बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: 22000 आंगनवाड़ी पदों पर होगी भर्ती, 23698 करोड़ के कृषि रोडमैप को मंजूरी बिहार एक घंटा पहले 4
बिहार सरकार ने कैबिनेट बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की बंपर बहाली, वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर बैठे रजिस्ट्री और कृषि क्षेत्र के लिए अरबों रुपये का बजट शामिल है।

कैबिनेट की बैठक में लिए गए अहम फैसले

बिहार में सम्राट चौधरी सरकार ने बुधवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए कुल 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अपनी स्वीकृति प्रदान की है। सरकार ने शिक्षा, कृषि, खेल, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की दिशा में कई बड़े निर्णय लिए हैं। इस बैठक के दौरान रोजगार के नए अवसर पैदा करने से लेकर आम नागरिकों की सुविधा तक पर विशेष ध्यान दिया गया है।

22,000 आंगनवाड़ी पदों पर नियुक्ति की तैयारी

सरकार के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से जुड़ा है। कैबिनेट ने राज्य में आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका के कुल 22,000 पदों पर बहाली की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से राज्य में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य तथा पोषण संबंधी सेवाओं में सुधार आएगा। इसके साथ ही, लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लेते हुए दरभंगा की रैयाम और मधुबनी की सकरी चीनी मिल को फिर से शुरू करने पर मुहर लगा दी गई है।

वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत

बिहार सरकार ने बुजुर्गों की सुविधा के लिए एक अनूठी पहल की है। अब राज्य में 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को घर बैठे ही अपनी जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री करवाने की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके लिए बिहार निबंधन नियमावली में आवश्यक संशोधन किया गया है। यह सुविधा बुजुर्गों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाएगी।

कृषि और सहकारिता क्षेत्र के लिए बड़ा बजट

खेती-किसानी को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। राज्य के चतुर्थ कृषि रोडमैप के कार्यान्वयन के लिए 23,698 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना यानी प्रति बूंद अधिक फसल के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9,748.18 लाख रुपये का आवंटन किया गया है। सहकारिता क्षेत्र को मजबूती देने के लिए बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत 106.39 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत 2026-27 में 45.50 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे ताकि पंचायत स्तर पर संग्रहण केंद्र और रेफ्रिजरेटेड वाहनों की व्यवस्था की जा सके।

न्यायिक और प्रशासनिक ढांचे का सुदृढ़ीकरण

न्याय व्यवस्था को तेज और सुलभ बनाने के लिए कैबिनेट ने कई कदम उठाए हैं। भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए पटना में दो और मुजफ्फरपुर में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय की स्थापना की जाएगी। इसके लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के तीन नए पदों का सृजन होगा। वहीं, एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत लंबित मुकदमों के शीघ्र निपटारे के लिए 19 जिलों में 19 विशेष न्यायालय खोले जाएंगे और इतने ही पदों पर जजों की नियुक्ति की जाएगी।

खेल, शिक्षा और आधारभूत संरचना का विकास

कैबिनेट ने बिहार खेल नीति 2026 को भी अपनी मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य राज्य के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मंच और रोजगार उपलब्ध कराना है। शैक्षणिक संस्थानों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को पेंशन और वेतन भुगतान के लिए 158.62 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। साथ ही, 46 सरकारी पॉलिटेक्निक और विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए कंप्यूटर एवं आधुनिक उपकरण खरीदने हेतु 60.49 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी परियोजनाएं

बुनियादी ढांचे को लेकर सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में धन राशि जारी की है:

  • जमुई में एनएच 333ए पर दो बड़े उच्च स्तरीय आरसीसी पुलों का निर्माण किया जाएगा।
  • सुकन्या नदी पर नए पुल के निर्माण के लिए 55 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
  • लखीसराय जल परियोजना के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • किशनगंज जलापूर्ति परियोजना को 53 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली है।
  • पटना में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) के कार्यालय और आवासीय परिसर बनाने के लिए 57 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी गई है।

इसके अतिरिक्त, लघु जल संसाधन विभाग की भर्ती नियमावली में सुधार और क्षेत्रीय पुलिस अधिकारियों की प्रशासनिक शक्तियों में बदलाव जैसे कई अन्य प्रशासनिक निर्णय भी कैबिनेट ने लिए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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