुख्य कारण मानते हुए इसे मरुस्थलीकरण की प्रारंभिक चेतावनी बता रहे हैं।
जल संकट से जूझते गांवों में लौटी खुशहाली, श्रमदान से पुनर्जीवित हुए तालाब भरे पानी से
जयपुर ग्रामीण के कई गांव सामूहिक श्रमदान से जल संरक्षण की मिसाल बन गए हैं। देवला ग्राम पंचायत क्षेत्र में बने तीन बड़े तालाबों से भूजल स्तर करीब 25 फीट तक बढ़ने का दावा किया गया है।