उपनाम: हस्तशिल्प
जमशेदपुर के विष्णु ने नदी किनारे उगने वाली घास से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, 100 लोगों को दिया रोजगार
जमशेदपुर के विष्णु ने सवाई घास और खजूर के पत्तों के जरिए हस्तशिल्प का एक सफल स्टार्टअप खड़ा किया है, जिससे आज 100 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका मिल रही है।
पीडिया कला को मिली ग्लोबल पहचान: जीआई टैग से बदलेगी कलाकारों की आर्थिक स्थिति, बढ़ेगा रोजगार
भोजपुर की पारंपरिक पीडिया कला को प्रतिष्ठित जीआई टैग मिल गया है, जिससे इस विलुप्त होती विधा को न केवल नई पहचान मिली है बल्कि कलाकारों की आय और भविष्य के लिए भी सकारात्मक रास्ते खुल गए हैं।
बांस की 15 दुर्लभ प्रजातियां: निर्माण से लेकर स्वादिष्ट व्यंजन तक, जानिए इसके हैरान करने वाले उपयोग
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में बांस की विभिन्न प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है, जो केवल निर्माण ही नहीं बल्कि खाद्य पदार्थों में भी इस्तेमाल होती हैं।
सड़क किनारे स्टॉल लगाकर सजावटी कला को दे रहीं नई पहचान, सरगुजा की इन दो बहनों का जज्बा है मिसाल
छत्तीसगढ़ के सरगुजा में दो बहनों, मृगाक्षी और मृणाली ने आर्थिक मजबूरी के बजाय अपने शौक को करियर में बदलने के लिए लियानबी नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया है। वे सड़क किनारे स्टॉल लगाकर मोजेक और लिप्पन आर्ट जैसी कलाकृतियां बेच रही हैं और अन्य युवाओं को प्रेरि...
समस्तीपुर में अनोखी पहल: बांस और मिथिला पेंटिंग से सजी राखियों में अब दिखेगी बिहार की गौरवशाली संस्कृति
समस्तीपुर के एक युवा कलाकार ने बांस की लकड़ी पर मिथिला पेंटिंग उकेरकर रक्षाबंधन के लिए विशेष राखियां तैयार की हैं। कलर ब्लाइंड होने के बावजूद अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे कुंदन कुमार रॉय की यह अनूठी पहल स्थानीय हस्तशिल्प और मिथिला संस्कृति को नई पहचान दिला...
छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ियों का देशभर में डंका, नत्थूराम देवांगन की मेहनत से 35 सालों से बुन रही है सफलता की कहानी
छत्तीसगढ़ के बालोद के बुनकर नत्थूराम देवांगन पिछले 35 वर्षों से कोसा साड़ियों के पारंपरिक हुनर को जीवित रखे हुए हैं और अपनी कला से देश के बड़े शहरों में पहचान बना चुके हैं।
भागलपुर की 'रसगुल्ला' चादर का देशभर में बढ़ा क्रेज, खासियतें जानकर हो जाएंगे हैरान
बिहार के भागलपुर की प्रसिद्ध 'रसगुल्ला' डिजाइन वाली चादर अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, अनोखी बुनाई और हर मौसम के अनुकूल होने की वजह से देश-विदेश में धूम मचा रही है।
बोकारो के 80 वर्षीय बुजुर्ग की मेहनत, हाथों से रस्सियां बनाकर बचा रहे हैं पुश्तैनी कला
झारखंड के बोकारो में 80 साल के दिगम जी अपनी पुरानी कला को आज भी जिंदा रखे हुए हैं। वे प्लास्टिक के बोरों से मजबूत रस्सियां बनाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
बनारस की गुलाबी मीनाकारी का जादू, अमेरिका तक पहुंची शतरंज के सेट की धमक
काशी की चार सदी पुरानी गुलाबी मीनाकारी कला आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में छाई हुई है। अमेरिका समेत कई देशों में बनारस में बने शतरंज के सेट की भारी मांग देखी जा रही है।
भागलपुर के सिल्क उद्योग पर मंडराया संकट, बुनकरों की बदहाली की असली वजह जानने के लिए शुरू हुआ गहरा शोध
भागलपुर की सिल्क सिटी की पहचान धूमिल होती जा रही है और बड़ी संख्या में बुनकर अपना पुश्तैनी काम छोड़ने को मजबूर हैं। इस गिरावट के पीछे के कारणों को समझने के लिए अब एक विस्तृत शोध कार्य शुरू किया गया है।
उत्तर प्रदेश: भदोही की कालीन को टक्कर दे रही बहराइच की हस्तनिर्मित दरी, शकुंतला देवी की मेहनत लाई रंग
बहराइच के परसा खरगमा गांव की शकुंतला देवी वेस्टेज कपड़ों से खूबसूरत और मजबूत दरियां बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उनकी हस्तनिर्मित दरियों की मांग अब बहराइच समेत कई अन्य जिलों में भी बढ़ने लगी है।
ऋषिकेश के मशहूर बाजार: खरीदारी के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं ये जगहें
ऋषिकेश अपनी आध्यात्मिक शांति और साहसिक खेलों के लिए ही नहीं, बल्कि शानदार बाजारों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ की गलियों में आपको पारंपरिक वस्तुओं से लेकर आधुनिक फैशन तक सब कुछ मिलेगा।
रांची की पूर्णिमा का कमाल: हाथ से बनी शिवलिंग और गणेश राखियों की धूम, कीमत 40 रुपये से शुरू
झारखंड की राजधानी रांची में पूर्णिमा नाम की एक महिला अपने हाथों से बेहद आकर्षक और अनोखी राखियां बनाकर लोगों का दिल जीत रही हैं। मात्र 40 रुपये से शुरू होने वाली उनकी राखियों की मांग न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि देश के बड़े शहरों में भी है।
मशीनों के दौर में भी कायम है हाथ का हुनर, बोकारो के 80 वर्षीय बुजुर्ग ऐसे बनाते हैं रस्सी
बोकारो के काशी झरिया गांव में 80 वर्षीय दिगम जी आज भी पुराने प्लास्टिक के बोरों से मजबूत रस्सियां बनाकर अपनी जीविका चला रहे हैं। मशीनों के आने से इस पारंपरिक कला पर संकट है, लेकिन बुजुर्ग कलाकार इसे पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
कोटा की लाख चूड़ियां: 55 डिग्री गर्मी की तपिश में भी निखरता है कारीगरों का हुनर
राजस्थान के कोटा में बनी लाख की रंग-बिरंगी चूड़ियां आज भी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। 55 डिग्री तक की भीषण गर्मी में भी कारीगर इन्हें पारंपरिक तरीके से हाथों से बनाते हैं, जो उनकी मेहनत और कला का अद्भुत प्रदर्शन है।