उपनाम: बोकारो
मशीनों के दौर में भी कायम है हाथ का हुनर, बोकारो के 80 वर्षीय बुजुर्ग ऐसे बनाते हैं रस्सी
बोकारो के काशी झरिया गांव में 80 वर्षीय दिगम जी आज भी पुराने प्लास्टिक के बोरों से मजबूत रस्सियां बनाकर अपनी जीविका चला रहे हैं। मशीनों के आने से इस पारंपरिक कला पर संकट है, लेकिन बुजुर्ग कलाकार इसे पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
बोकारो का सत्खटिया जलप्रपात: मानसून में दो झरनों का अद्भुत मिलन
बोकारो और धनबाद की सीमा पर स्थित सत्खटिया वॉटरफॉल मानसून के दौरान पर्यटकों के लिए एक स्वर्ग जैसा अनुभव प्रदान करता है, जहां घने जंगलों के बीच दो झरनों का संगम देखने को मिलता है।
झारखंड का खास पारंपरिक ढकनेसर पुवा: मिट्टी की हांडी में भाप से ऐसे तैयार करें यह लाजवाब व्यंजन
झारखंड का पारंपरिक व्यंजन ढकनेसर पुवा न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि इसे बनाना भी काफी आसान है। मिट्टी की हांडी में भाप से तैयार होने वाली यह डिश बड़े और बच्चे सभी बड़े चाव से खाते हैं।
साइकिल पर 45 साल से चल रही गाड़ी धोने की दुकान, बोकारो के अजय घर-घर पहुंचकर चमकाते हैं वाहन
बोकारो के 65 वर्षीय अजय कुमार मिश्रा अपनी साइकिल पर ही गाड़ी धोने का पूरा सेटअप लेकर घूमते हैं और पिछले 45 वर्षों से बाइक, कार से लेकर बड़े वाहनों तक की धुलाई कर रहे हैं।
हुनर से बनी पहचान: आदिवासी गृहिणी मोनिका हर महीने कमा रहीं 30 हजार, सिर्फ 50 रुपये से शुरू होते हैं फूल
बोकारो की रहने वालीं आदिवासी गृहिणी मोनिका लकड़ा पाइप क्लीनर और क्रोशिया आर्ट से सजावटी सामान बनाकर हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये कमा रही हैं। उनके स्टॉल पर 50 रुपये में फूल और 300 रुपये से बुके उपलब्ध हैं।
बुटीक के कारोबार में है दमदार मुनाफा, बोकारो की अनुभवी डिजाइनर ने बताए कमाई के राज
बोकारो की बुटीक संचालिका बसंती दास के मुताबिक करीब 40 हजार रुपये की पूंजी से छोटे स्तर पर बुटीक शुरू किया जा सकता है और सही योजना के साथ हर महीने 50 हजार रुपये या इससे ज्यादा की कमाई संभव है।
बिल्ली पालने का बना रहे हैं मन? पशु चिकित्सक ने गिनाए ये 7 अहम नियम
पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक बिल्ली घर लाने से पहले जगह, एलर्जी, नस्ल के हिसाब से माहौल और शारीरिक जांच जैसी बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि बाद में परेशानी न हो।
झारखंड का बारनी घाट: चट्टानों पर अंकित रहस्यमयी निशान, जहां की मान्यता है देवताओं के विश्राम की
बोकारो के चास प्रखंड स्थित कुमरी गांव में दामोदर नदी के किनारे बसा बारनी घाट अपनी प्राकृतिक चट्टानों पर उभरी धार्मिक आकृतियों और कई शिवलिंगों के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है।
रेसिपी: न घी न तेल, मिट्टी की हांडी में अरवा चावल से बनता है ढकनेसर पुआ, दूध में डूबते ही दोगुना हो जाता है स्वाद
झारखंड का पारंपरिक ढकनेसर पुआ अरवा चावल से बिना एक बूंद तेल के मिट्टी की हांडी में भाप पर सेंका जाता है और मीठे दूध में डुबोकर मेवे के साथ परोसा जाता है। जानिए इसे घर पर बनाने की आसान विधि।
बोकारो में गर्मी का देसी इलाज: तारकुल फल की धूम, खरीदारों की लगी कतार
बोकारो के सेक्टर-12 मोड़ पर इन दिनों ताड़ का फल यानी तारकुल लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। पानी से भरपूर यह मौसमी फल जहां गर्मी में राहत देता है, वहीं कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका का सहारा भी है।
5 मिनट की कला से शानदार कमाई! बोकारो की मोनिका ने पाइप क्लीनर से रची सफलता की कहानी
बोकारो की गृहणी मोनिका लकड़ा पाइप क्लीनर और क्रोशिया आर्ट से फूल, बुके और की-रिंग बनाकर हर महीने 25 से 30 हजार रुपये कमा रही हैं। उनके उत्पाद 50 रुपये से लेकर 300 रुपये तक में बिकते हैं।
बोकारो की इस पहाड़ी पर आज भी सुरक्षित हैं प्रभु राम के पदचिह्न, वनवास में सीता-लक्ष्मण संग आए थे यहां
बोकारो के कसमार प्रखंड स्थित 'राम-लखन टुंगरी' पहाड़ी से जुड़ी मान्यता है कि वनवास काल में भगवान राम यहां पहुंचे थे और हिरण पर तीर चलाते समय पत्थर पर उनके बाएं पैर का निशान अंकित हो गया था। हर साल मकर संक्रांति पर यहां भव्य मेला लगता है।
₹40 हजार से शुरू करें टी-शर्ट और ट्राउजर का कारोबार, रोज 8 पीस की बिक्री पर महीने के 30 हजार पक्के
कम पूंजी में मुनाफे वाला बिजनेस तलाश रहे लोगों के लिए टी-शर्ट और ट्राउजर का रिटेल कारोबार बेहतर विकल्प है। करीब 40 हजार रुपये में इसे शुरू किया जा सकता है और रोजाना 8-10 पीस बेचने पर महीने के 30-35 हजार रुपये तक की कमाई संभव है।
गर्मियों की छुट्टियों में घूमने की तैयारी? पर्यटकों को खूब भा रहा है कोनार डैम
झारखंड के बोकारो और हजारीबाग की सीमा पर बसा कोनार डैम विशाल जलाशय, घने जंगल और मनमोहक नजारों के लिए मशहूर है, जो गर्मियों में सैलानियों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
बोकारो के सिमुलिया गांव में आज भी कायम है ‘घोड़े वाले बाबा’ की आस्था की परंपरा
बोकारो के चंदनक्यारी प्रखंड स्थित सिमुलिया गांव में दाहय रंगाहाड़ी बाबा को गांव का रक्षक माना जाता है, जिनके वाहन माने जाने वाले मिट्टी के घोड़ों की ग्रामीण श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त बाबा को मिट्टी के घोड़ों की जोड़ी अर्पित करते...