Bank of India FD Rates: 12 महीने की एफडी पर निवेशकों को कितना मिलेगा मुनाफा, सीनियर सिटीजन के लिए खास दरें मेरा पैसा 2 घंटे पहले 4
बैंक ऑफ इंडिया में फिक्स्ड डिपॉजिट करने वाले ग्राहकों के लिए ब्याज दरों का विवरण जारी किया गया है। 12 महीने की अवधि वाली एफडी पर आम ग्राहकों के साथ वरिष्ठ नागरिकों और सुपर सीनियर सिटीजन को अलग-अलग दरों पर लाभ मिल रहा है।

बैंक ऑफ इंडिया की फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाएं

वर्तमान में भारत में कुल 12 सरकारी बैंक आम जनता को बैंकिंग सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। इन प्रमुख बैंकों में से एक बैंक ऑफ इंडिया अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी योजनाओं के जरिए ग्राहकों को बचत का बेहतरीन विकल्प दे रहा है। यदि आप भी इस बैंक में अपना निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आप कम से कम 7 दिनों की अवधि से लेकर अधिकतम 10 साल तक की अवधि के लिए एफडी खाता खुलवा सकते हैं। निवेश की यह सुविधा इसे काफी लचीला बनाती है। आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि एक वर्ष की अवधि वाली जमा योजना पर बैंक की ओर से कितना रिटर्न दिया जा रहा है।

12 महीने की एफडी पर ब्याज का विवरण

बैंक ऑफ इंडिया 12 महीने यानी पूरे एक साल की एफडी अवधि के लिए ग्राहकों को 6.50 प्रतिशत से लेकर 7.15 प्रतिशत तक का ब्याज प्रदान कर रहा है। ब्याज की ये दरें अलग-अलग आयु वर्ग के ग्राहकों के लिए भिन्न हैं:

  • 59 साल तक के सामान्य ग्राहकों को 12 महीने की एफडी पर 6.50 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है।
  • 60 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को इसी अवधि के लिए 7.00 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है।
  • 80 साल या उससे अधिक आयु के सुपर सीनियर सिटीजन को इस अवधि के लिए 7.15 प्रतिशत का लाभ प्राप्त हो रहा है।

ध्यान रहे कि ये ब्याज दरें केवल 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि पर ही लागू की गई हैं।

सीनियर और सुपर सीनियर सिटीजन के लिए विशेष लाभ

बैंक ऑफ इंडिया वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की अपेक्षा 0.50 प्रतिशत अधिक ब्याज देने की सुविधा देता है। वहीं, सुपर सीनियर सिटीजन यानी 80 साल से अधिक उम्र के जमाकर्ताओं को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले 0.65 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज लाभ दिया जाता है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाला यह अतिरिक्त ब्याज का लाभ न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 3 साल तक की अवधि वाली एफडी स्कीम पर ही उपलब्ध होगा।

रेपो रेट और एफडी दरों का संबंध

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के फैसलों का सीधा असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ता है। केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट स्थिर रखने का निर्णय सीधे तौर पर जमा दरों को प्रभावित करता है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत पर निर्धारित किया गया था। बाजार के जानकारों का मानना है कि जब भी आरबीआई रेपो रेट में बदलाव करता है, तो बैंकों द्वारा दिए जाने वाले लोन और फिक्स्ड डिपॉजिट की दरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। रेपो रेट बढ़ने पर एफडी पर अधिक ब्याज मिलता है, जबकि इसमें कमी आने पर एफडी की ब्याज दरें भी घट जाती हैं।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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