बागेश्वर की माघ धारा: न प्यूरीफायर की जरूरत, न फ्रिज की—सदियों से बुझा रही है लोगों की प्यास उत्तराखंड एक घंटा पहले 7
बागेश्वर-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित माघ धारा वर्षों से आसपास के गांवों के लोगों की प्यास बुझा रही है। प्राकृतिक रूप से रिसकर निकलने वाला यह पानी स्वाद में मीठा और सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है।

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में घूमते हुए आपको जगह-जगह धारे और नौले देखने को मिल जाएंगे। ये जलस्रोत जमीन के भीतर प्राकृतिक रूप से रिसकर निकलने वाले पानी से बनते हैं, जिसकी वजह से इनका पानी स्वाद में मीठा और सेहत के लिहाज से लाभकारी होता है।

माघ धारा: एक पुराना जलस्रोत

बागेश्वर-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित माघ धारा भी इसी तरह का एक जलस्रोत है। यह वर्षों से लोगों की प्यास बुझाती आ रही है और आज भी इसका महत्व कम नहीं हुआ है। समय के साथ इस इलाके में कई बदलाव आए, लेकिन इस धारे की अहमियत आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।

गांवों की निर्भरता

आसपास के गांवों के लोग रोजाना यहां आकर पानी भरते हैं और उसे अपने घर ले जाते हैं। वर्षों से वे अपनी जरूरतों के लिए इसी जलस्रोत पर निर्भर रहे हैं। यह धारा लंबे समय से इन परिवारों के जीवन का अहम हिस्सा बनी हुई है।

गर्मियों में भी नहीं सूखता पानी

इस जलस्रोत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि गर्मियों के मौसम में भी इसका प्रवाह बना रहता है। यही वजह है कि कड़ी धूप और सूखे के दिनों में भी लोगों को पानी को लेकर किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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