उपनाम: हस्तशिल्प
रांची में बांस से तैयार हो रही 100 ग्राम की साड़ियां, ₹10,000 तक है कीमत
झारखंड की राजधानी रांची में बांस के रेशों से बेहद हल्की और आरामदायक साड़ियां और सलवार सूट तैयार किए जा रहे हैं, जो हर मौसम के अनुकूल हैं।
सफलता की कहानी: हाथ से बनी पटियाला जूतियों के जादूगर पवन, 20 हजार से ज्यादा लोग हैं दीवाने
झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले पवन पटियाला जूती बनाने के अपने पारंपरिक हुनर से देशभर में मशहूर हो गए हैं। अपनी मेहनत और हुनर के दम पर उन्होंने 20 हजार से अधिक ग्राहकों का भरोसा जीता है और लोग उन्हें प्यार से 'जूती किंग' कहते हैं।
मुजफ्फरपुर की शाही लीची का नया रूप, सुजनी कला के जरिए तैयार हुई ‘लीचीपुरम आर्ट’
बिहार के मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची अब केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुजनी शॉल पर कलात्मक रूप से उकेरा जा रहा है। ‘लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान’ के तहत स्थानीय कलाकारों ने कला और रोजगार को जोड़ने की अनूठी पहल की है।
रांची की पुष्पा का हुनर: किसान माता-पिता की बेटी ने कला से संवारी अपनी तकदीर, जानिए कैसे बनी आत्मनिर्भर
रांची की 20 वर्षीय पुष्पा ने अपनी कलाकारी को व्यवसाय में बदलकर मिसाल कायम की है। फाइन आर्ट्स की पढ़ाई के बाद वे वर्ली, सोहराई और डोकरा आर्ट के साथ मिट्टी की ज्वेलरी बनाकर अब लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
जयपुर के इस दंपति ने जूट से बनाया करोड़ों का कारोबार, घर से शुरू कर विदेशों तक पहुंचाई हस्तकला
राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक दंपति ने जूट से बने इको-फ्रेंडली उत्पादों के साथ एक सफल स्टार्टअप शुरू किया है, जिससे आज सैकड़ों महिलाएं रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
उत्तराखंड की अनोखी 'मालू' बेल: सिंगोड़ी मिठाई का स्वाद बढ़ाने से लेकर पत्तल और रस्सी बनाने तक, जानें इसके लाजवाब फायदे
उत्तराखंड के पहाड़ी जंगलों में पाई जाने वाली मालू की लकड़ीदार बेल स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनजीवन का एक बेहद अहम हिस्सा है। इसके पत्तों का इस्तेमाल प्रसिद्ध सिंगोड़ी मिठाई को लपेटने और पत्तल-दोने बनाने में होता है, जबकि इसकी छाल से मजबूत रस्सियां और चटाई ब...
सफलता की कहानी: आदिवासी कला से संवर रही सूरज की जिंदगी, हर महीने हो रही है 50 हजार की कमाई
रांची के रहने वाले सूरज डोकरा आर्ट और लकड़ी की नक्काशी के जरिए अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं, जिससे वे न केवल अपनी संस्कृति को सहेज रहे हैं, बल्कि हर महीने शानदार कमाई भी कर रहे हैं।
कांजीवरम साड़ियों पर चढ़ा मंजूषा कला का रंग, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी बनीं इस अनूठी कला की मुरीद
भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला अब दक्षिण भारत की प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ियों पर नजर आएगी। इस नए प्रयोग ने अंग क्षेत्र की लोक कला को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है।
कचरे से कंचन: पूर्वी चंपारण के पवन श्रीवास्तव ने केले के बेकार तने से बनाया धागा, अब कपड़ा उद्योग में मचाएंगे धूम
बिहार के पूर्वी चंपारण में एक किसान ने अनोखी पहल की है। बेकार फेंक दिए जाने वाले केले के तने से धागा तैयार कर वे टोपी, बैग और मैट के बाद अब वस्त्र निर्माण क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं।
भागलपुर की नई पहचान: बांस के आकर्षक सामानों से सज रहे हैं घर
भागलपुर का एक गांव बांस से बने सजावटी सामानों के जरिए अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। लोग पारंपरिक सजावट को छोड़कर अब पर्यावरण के अनुकूल बांस के उत्पादों को अपना रहे हैं।
जमशेदपुर के विष्णु ने नदी किनारे उगने वाली घास से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, 100 लोगों को दिया रोजगार
जमशेदपुर के विष्णु ने सवाई घास और खजूर के पत्तों के जरिए हस्तशिल्प का एक सफल स्टार्टअप खड़ा किया है, जिससे आज 100 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका मिल रही है।
पीडिया कला को मिली ग्लोबल पहचान: जीआई टैग से बदलेगी कलाकारों की आर्थिक स्थिति, बढ़ेगा रोजगार
भोजपुर की पारंपरिक पीडिया कला को प्रतिष्ठित जीआई टैग मिल गया है, जिससे इस विलुप्त होती विधा को न केवल नई पहचान मिली है बल्कि कलाकारों की आय और भविष्य के लिए भी सकारात्मक रास्ते खुल गए हैं।
बांस की 15 दुर्लभ प्रजातियां: निर्माण से लेकर स्वादिष्ट व्यंजन तक, जानिए इसके हैरान करने वाले उपयोग
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में बांस की विभिन्न प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है, जो केवल निर्माण ही नहीं बल्कि खाद्य पदार्थों में भी इस्तेमाल होती हैं।
सड़क किनारे स्टॉल लगाकर सजावटी कला को दे रहीं नई पहचान, सरगुजा की इन दो बहनों का जज्बा है मिसाल
छत्तीसगढ़ के सरगुजा में दो बहनों, मृगाक्षी और मृणाली ने आर्थिक मजबूरी के बजाय अपने शौक को करियर में बदलने के लिए लियानबी नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया है। वे सड़क किनारे स्टॉल लगाकर मोजेक और लिप्पन आर्ट जैसी कलाकृतियां बेच रही हैं और अन्य युवाओं को प्रेरि...
समस्तीपुर में अनोखी पहल: बांस और मिथिला पेंटिंग से सजी राखियों में अब दिखेगी बिहार की गौरवशाली संस्कृति
समस्तीपुर के एक युवा कलाकार ने बांस की लकड़ी पर मिथिला पेंटिंग उकेरकर रक्षाबंधन के लिए विशेष राखियां तैयार की हैं। कलर ब्लाइंड होने के बावजूद अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे कुंदन कुमार रॉय की यह अनूठी पहल स्थानीय हस्तशिल्प और मिथिला संस्कृति को नई पहचान दिला...