होर्मुज स्‍ट्रेट से पीछे हटेगा अमेरिका, लेबनान पर हमला नहीं करेगा इजरायल; ईरान-अमेरिका शांति समझौते की 10 खास बातें विश्व 2 घंटे पहले 2
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बन गई है, जिस पर शुक्रवार को जेनेवा में औपचारिक हस्‍ताक्षर होंगे। समझौते के बाद होर्मुज स्‍ट्रेट के दोबारा खुलने और वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्‍मीद बढ़ गई है।

पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े युद्ध ने गंभीर तनाव की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसका सबसे बुरा असर 'एनर्जी कॉरिडोर' के नाम से जाने जाने वाले होर्मुज स्‍ट्रेट पर पड़ा। इस मार्ग से गुजरने वाले गैस और तेल लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह बाधित हुई, जिससे भारत समेत दुनिया के कई देशों में LPG के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कमी महसूस की जाने लगी। कुछ देशों को तो आपात स्थिति तक घोषित करनी पड़ी।

अब इसी होर्मुज स्‍ट्रेट को लेकर बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बन चुकी है। शुक्रवार को जेनेवा में दोनों पक्ष इस पीस डील पर औपचारिक रूप से हस्‍ताक्षर करेंगे, जिसके साथ ही होर्मुज स्‍ट्रेट के दोबारा खुलने का रास्‍ता भी साफ हो जाएगा।

समझौते पर बनी सहमति

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को खत्‍म करने के लिए एक अहम शांति समझौते पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। इस समझौते पर औपचारिक हस्‍ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे।

पाकिस्‍तान की मध्‍यस्‍थ भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्‍तान ने मध्‍यस्‍थ की भूमिका निभाई और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने समझौते की घोषणा की। समझौते के तहत युद्धविराम लागू किया जाएगा तथा दोनों पक्ष अपने सैन्‍य अभियानों को रोकेंगे।

लेबनान का मुद्दा भी शामिल

पाकिस्‍तान के मुताबिक, यह समझौता सभी मोर्चों पर सैन्‍य गतिविधियों की तत्‍काल और स्‍थायी समाप्ति का प्रावधान करता है। इसमें लेबनान से जुड़े संघर्ष को भी शामिल किया गया है, जिसे बातचीत का सबसे कठिन मुद्दा माना जा रहा था।

होर्मुज स्‍ट्रेट फिर खुलेगा

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरी तरह तैयार है। सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए उन्‍होंने कहा कि शुक्रवार से होर्मुज जलडमरूमध्‍य को फिर से खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अपने अवरोधों को भी हटा लेगा।

ऊर्जा बाजार को राहत की उम्‍मीद

होर्मुज जलडमरूमध्‍य के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्‍मीद है। यह रास्‍ता दुनिया के तेल कारोबार के लिए बेहद अहम माना जाता है। पिछले कई महीनों से ईरान द्वारा इस मार्ग को व्‍यावहारिक रूप से बंद रखे जाने के कारण ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई थी।

कच्‍चे तेल की कीमतों में गिरावट

समझौते की खबर सामने आते ही अंतरराष्‍ट्रीय तेल बाजार में सकारात्‍मक प्रतिक्रिया दिखी। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, अमेरिकी वेस्‍ट टेक्‍सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.6 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव कम होने की उम्‍मीद बढ़ी है।

60 दिनों का युद्धविराम

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने बताया कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान एक व्‍यापक समझौते पर बातचीत होगी। इसमें प्रतिबंधों में राहत, आर्थिक सहयोग और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा शामिल रहेगी। अंतिम समाधान निकलने तक अस्‍थायी व्‍यवस्‍थाएं लागू रहेंगी।

25 अरब डॉलर की संपत्ति पर सहमति संभव

पीस डील के मसौदे के अनुसार, अमेरिका ईरान की करीब 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने पर राजी हो सकता है। बदले में ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का विस्‍तार न करने का आश्‍वासन देगा। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी मतभेद बने हुए हैं।

लेबनान में इजरायली हमले से उठे सवाल

इस घोषणा के बावजूद क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्‍म नहीं हुआ है। रविवार को लेबनान में हुए इजरायली हमले ने शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका को भी जिम्‍मेदार ठहराया और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी, जबकि ट्रंप ने भी इस हमले को अनुचित बताया।

इजरायल समझौते का औपचारिक पक्षकार नहीं

इजरायल इस प्रस्‍तावित अमेरिका-ईरान समझौते का औपचारिक पक्षकार नहीं है। लेबनान में सैन्‍य कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू और ट्रंप के बीच मतभेद सामने आए हैं। इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार कार्रवाई जारी रखने की स्‍वतंत्रता बनाए रखेगा।

दोनों देशों में राजनीतिक बहस तेज

इस समझौते को लेकर अमेरिका और ईरान दोनों देशों में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण ट्रंप प्रशासन दबाव में था, जबकि ईरान में कट्टरपंथी गुट इस समझौते का विरोध कर रहे हैं। कई शहरों में प्रदर्शन हुए और विदेश मंत्री अब्‍बास अराघची के खिलाफ नारेबाजी भी देखने को मिली।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!