उपनाम: बागेश्वर
बागेश्वर में सांतू-आठू लोकपर्व की धूम, मायके आईं गौरा और उन्हें लेने पहुंचे शिव
उत्तराखंड के बागेश्वर में पारंपरिक सांतू-आठू पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जिसमें गौरा और शिव के पौराणिक संबंधों को लोकगीतों और अनुष्ठानों के माध्यम से जीवंत किया जाता है।
आजादी से पहले कैसा दिखता था बागेश्वर, जानिए कत्यूरी साम्राज्य से लेकर ब्रिटिश काल तक का गौरवशाली इतिहास
सरयू और गोमती के तट पर बसा बागेश्वर आज एक आधुनिक जिला मुख्यालय है, लेकिन आजादी से पहले यह स्थान अपनी शांत वादियों, समृद्ध संस्कृति और तिब्बत-कुमाऊं के प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में मशहूर था।
बागेश्वर में मूसलाधार बारिश से सरयू उफान पर, प्रशासन ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट
उत्तराखंड के बागेश्वर में भारी बारिश के चलते सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। प्रशासन ने एहतियातन घाट खाली करा दिए हैं और कई रास्ते बंद होने से जनजीवन प्रभावित है।
पहाड़ों से सड़क किनारे तक कैसे आता है शीतल जल, जानें इसके पीछे का पूरा विज्ञान
उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर सड़क किनारे बहती जलधाराएं अक्सर लोगों का ध्यान खींचती हैं, लेकिन इनके निर्माण की प्रक्रिया काफी जटिल और वैज्ञानिक है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्राकृतिक जलस्रोत कैसे बनते हैं और क्या इनका पानी पीना सुरक्षित है, आइए...
फर्श पर जमी जिद्दी काई से हैं परेशान? बागेश्वर की सुनीता ने बताया चुटकियों में सफाई का अचूक उपाय
बरसात के दिनों में फर्श पर जमने वाली काई न केवल घर की खूबसूरती बिगाड़ती है, बल्कि यह फिसलन का बड़ा कारण भी बनती है। बागेश्वर की सुनीता टम्टा ने इस समस्या से निजात पाने के लिए एक बेहद असरदार और किफायती घरेलू नुस्खा साझा किया है।
उत्तराखंड में भारी बारिश का दौर जारी, IMD ने 30 जुलाई तक दी चेतावनी, बागेश्वर में सभी स्कूल बंद
उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता के चलते अगले तीन दिनों तक भारी बारिश की संभावना है, जिसे देखते हुए मौसम विभाग ने ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश के चलते बागेश्वर जिले में सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए हैं।
पहाड़ी जीवन का आधार है चीड़ का पेड़, राख से लेकर खाद तक इसके हैं अनोखे फायदे
उत्तराखंड के पहाड़ों में चीड़ का पेड़ केवल एक वनस्पति नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और खेती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
पिंडारी ग्लेशियर की रोमांचक यात्रा: बारिश के बाद कुमाऊं के इस ट्रेक की खूबसूरती में खो जाएं
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक एडवेंचर प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, जो बारिश के मौसम के बाद अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
बागेश्वर की खास ट्राउट मछली का स्वाद दिल्ली तक पहुंचा, आईटीबीपी के जवानों की भी बनी पहली पसंद
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के लीती गांव में पैदा होने वाली ट्राउट मछली अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण राजधानी दिल्ली और आईटीबीपी के जवानों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई है।
बागेश्वर का रहस्यमयी भद्रकाली मंदिर: 24 घंटे की तपस्या से बदलती है किस्मत, गुफा को लेकर फैली है अनोखी धारणा
उत्तराखंड के बागेश्वर स्थित मां भद्रकाली मंदिर में एक ऐसी प्राकृतिक गुफा है, जिसे लेकर भक्तों में गहरी आस्था है कि वहां 24 घंटे तपस्या करने से सभी मुरादें पूरी हो जाती हैं।
बागेश्वर के बागनाथ मंदिर के पास 40 साल से दुकान चला रहीं दो महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल
उत्तराखंड के बागेश्वर में बागनाथ मंदिर के सामने पिछले 40 सालों से दुकान चला रहीं मंजू गोस्वामी और पूजा देवी अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी हैं।
बागेश्वर का अनछुआ खजाना: घने जंगलों के बीच छिपा है ये अद्भुत झरना
उत्तराखंड के बागेश्वर में एक नया और खूबसूरत पर्यटन स्थल सामने आया है। यह झरना अपनी प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी गुफा के कारण पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।
बागेश्वर का भद्रकाली मंदिर: द्वापर युग का सिद्ध शक्तिपीठ, जहां रक्षाबंधन पर उमड़ता है आस्था का सैलाब
उत्तराखंड के बागेश्वर स्थित भद्रकाली मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। द्वापर युग से जुड़े इस सिद्ध शक्तिपीठ में रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
पिंडारी ग्लेशियर में लापता इंजीनियर अभिषेक का 28 दिन बाद भी नहीं मिला पता, आखिरी वीडियो आया सामने
उत्तराखंड के पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक पर गए सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान 29 मई से लापता हैं। चार सप्ताह बीतने के बाद भी प्रशासन और बचाव दल किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं।
बाजार के केमिकल साबुन-शैम्पू पर भारी पड़ रहा पहाड़ का 'रामबास', नहाने से कपड़े धोने तक हर काम में असरदार
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के दानपुर क्षेत्र में ग्रामीण और भेड़ पालक आज भी नहाने, बाल धोने और कपड़े साफ करने के लिए रामबास नाम के प्राकृतिक पौधे का इस्तेमाल करते हैं, जो त्वचा, बालों और पर्यावरण तीनों के लिए सुरक्षित माना जाता है।