मलेशिया से शिकंजे में आए बंबीहा गैंग के तीन गुर्गे: जसप्रीत, अजय और पवनदीप की पूरी कहानी राष्ट्रीय राजनीति 4 घंटे पहले 3
मलेशिया में छिपकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे कुख्यात बंबीहा गैंग के तीन सदस्यों को भारतीय एजेंसियों ने डिपोर्ट कराकर भारत वापस लाया है। इन पर लुधियाना ग्रेनेड हमले की साजिश समेत कई गंभीर आरोप हैं।

विदेश में बैठकर भारत में फैला रहे थे अपराध का जाल

मलेशिया की धरती पर बैठकर भारत के भीतर आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले तीन कुख्यात गैंगस्टरों को अब भारतीय कानून के दायरे में ला खड़ा किया गया है। दविंदर बंबीहा गैंग से जुड़े जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल, अजय सिंह और पवनदीप सिंह को केंद्रीय एजेंसियों और पंजाब पुलिस की एक साझा रणनीति के तहत मलेशिया से भारत डिपोर्ट किया गया है। जैसे ही इन अपराधियों ने आईजीआई एयरपोर्ट पर कदम रखा, पंजाब पुलिस ने इन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया और अब इनसे पूछताछ का दौर शुरू हो चुका है। गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस महत्वपूर्ण कार्रवाई की पुष्टि की है।

गृह मंत्रालय का बड़ा एक्शन

गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन तीनों अपराधियों पर जबरन वसूली (रंगदारी), सीमा पार से हथियारों की तस्करी और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। मंत्रालय के आधिकारिक हैंडल से मिली जानकारी के मुताबिक, ये तीनों ही बंबीहा गैंग के सक्रिय सदस्य के तौर पर काम कर रहे थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षित भारत के विजन को साकार करने के लिए एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं और केवल वर्ष 2026 में ही अब तक कुल 51 कुख्यात अपराधियों को वापस भारत लाने में कामयाबी हासिल की गई है।

गैंगस्टर नंबर 1: जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल

जसप्रीत सिंह मूल रूप से पंजाब के फरीदकोट का निवासी है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, वह जून 2019 में भारत छोड़कर मलेशिया चला गया था। मलेशिया में उसका संपर्क एक अन्य फरार गैंगस्टर से हुआ और धीरे-धीरे वह दविंदर बंबीहा गैंग के मुख्य ऑपरेटरों में गिना जाने लगा। उस पर वर्ष 2025 में यादविंदर सिंह और उसके ड्राइवर जीवंजोत सिंह चहल उर्फ जुगनू की हत्या में शामिल होने का आरोप है। भारत लौटने के बाद उसे इसी हत्या के मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि वह विदेश में बैठकर किस तरह गैंग का संचालन कर रहा था और उसके पास हत्या की सुपारी कहां से आती थी।

गैंगस्टर नंबर 2 और 3: अजय सिंह और पवनदीप सिंह

अजय सिंह और पवनदीप सिंह, दोनों ही राजस्थान के श्रीगंगानगर के रहने वाले हैं। मलेशिया में शरण लेने के बाद ये दोनों बंबीहा गैंग के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे थे। पुलिस के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार, इन दोनों की मुख्य जिम्मेदारी विदेश में बैठे आकाओं के इशारे पर भारत में मौजूद स्थानीय गैंगस्टरों को दिशा-निर्देश देना थी। इन पर आरोप है कि इन्होंने ही लुधियाना में हैंड ग्रेनेड हमले की पूरी योजना तैयार की थी और स्थानीय सहयोगियों को इसके लिए उकसाया था।

लुधियाना ग्रेनेड हमले की नाकाम साजिश

साल 2025 में लुधियाना में एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की कोशिश की गई थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मलेशिया से अजय सिंह और पवनदीप सिंह ने भारत में अपने संपर्कों के जरिए ग्रेनेड हमले की पटकथा लिखी थी। हालांकि, लुधियाना कमिश्नरेट पुलिस ने इस बड़ी साजिश को वक्त रहते ही भांप लिया और इसे नाकाम कर दिया। 27 अक्टूबर 2025 को पुलिस ने इनके दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर उनके पास से एक P86 चीनी हैंड ग्रेनेड बरामद किया था। अब इन तीनों के हाथ लगने के बाद पुलिस यह कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है कि हथियारों की यह खेप कैसे भारत पहुंची और इनका स्थानीय नेटवर्क कितना फैला हुआ है।

ISI से कनेक्शन का संदेह

पंजाब पुलिस की प्रारंभिक जांच और खुफिया एजेंसियों के इनपुट से एक और डरावना पहलू सामने आया है। ऐसा माना जा रहा है कि बंबीहा गैंग का नेटवर्क केवल स्थानीय अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को शक है कि सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के पीछे एक सोची-समझी साजिश है, जिसे विदेश में छिपे गैंगस्टरों के जरिए संचालित किया जा रहा है।

कैसे अंजाम दिया गया डिपोर्टेशन मिशन

इन तीनों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल रही। इसमें केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने कई महीनों तक इनकी हरकतों और लोकेशन्स पर बारीकी से नजर रखी। जब इनकी सटीक मौजूदगी मलेशिया में सुनिश्चित हो गई, तो राजनयिक स्तर पर बातचीत करके और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करके इन्हें भारत डिपोर्ट करने का मार्ग प्रशस्त किया गया। आईजीआई एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के बाद इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच पंजाब ले जाया गया है, जहां इनसे गहन पूछताछ की जा रही है।

विदेश में छिपे अपराधियों पर सरकार की सख्ती

पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय का यह एक बड़ा उदाहरण है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'गैंगस्टरां टे वार' अभियान का मुख्य उद्देश्य उन सभी अपराधियों को वापस लाना है जो विदेश में बैठकर पंजाब में डर का माहौल बना रहे हैं। केवल 2026 में ही 51 अपराधियों की वापसी यह साबित करती है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपराधियों के लिए सुरक्षित नहीं है। पुलिस अब इन तीनों के जरिए उस पूरी सप्लाई चेन को तोड़ने की तैयारी में है जो पंजाब की शांति भंग करने की कोशिश कर रही थी। पूछताछ से मिली नई जानकारियों के आधार पर आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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