राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
भारत की नई सैन्य और रणनीतिक शक्ति का उदय
पिछले बारह वर्षों में भारत ने खुद को विश्व मंच पर एक ऐसी शक्ति के रूप में स्थापित किया है जिसे अब महज एक उभरता हुआ देश नहीं, बल्कि एक नई महाशक्ति माना जाने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कार्यशैली और वैश्विक दृष्टिकोण में जो बड़े बदलाव आए हैं, उनका असर अब जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक साफ दिखाई दे रहा है। भारत की सुरक्षा रणनीति अब केवल पारंपरिक हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रक्षा विनिर्माण, अत्याधुनिक परीक्षणों और रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा के एक वृहद ढांचे पर टिकी है। यही वह बदलाव है जिसने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर जैसे नेतृत्व को चिंता में डाल दिया है।
रक्षा और मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भरता
भारतीय वायुसेना ने हाल ही में 140 किलोमीटर दूर से लक्ष्य को भेदने में सक्षम ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया है, जिसका नाम खगंतक-243 रखा गया है। यह केवल एक परीक्षण नहीं है, बल्कि स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही, पश्चिमी राजस्थान के आसमान को 17 दिनों के लिए सैन्य गतिविधियों के चलते सील कर दिया गया है, जो भारत की बढ़ती रक्षा तैयारियों का संकेत है। दूसरी ओर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने अपने सेमी-क्रायो इंजन का फुल थ्रस्ट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो भविष्य के रॉकेट लॉन्चिंग और रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाला है। इन सभी गतिविधियों को मिलाकर देखें तो स्पष्ट होता है कि भारत अब युद्ध सामग्री का आयातक बने रहने के बजाय स्वयं एक निर्यातक और निर्माता के रूप में उभर रहा है।
यूरेनियम की खोज और ऊर्जा सुरक्षा
रक्षा उपकरणों के साथ-साथ भारत अपनी परमाणु ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी अभियान पर काम कर रहा है। यूरेनियम का एक छोटा सा टुकड़ा, जो उंगली के पोर के बराबर होता है, इतनी ऊर्जा उत्पन्न करने में सक्षम है जो 17,000 क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस या 149 गैलन तेल के बराबर ऊर्जा दे सकता है। इसी ऊर्जा क्षमता को भुनाने के लिए मोदी सरकार ने इस साल कनाडा, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ कूटनीतिक दौरे किए हैं। भारत का लक्ष्य स्पष्ट है: 2047 तक परमाणु बिजली उत्पादन को 100 गीगावाट तक पहुंचाना। सरकार एक तरफ सीमा की सुरक्षा के लिए हथियार जुटा रही है, तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ईंधन की एक विशाल बीमा पॉलिसी तैयार कर रही है।
परमाणु क्षमता का भविष्य और प्राइवेट सेक्टर की एंट्री
भारत का परमाणु ऊर्जा का रोडमैप बेहद सुव्यवस्थित है। 2014 में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 4.78 गीगावॉट थी, जो 2026 तक लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8.78 गीगावॉट पहुंच गई है। अब 2031-32 तक 22.38 गीगावॉट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। शांति अधिनियम के तहत अब निजी क्षेत्र भी न्यूक्लियर प्लांट स्थापित कर सकेंगे। भविष्य में 54 गीगावाट बिजली सरकारी उपक्रमों से आएगी, जबकि करीब 45 से 46 गीगावाट बिजली का लक्ष्य निजी क्षेत्र, राज्यों और जॉइंट वेंचर्स के सहयोग से पूरा किया जाएगा। अडानी, रिलायंस, टाटा, जिंदल और बजाज जैसे प्रमुख औद्योगिक घरानों ने इस क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी दिखाने का संकेत दिया है।
यूरोप के साथ रक्षा सहयोग का नया अध्याय
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर दस अहम समझौते हुए। यह साझेदारी भारत को वैश्विक हथियार निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। थेल और कल्याणी ग्रुप के बीच 70 मिलीमीटर रॉकेट के निर्माण के लिए हुई डील 2027 तक उत्पादन शुरू कर देगी। इसके अलावा, सालाना 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद उत्पादन की क्षमता विकसित की जा रही है। भारतीय नौसेना के लिए माइन वेसल्स और जोरावर लाइट टैंक के टर्रेट निर्माण पर हुआ समझौता यह दर्शाता है कि भारत अब केवल हथियार खरीद नहीं रहा, बल्कि विश्व के विकसित देशों के साथ मिलकर रक्षा उत्पादों का सह-निर्माण कर रहा है।
अंतरिक्ष में भारत की निरंतर बढ़त
भारत की इस बहुआयामी रणनीति का हिस्सा अंतरिक्ष कार्यक्रम भी है। 4 सितंबर को भारत ने सबसे उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-5 को अंतरिक्ष में स्थापित किया। यह उपलब्धि साबित करती है कि भारत न केवल जमीन पर अपनी सीमाएं सुरक्षित कर रहा है, बल्कि अंतरिक्ष में भी अपनी निगाहें मजबूत कर रहा है। सीमा पर तैनात अत्याधुनिक हथियार, जमीन के नीचे सुरक्षित किया गया यूरेनियम और आसमान में उड़ते सैटेलाइट मिलकर 2047 के भारत की उस नींव का निर्माण कर रहे हैं जो सुरक्षा, तकनीक और ऊर्जा के मामले में पूर्णतया आत्मनिर्भर होगी। यह व्यापक तैयारी ही उन पड़ोसी देशों की नींद उड़ाने के लिए पर्याप्त है जो भारत के नए स्वरूप को देख रहे हैं।
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