आगरा में साइन फ्लू की जांच अब सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह मुफ्त, मरीजों को निजी लैब के महंगे खर्च से मिलेगी राहत उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 5
आगरा में साइन फ्लू के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध मरीजों के लिए निशुल्क जांच की सुविधा शुरू की है, जिससे लोगों को निजी लैब के हजारों रुपये के खर्च से मुक्ति मिल सकेगी।

आगरा में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के आगरा में साइन फ्लू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है। प्रशासन की ओर से अब सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में संदिग्ध मरीजों की जांच की प्रक्रिया को पूरी तरह निशुल्क कर दिया गया है। आम जनता को अब साइन फ्लू की जांच के लिए अपनी जेब ढीली करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान करना और उन्हें तुरंत जरूरी चिकित्सीय उपचार प्रदान करना है।

जिला अस्पताल में विशेष जांच काउंटर

आगरा के जिला अस्पताल के अधीक्षक के. सी. धाकड़ ने जानकारी दी कि मरीजों की बढ़ती सुविधा को देखते हुए जिला अस्पताल परिसर में एक अलग जांच काउंटर स्थापित किया गया है। इस काउंटर पर संदिग्ध मरीजों के नमूने लिए जा रहे हैं। अधीक्षक ने बताया कि साइन फ्लू की पुष्टि करने के लिए RT-PCR जांच अनिवार्य होती है। सरकारी अस्पतालों के अलावा, जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी मरीजों के सैंपल बिना किसी शुल्क के एकत्र किए जा रहे हैं। इसके बाद इन नमूनों को आगे की जांच और पुष्टि के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है।

निजी लैब की महंगी दरों से मुक्ति

आगरा में साइन फ्लू की जांच को लेकर सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बड़ा आर्थिक अंतर दिखाई दे रहा है। निजी प्रयोगशालाओं में इस जांच के लिए मरीजों को भारी भरकम राशि चुकानी पड़ रही है। सूत्रों और निजी लैब के संचालकों के अनुसार, निजी केंद्रों पर RT-PCR जांच की कीमत लगभग 4,200 रुपये से लेकर 4,430 रुपये तक बताई जा रही है। निजी लैब में दरें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन यह खर्च आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध मुफ्त सुविधा आम नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है।

जांच की प्रक्रिया और मेडिकल कॉलेज की भूमिका

जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. के. सी. धाकड़ ने स्पष्ट किया कि पूरी जांच प्रक्रिया बहुत व्यवस्थित है। जब कोई संदिग्ध मरीज अस्पताल पहुंचता है, तो पहले उनके नमूने लिए जाते हैं। इन नमूनों को तुरंत सुरक्षित तरीके से मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है, जहां अत्याधुनिक RT-PCR तकनीक के माध्यम से संक्रमण का पता लगाया जाता है। जांच पूरी होने के बाद, मरीजों को कुछ घंटों के भीतर उनकी रिपोर्ट नेगेटिव या पॉजिटिव होने की सूचना दे दी जाती है। जिला स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि संक्रमण के लक्षणों वाले किसी भी व्यक्ति को जांच के लिए परेशान न होना पड़े और उसे सही समय पर इलाज मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जरूरी सलाह

साइन फ्लू के खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आगरा के निवासियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो उसे लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। ऐसे मरीजों को बिना देरी किए अपने नजदीकी डॉक्टर या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए। समय पर डॉक्टर की सलाह लेने से न केवल खुद का बचाव होता है, बल्कि संक्रमण को फैलने से रोकने में भी मदद मिलती है। सरकारी अस्पतालों में टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध होने से अब लोग बिना किसी संकोच के जांच करवा सकते हैं और समय रहते अपना उचित उपचार शुरू करा सकते हैं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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