उपनाम: जल संकट
कभी लहराता था समुद्र, अब फैला है रेगिस्तान: सिर्फ 30 साल में जहाजों की जगह क्यों दौड़ने लगे ऊंट?
कभी दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अंदरूनी समुद्र रहा अरल सागर महज तीन दशकों में सूखकर रेगिस्तान में बदल गया। नदियों का पानी खेती की ओर मोड़ देने की एक योजना ने इस विशाल जलाशय को तबाह कर दिया।
महोबा का मुड़हरा गांव: सालों से बूंद-बूंद पानी को तरसते लोग, 40 से ज्यादा युवा कुंवारे, कोई बेटी ब्याहने को तैयार नहीं
महोबा मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर दूर मुड़हरा गांव पानी के भीषण संकट से जूझ रहा है। नमामि गंगे योजना के तहत ढाई साल पहले पाइपलाइन और टंकी तो बनी, पर नलों में आज तक एक बूंद पानी नहीं आया और पानी की किल्लत के कारण गांव के 40 से ज्यादा युवाओं की शादी तक अटक ग...
Ground Report: नल जल योजना बेअसर, झिरिया के भरोसे बुझ रही ग्रामीणों की प्यास
बालाघाट के घंघरिया गांव में जल जीवन मिशन की नल जल योजना बार-बार खराब होने से ग्रामीण मनकुंवर नदी में गड्ढा खोदकर बनाई झिरिया से पानी भरने को मजबूर हैं। नदी से रेत खत्म होने और भू-जल स्तर गिरने से संकट और गहरा गया है।
अधिकारियों ने टाली समस्या, नेता रहे बेखबर — गांव वालों ने खुद खोद डाला तालाब, बन गए 'दशरथ मांझी'
पन्ना जिले के आदिवासी बहुल जैतुपुरा गांव में वर्षों के जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद न मिलने पर खुद श्रमदान और चंदे से करीब चार लाख रुपये जुटाकर तालाब बना डाला। यह सामूहिक प्रयास पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है।
गया के दो गांवों में पीने के पानी के लिए रोज चढ़ना पड़ता है 500 फीट ऊंचा पहाड़, टंकी ही सैकड़ों परिवारों का सहारा
बिहार के गया जिले के पहाड़पुर और काईचक गांव में भूजल खारा होने के कारण लोग पीने के पानी के लिए रोजाना करीब 500 फीट ऊंचे पहाड़ पर चढ़कर टंकी से पानी भरते हैं। सक्षम परिवार बंद जार का पानी खरीदकर काम चलाते हैं।
देश का 'वॉटर टावर' कहलाने वाले उत्तराखंड की राजधानी में पानी की किल्लत, देहरादूनवासी बोले- जमाना बदल गया
जिस उत्तराखंड को देश का 'वॉटर टावर' कहा जाता है, उसी की राजधानी देहरादून से प्राकृतिक जल स्रोत लगभग गायब हो गए हैं और अब एक घूंट पानी के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ती है।
पलामू में हर साल बढ़ती तपिश: प्रकृति के साथ इंसानी लापरवाही भी जिम्मेदार, कहीं रेगिस्तान न बन जाए यह इलाका
कभी जंगलों और जल स्रोतों के लिए जाना जाने वाला पलामू आज तेजी से बढ़ते तापमान से जूझ रहा है। विशेषज्ञ जंगलों की कटाई और घटते जल स्रोतों को मुख्य कारण मानते हुए इसे मरुस्थलीकरण की प्रारंभिक चेतावनी बता रहे हैं।
जल संकट से जूझते गांवों में लौटी खुशहाली, श्रमदान से पुनर्जीवित हुए तालाब भरे पानी से
जयपुर ग्रामीण के कई गांव सामूहिक श्रमदान से जल संरक्षण की मिसाल बन गए हैं। देवला ग्राम पंचायत क्षेत्र में बने तीन बड़े तालाबों से भूजल स्तर करीब 25 फीट तक बढ़ने का दावा किया गया है।