द्रविड़ की एक सलाह और सहवाग के हाथ से फिसल गया वर्ल्ड रिकॉर्ड, आउट होते ही फूट पड़ा था गुस्सा क्रिकेट एक घंटा पहले 5
साल 2009 में मुंबई टेस्ट के दौरान वीरेंद्र सहवाग राहुल द्रविड़ की संभलकर खेलने की सलाह मानने के कारण अपने करियर की तीसरी ट्रिपल सेंचुरी से चूक गए थे। अगली सुबह सिर्फ 9 रन और जोड़कर वे 293 के निजी स्कोर पर आउट हो गए।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में जिस अंदाज में आक्रामक बल्लेबाजी की, उसने इस फॉर्मेट को खेलने का तरीका ही बदल दिया। भारत की ओर से टेस्ट में सबसे पहले तिहरा शतक जड़ने का कारनामा करने वाले इस बल्लेबाज ने दो बार यह उपलब्धि हासिल की। तीसरी बार भी वे इस फॉर्मेट में ट्रिपल सेंचुरी लगाकर इतिहास रचने के बेहद करीब पहुंच गए थे, मगर ऐन मौके पर चूक गए।

दाएं हाथ के इस विस्फोटक बल्लेबाज के नाम पहले ही टेस्ट में तिहरा शतक ठोकने वाले पहले भारतीय बनने का रिकॉर्ड दर्ज है। वे दुनिया के उन गिने-चुने खिलाड़ियों में शुमार हैं जिन्होंने यह कमाल दो बार कर दिखाया। सहवाग खुद मानते हैं कि वे तीसरी ट्रिपल सेंचुरी भी बना सकते थे, लेकिन पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ की एक सलाह मान लेने की उनसे गलती हो गई।

मुंबई टेस्ट में बना था मौका

साल 2009 में मुंबई में श्रीलंका के खिलाफ खेले गए टेस्ट में सहवाग अपने करियर की तीसरी ट्रिपल सेंचुरी की दहलीज पर खड़े थे। दूसरे दिन के खेल में उन्होंने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया था। सहवाग ने एक ही दिन में 284 रन कूट दिए थे। दिन का खेल खत्म होने में जब कुछ ही ओवर बाकी थे, तब द्रविड़ ने उनसे संभलकर खेलने को कहा।

द्रविड़ का तर्क था कि दिन का खेल समाप्ति की ओर है, ऐसे में जोखिम लेने की कोई जरूरत नहीं है और अगली सुबह आराम से 300 रन पूरे किए जा सकते हैं। एक टीवी शो में सहवाग ने बताया कि उन्होंने द्रविड़ की बात मानी और बचे हुए ओवर सुरक्षित निकालने का फैसला कर लिया। दिन का खेल खत्म होने तक दोनों बल्लेबाज नाबाद लौटे।

'400 रन का भी मौका है'

द्रविड़ ने सहवाग से कहा था कि आज विकेट बचाकर खेलो और अगले दिन नए सिरे से शुरुआत करना, तुम्हारे पास तो 400 रन बनाने तक का मौका रहेगा। सहवाग के मुताबिक वे काफी उम्मीद के साथ अपने कमरे में लौटे, अच्छा खाना खाया और चैन की नींद सोए। उन्हें पूरा यकीन था कि तिहरा शतक तो अब पक्का है।

9 रन की दूरी पर टूटा सपना

लेकिन अगली सुबह तस्वीर बदल गई। सिर्फ 9 रन और जोड़कर सहवाग आउट हो गए। उन्होंने 254 गेंदों पर 293 रन बनाए, जिसमें 40 चौके और 7 छक्के शामिल थे। मुथैया मुरलीधरन ने उन्हें अपनी ही गेंद पर लपककर इतिहास रचने से रोक दिया।

आउट होने के बाद कोसा था द्रविड़ को

बाद में सहवाग ने स्वीकार किया कि दूसरे दिन के आखिरी ओवरों में उन्हें अपनी स्वाभाविक आक्रामकता जारी रखनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी बताया कि आउट होने के बाद द्रविड़ की वह सलाह याद कर वे उन्हें जमकर कोस रहे थे और गालियां तक दी थीं। हालांकि यह सब मजाकिया अंदाज में था।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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