गोरखपुर: जिला अस्पताल से अगवा 10 साल की बच्ची की निर्मम हत्या, आरोपी सिपाही गिरफ्तार उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 4
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जिला अस्पताल परिसर से लापता हुई एक 10 वर्षीय बच्ची का शव बरामद हुआ है। इस वारदात में डायल-112 के एक सिपाही की संलिप्तता सामने आई है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उस पर दुष्कर्म व हत्या का गंभीर आरोप है।

गोरखपुर में बच्ची की हत्या से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। कोतवाली थाना क्षेत्र के जिला अस्पताल परिसर से गायब हुई 10 साल की मासूम बच्ची की नृशंस हत्या कर दी गई है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस घटना में पुलिस बल का ही एक जवान मुख्य आरोपी है। डायल-112 सेवा में तैनात सिपाही अभिषेक यादव पर बच्ची को अस्पताल से उठाकर उसकी हत्या करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को, जो मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला है, अपनी हिरासत में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बच्ची के शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट का सभी को इंतजार है।

दुष्कर्म की आशंका और कठोर कार्रवाई की तैयारी

इस जघन्य हत्याकांड पर एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में सिपाही अभिषेक यादव की सीधी संलिप्तता पाई गई है। पुलिस ने मामले में हत्या समेत संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच के दौरान बच्ची के साथ दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि इस बात की अधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी। एसएसपी ने यह स्पष्ट किया है कि आरोपी सिपाही को 24 घंटे के भीतर सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही, इस केस को फास्टट्रैक कोर्ट में चलाकर आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।

आरोपी सिपाही का रहा है पुराना आपराधिक इतिहास

हैरानी की बात यह है कि आरोपी सिपाही अभिषेक यादव का आपराधिक रिकॉर्ड नया नहीं है। करीब एक वर्ष पहले भी वह दुष्कर्म के एक मामले में जेल की हवा खा चुका है। उस समय पश्चिम बंगाल की एक युवती ने उसके खिलाफ दुष्कर्म और जालसाजी के आरोप लगाए थे। हालांकि, उस वक्त पीड़िता के बयान दर्ज न हो पाने के कारण दुष्कर्म का मामला पूरी तरह आगे नहीं बढ़ सका, लेकिन सिपाही के पास से जाली आधार कार्ड बरामद होने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेजा था। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद उसे बहाल कर दिया गया था, लेकिन अब इस नई वारदात ने खाकी वर्दी को शर्मसार कर दिया है।

घटनाक्रम: खाना देने आई थी बच्ची

पीड़ित परिवार के पिता, जो आजमगढ़ के कप्तानगंज इलाके के निवासी हैं, पिछले 4 वर्षों से गोरखपुर में रहकर ई-रिक्शा चलाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 27 जुलाई को उनकी बड़ी बेटी की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके चलते उसे जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। मंगलवार की रात करीब साढ़े आठ बजे 10 वर्षीय छोटी बच्ची अपनी बड़ी बहन के लिए भोजन लेकर अस्पताल पहुंची थी। रात करीब नौ बजे वह अपनी बहन को खाना खिलाकर वापस घर के लिए निकली, लेकिन वह घर नहीं पहुंची। जब काफी समय बीतने के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला, तो परिजनों ने अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में उसकी सघन खोजबीन की। जब बेटी का कहीं कोई सुराग नहीं लगा, तो परिवार ने पुलिस को सूचित किया। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर तलाश शुरू की थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं सबकी नजरें

डायल-112 के सिपाही द्वारा की गई इस दरिंदगी ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में पुलिस की पूरी जांच अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर केंद्रित है। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या बच्ची के साथ कोई अन्य अपराध भी किया गया है। स्थानीय जनता में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है और सभी आरोपी के लिए सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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