जबलपुर का रांझी इलाका भीषण जल संकट की चपेट में, 2 लाख लोग बूंद-बूंद को तरसे मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 2
मध्य प्रदेश के जबलपुर में परियट जलाशय सूखने से रांझी क्षेत्र के करीब 2 लाख लोग पानी के लिए बेहाल हैं, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

गंभीर जल संकट से जूझ रही जनता

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में स्थित रांझी क्षेत्र इन दिनों जल संकट के कारण बदहाल स्थिति से गुजर रहा है। नर्मदा नदी के तट पर बसे इस शहर का उपनगरीय इलाका रांझी इस समय प्यासा है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि करीब 2 लाख की आबादी अब पूरी तरह से मानसून यानी बारिश पर निर्भर है। अधिकारियों का कहना है कि जलाशय सूखने के कारण अब उनके पास भी सीमित संसाधन बचे हैं।

जलाशय में पानी का अभाव

रांझी जल शोधन संयंत्र के प्रभारी शांतनु चटर्जी ने बताया कि इस संयंत्र की कुल क्षमता 54 एमएलडी है, जिसमें से आमतौर पर 27 एमएलडी पानी लिया जाता है। हालांकि, इस बार परियट जलाशय और बरगी नहर में पानी का स्तर न्यूनतम होने की वजह से केवल 4 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। यही कारण है कि जलापूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है और अब घरों तक नियमित समय पर पानी पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है।

प्रशासन की कोशिशें और चुनौतियां

जबलपुर नगर निगम के पार्षद और जल प्रभारी दामोदर सोनी ने इसे आपदा जैसी स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि स्थिति से निपटने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। नगर निगम की ओर से किए जा रहे उपायों में ये शामिल हैं:

  • पानी के टैंकरों की संख्या में वृद्धि की गई है।
  • पिकअप वाहनों पर टंकियां रखकर गली-मोहल्लों में पानी पहुंचाया जा रहा है।
  • जरूरत वाले स्थानों पर कुओं में मोटर डालकर पानी निकाला जा रहा है।
  • नया बोरवेल खुदवाने का काम भी जारी है।

20 वार्डों का बुरा हाल

इस जल संकट का असर शहर के कुल 20 वार्डों पर पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात पहली बार इतने बिगड़े हैं कि पानी की एक समय की सप्लाई भी बंद करनी पड़ी है। अब रांझी की जनता का एकमात्र सहारा भगवान है, क्योंकि जब तक मानसून की अच्छी बारिश नहीं होती, परियट जलाशय का जलस्तर सामान्य होना मुश्किल है। अधिकारियों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पानी नहीं बरसेगा, स्थिति में सुधार की उम्मीद कम है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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