झारखंड का बारनी घाट: चट्टानों पर अंकित रहस्यमयी निशान, जहां की मान्यता है देवताओं के विश्राम की झारखंड एक घंटा पहले 2
बोकारो के चास प्रखंड स्थित कुमरी गांव में दामोदर नदी के किनारे बसा बारनी घाट अपनी प्राकृतिक चट्टानों पर उभरी धार्मिक आकृतियों और कई शिवलिंगों के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है।

झारखंड के बोकारो जिले के चास प्रखंड में स्थित कुमरी गांव में दामोदर नदी के किनारे बसा बारनी घाट आस्था, इतिहास और लोकमान्यताओं का एक अनूठा संगम है। स्थानीय लोग इसे बारुनी घाट के नाम से भी पुकारते हैं। यहां की प्राकृतिक चट्टानों पर उभरे रहस्यमयी चिन्ह, देवी-देवताओं की आकृतियां और एक ही स्थान पर मौजूद अनेक शिवलिंग इस जगह को विशेष पहचान देते हैं। यही कारण है कि यह घाट दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।

विशाल चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियां

बारनी घाट की सबसे बड़ी खासियत यहां की विशाल प्राकृतिक चट्टानों पर बनी आकृतियां और धार्मिक प्रतीक हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इन चट्टानों पर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की छवियां उकेरी हुई दिखाई देती हैं। इसके साथ ही शंख, चरण पादुका और कई अन्य धार्मिक चिन्ह भी यहां नजर आते हैं, जो लोगों के मन में श्रद्धा के साथ-साथ जिज्ञासा भी जगाते हैं।

कई पीढ़ियों पुराने हैं धार्मिक चिन्ह

कुमरी गांव के निवासी अतुल महतो बताते हैं कि घाट पर मौजूद स्वयंभू शिवलिंग और प्राचीन धार्मिक प्रतीक कई पीढ़ियों से यहां विद्यमान हैं। गांव के बुजुर्गों के अनुसार इस स्थल का धार्मिक महत्व बहुत पुराना है। हर साल चैती महीने में यहां भव्य बारनी मेले का आयोजन होता है, जिसमें बोकारो के साथ-साथ आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

देवताओं के विश्राम की लोकमान्यता

स्थानीय ग्रामीण विशाल राय का कहना है कि बारनी घाट सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोककथाओं और प्राचीन मान्यताओं का केंद्र भी है। यहां प्रचलित मान्यता है कि किसी प्राचीन काल में देवी-देवताओं ने इसी स्थान पर विश्राम किया था। उसी समय उनके चरणों के निशान चट्टानों पर अंकित हो गए, जिन्हें आज भी श्रद्धालु चरण पादुका के रूप में पूजते हैं। एक ही स्थान पर कई शिवलिंगों की मौजूदगी इस घाट को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दिलाती है।

श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र

घाट परिसर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिदिन विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना होती है और दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। बारनी घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु और पर्यटक सड़क मार्ग के जरिए कुमरी गांव पहुंच सकते हैं। प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और रहस्यमयी प्रतीकों से भरा यह स्थल बोकारो के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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