भारत
43 मिनट पहले
1
विचारों
सरकार ने पेश किया सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026
हाल ही में सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश किया है। इस महत्वपूर्ण बिल को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन के पटल पर रखा। जैसे ही यह बिल पेश हुआ, सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि आखिर शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के बजाय जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक क्यों पेश किया। इसके पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण निहित हैं।
जितेंद्र सिंह के बिल पेश करने के मुख्य कारण
इस विषय पर सरकार के कामकाज की प्रक्रिया को समझना जरूरी है। जितेंद्र सिंह द्वारा बिल पेश किए जाने के मुख्य कारणों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
- यह नया कानून केवल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA द्वारा आयोजित NEET, JEE या CUET तक सीमित नहीं है। यह कानून UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग और तमाम अन्य केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं पर भी समान रूप से लागू होगा। इन सभी परीक्षाओं के संचालन और प्रशासनिक निगरानी की जिम्मेदारी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी DoPT के अधीन आती है, जिसके मंत्री जितेंद्र सिंह हैं। चूंकि उन्होंने ही वर्ष 2024 में मूल एंटी-पेपर लीक कानून संसद में पेश किया था, इसलिए संशोधन विधेयक को भी उनके द्वारा ही सदन में रखा गया।
- शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी को हाल ही में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिस दिन यह बिल सदन में पेश किया गया, उस दिन लोकसभा में प्रश्नकाल और शिक्षा मंत्रालय से संबंधित अन्य प्रशासनिक कार्यों की कमान प्रह्लाद जोशी के पास थी। अपनी व्यस्तताओं और विभागीय जिम्मेदारियों के चलते इस विशेष बिल को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी डॉ. जितेंद्र सिंह को दी गई थी।
शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन
जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों और घटनाक्रमों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार प्रह्लाद जोशी को सौंपने का निर्णय लिया। यह बड़ा फेरबदल ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय शिक्षा व्यवस्था व्यापक परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। वर्तमान सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह से लागू करने और स्कूलों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने जैसी बड़ी चुनौतियों पर काम कर रही है। सरकार को विश्वास है कि प्रह्लाद जोशी का लंबा राजनीतिक अनुभव इन सुधारों को नई गति देगा। जिम्मेदारी मिलते ही प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट किया कि वे प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए पूर्ण प्रयास करेंगे।
टास्क फोर्स का गठन और विपक्ष का रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को GenZ से जो वादा किया था, उसे पूरा करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के निर्देश पर फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय हाई पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। हालांकि, लोकसभा में बिल पेश होने के बावजूद विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण इस पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो पा रही है। विपक्ष का तर्क है कि बिल से पहले छात्रों के साथ हुई मारपीट के मुद्दे पर बहस होनी चाहिए।
सदन में कार्यवाही और सहमति की कोशिश
जितेंद्र सिंह द्वारा आज दोपहर 12 बजे विधेयक पेश करने के बाद भारी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। पहले 12 बजे, फिर 2 बजे और अंततः शाम 5 बजे तक सदन को स्थगित करना पड़ा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्तापक्ष और विपक्ष को आपसी सहमति बनाने के लिए 3 घंटे का समय दिया था। इस बीच, इस्तीफा देने के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे एक स्ट्रीट फाइटर हैं, न कि एयर कंडीशंड कमरे में रहने वाले एक्टिविस्ट।
Comments
0 comment