स्वतंत्रता दिवस के भाषण में शहबाज शरीफ ने की ट्रंप की तारीफ, पाकिस्तान की मानसिकता पर उठे सवाल विश्व एक घंटा पहले 4
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आजादी के जश्न के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार व्यक्त किया, जिससे देश की विदेश नीति और मानसिकता पर नई बहस छिड़ गई है।

आजादी के मंच पर शहबाज शरीफ का अजीबोगरीब बयान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मानसिकता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देश अपनी आजादी का जश्न मना रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री का ध्यान अपनी संप्रभुता के बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गुणगान में लगा हुआ था। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर दिए गए अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने जिस तरह से अमेरिका के प्रति अपनी निर्भरता जाहिर की, उसने देश की कूटनीतिक सोच को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

ट्रंप का धन्यवाद क्यों किया?

अपने भाषण के दौरान शहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप का विशेष रूप से आभार जताते हुए कहा, 'मैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने बीते साल भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर सुनिश्चित करवाकर लाखों लोगों की जान बचाई।' उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान और अमेरिका के आपसी संबंध लगातार आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में ये रिश्ते और भी अधिक मजबूत होंगे।

सिंधु जल समझौते और भारत पर निशाना

शहबाज शरीफ ने केवल ट्रंप की तारीफ नहीं की, बल्कि अपने संबोधन में भारत को घेरने की कोशिश भी की। उन्होंने सिंधु जल समझौते का जिक्र करते हुए इसे एक रेड लाइन करार दिया। यह हैरान करने वाली बात है कि जिस मंच का उपयोग पाकिस्तान को अपनी स्वतंत्रता, अपनी संप्रभुता और देश के भविष्य की रूपरेखा तय करने के लिए करना चाहिए था, वहां शहबाज शरीफ पूरी तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रशंसा में जुटे रहे।

सीजफायर के दावे की असलियत

शहबाज शरीफ ने मई, 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान सीजफायर का श्रेय सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को दिया। हालांकि, यह पाकिस्तान का पुराना ढर्रा है कि वह सैन्य संघर्ष के बाद हुए सीजफायर को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर पेश करता है। भारत सरकार ने इस विषय पर अपना पक्ष कई बार स्पष्ट रूप से रखा है। भारत ने बार-बार यह साफ किया है कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई को रोकने की सहमति केवल भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत का परिणाम थी। इसमें किसी भी तीसरे देश या मध्यस्थ की कोई भूमिका नहीं थी।

विदेश नीति की विफलता पर चर्चा

शहबाज शरीफ के इस बयान ने पाकिस्तान की विदेश नीति और महाशक्तियों पर उसकी अटूट निर्भरता को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। आजादी के समारोह जैसे पावन मौके पर किसी दूसरे देश के प्रमुख को धन्यवाद देना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान आज भी मानसिक रूप से परतंत्र है और अपनी विदेश नीति के लिए बड़े देशों के सहारे की तलाश में रहता है। आलोचकों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान की गुलामी वाली मानसिकता का एक स्पष्ट उदाहरण है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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