खेत की उपज का राज छिपा है मिट्टी में, बारिश से पहले जरूर करें यह अहम काम मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
मानसून से पहले मिट्टी की जांच और खेत की सही तैयारी करने पर किसानों की लागत घटती है और पैदावार बढ़ती है। विशेषज्ञ इसे खेती का 'ब्लड टेस्ट' बताते हैं।

निमाड़ समेत पूरे प्रदेश में इस समय खरीफ सीजन की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। मानसून नजदीक आते ही ज्यादातर किसान खेतों में डीएपी और यूरिया डालना शुरू कर देते हैं। दिक्कत यह है कि अधिकांश किसानों को यह पता ही नहीं होता कि उनकी मिट्टी को असल में किस पोषक तत्व की कमी है। बिना जांच कराए लगातार रासायनिक खाद डालते रहने से खेत की उर्वरता धीरे-धीरे घटती जाती है और खर्च बढ़ता चला जाता है। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता है और फसल उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पाती।

यही वजह है कि मानसून आने से पहले खेत का “इलाज” यानी मिट्टी की जांच और उसकी ठीक तैयारी बेहद अहम मानी जाती है। कृषि सलाहकार नवनीत रेवापाटी का कहना है कि किसानों को सबसे पहले अपनी मिट्टी की जांच करानी चाहिए और कृषि विभाग के विशेषज्ञों से यह समझना चाहिए कि खेत में पहले कौन-सी फसल ली गई थी और अब कौन-सी फसल बोई जानी है। इसी आधार पर सही खाद और उर्वरक का चुनाव करना चाहिए।

मानसून से पहले खेत का इलाज क्यों जरूरी है

बारिश के दौरान मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बनाकर उसे दोबारा उपजाऊ बनाया जा सकता है, जिससे जमीन की उर्वरता लौट आती है।

  • कीट और रोग पर काबू: गहरी जुताई करने से मिट्टी के भीतर छिपे कीट और रोग फैलाने वाले तत्व तेज धूप में नष्ट हो जाते हैं।
  • मिट्टी का कटाव रोकना: खेत की मेड़बंदी करने से बारिश का पानी उपजाऊ मिट्टी को बहाकर नहीं ले जाता।
  • जल निकासी का इंतजाम: खेत में पानी भर जाने से फसल की जड़ें सड़ सकती हैं, इसलिए पहले से नालियों की व्यवस्था करना जरूरी है।

मिट्टी में किस तत्व की कितनी मात्रा होनी चाहिए

विशेषज्ञों के मुताबिक स्वस्थ मिट्टी के लिए नीचे दिया गया संतुलन जरूरी माना जाता है:

  • pH मान: 6.5 से 7.5 के बीच
  • ऑर्गेनिक कार्बन: ≥ 0.75%
  • नाइट्रोजन (N): 250-280 किग्रा/हेक्टेयर
  • फास्फोरस (P): 20-25 किग्रा/हेक्टेयर
  • पोटाश (K): 200-250 किग्रा/हेक्टेयर

इसके साथ ही जिंक, सल्फर और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच भी जरूरी है, ताकि फसल की बढ़वार बेहतर हो सके।

खेत का “ब्लड टेस्ट” क्यों है अहम

मिट्टी की जांच को खेती का “ब्लड टेस्ट” कहा जाता है। जैसे शरीर में किसी कमी का पता लगाने के लिए जांच जरूरी होती है, वैसे ही खेत में कौन-सा पोषक तत्व कम है, यह जानने के लिए मिट्टी परीक्षण जरूरी है। इससे किसान अंदाजे से खाद डालने के बजाय सही मात्रा में उर्वरक का इस्तेमाल कर पाते हैं।

जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ाएं

मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए सड़ी हुई गोबर खाद, कम्पोस्ट और दूसरी जैविक खादों का उपयोग करना चाहिए। इससे मिट्टी में जीवांश बढ़ता है और लंबे समय तक उत्पादन बेहतर बना रहता है।

कुल मिलाकर, अगर किसान मानसून से पहले खेत का सही “इलाज” कर लें तो न केवल उनकी लागत घटेगी, बल्कि उत्पादन भी बढ़ेगा। सही समय पर सही कदम उठाकर किसान अपनी खेती को कहीं अधिक लाभकारी बना सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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