H1N1 स्वाइन फ्लू का खतरा किसे सबसे ज्यादा, कोविड-19 और फ्लू में अंतर क्या है? स्वास्थ्य 3 घंटे पहले 6
देशभर में वायरल संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच H1N1 और कोविड-19 के लक्षणों को लेकर भ्रम की स्थिति है। जानिए, किन लोगों को सबसे अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और संक्रमण से बचने के लिए विशेषज्ञ क्या सलाह दे रहे हैं।

देश में वायरल संक्रमण का बढ़ता प्रकोप

भारत के विभिन्न हिस्सों में इन दिनों वायरल संक्रमण और फ्लू जैसे लक्षणों से जूझ रहे मरीजों की तादाद में इजाफा देखा जा रहा है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें मरीजों को 103 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक तेज बुखार हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में इन्फ्लुएंजा और कोविड-19 जैसे श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमणों के लक्षण आपस में इतने मिलते-जुलते हैं कि केवल शारीरिक लक्षणों को देखकर इनके बीच अंतर करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को इस स्थिति में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

H1N1 स्वाइन फ्लू क्या है?

नेफ्रॉन क्लीनिक के चेयरमैन प्रोफेसर डॉक्टर संजीव बगाई के अनुसार, H1N1 दरअसल इन्फ्लुएंजा वायरस का ही एक प्रकार है। इसे आम भाषा में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह नाम पूरी तरह सटीक नहीं है। इन्फ्लुएंजा वायरस लगातार अपना रूप बदलता रहता है। वायरस के छोटे बदलावों को 'एंटीजेनिक ड्रिफ्ट' और बड़े बदलावों को 'एंटीजेनिक शिफ्ट' कहा जाता है। यही कारण है कि समय के साथ इन्फ्लुएंजा के खिलाफ बनी वैक्सीन में भी फेरबदल किए जाते हैं, ताकि उस समय सक्रिय वायरस स्ट्रेन से सुरक्षा मिल सके।

किन लोगों को है गंभीर खतरा?

डॉक्टर बगाई ने स्पष्ट किया कि फ्लू और श्वसन संबंधी संक्रमण कुछ विशेष श्रेणियों के लोगों के लिए अधिक घातक साबित हो सकते हैं। इनमें निम्नलिखित समूह शामिल हैं:

  • 5 साल से कम उम्र के छोटे बच्चे।
  • 65 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक।
  • गर्भवती महिलाएं।
  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी वाले व्यक्ति।
  • जिन्होंने हाल ही में अंग प्रत्यारोपण कराया हो।
  • वे मरीज जो इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं ले रहे हैं।
  • गंभीर डायबिटीज या हाइपरटेंशन से जूझ रहे मरीज।
  • क्रॉनिक लंग डिजीज यानी फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले लोग।
  • किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज।
  • अत्यधिक मोटापे से ग्रस्त लोग।

इन उच्च जोखिम वाले समूहों के लोगों में संक्रमण होने पर बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए लक्षणों के उभरते ही चिकित्सकीय परामर्श लेना अनिवार्य है।

कोविड-19 और फ्लू के लक्षणों में अंतर कैसे करें?

कोविड और इन्फ्लुएंजा दोनों ही संक्रमणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहने या बंद होने, मांसपेशियों में दर्द, थकान और सिरदर्द जैसे सामान्य लक्षण होते हैं। पहले माना जाता था कि स्वाद और गंध का चले जाना कोविड का प्रमुख संकेत है, लेकिन अब यह हर मरीज में नहीं देखा जाता। इसलिए केवल स्वाद या गंध के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि व्यक्ति को कोविड है या फ्लू। सही जांच के लिए डॉक्टर की सलाह पर टेस्ट करवाना ही एकमात्र सटीक तरीका है, खासकर हाई-रिस्क मरीजों के लिए यह बहुत जरूरी है।

सावधानी और बचाव के उपाय

मणिपाल हॉस्पिटल की इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर स्वाति माहेश्वरी के मुताबिक, कोविड के दौरान अपनाई गई सावधानियां ही H1N1 से बचाव के लिए कारगर हैं। संक्रमण खांसने, छींकने या बात करते समय निकलने वाली बूंदों और एरोसोल के जरिए फैलता है। इसलिए भीड़भाड़ वाली जगहों, सार्वजनिक परिवहन, बाजार और स्कूलों में मास्क का उपयोग जरूरी है। अगर आसपास कोई लगातार खांस या छींक रहा है, तो उनसे उचित दूरी बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें।

बीमार होने पर क्या करें?

यदि आप बुखार, खांसी या सर्दी के लक्षणों से ग्रस्त हैं, तो दूसरों के संपर्क में आने से बचें। बीमार होने पर ऑफिस या स्कूल न जाना ही समझदारी है, ताकि संक्रमण दूसरों में न फैले। खांसते या छींकते समय हमेशा टिश्यू या कोहनी का उपयोग करें और हाथों की साफ-सफाई बनाए रखें।

वेंटिलेशन और खान-पान का महत्व

बंद कमरों या कम वेंटिलेशन वाली जगहों पर संक्रमण के फैलने की आशंका ज्यादा रहती है। अपने घर, ऑफिस या स्कूल में हवा के आवागमन का ध्यान रखें। बीमारी के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें। अपने आहार में फल और सब्जियों को शामिल करें और शरीर को भरपूर आराम दें। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक दवाएं लेना बंद करें, क्योंकि हर वायरल संक्रमण में इनकी जरूरत नहीं होती है।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

यदि बुखार लगातार बना हुआ है और लक्षणों में कोई सुधार नहीं दिख रहा है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, मानसिक भ्रम की स्थिति या शरीर में पानी की कमी होने जैसे गंभीर संकेत मिलने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर की गई जांच और डॉक्टर की सलाह संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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