वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में बाघ की दस्तक, हल्दी के खेत में नीलगाय का शिकार देख ग्रामीणों में दहशत बिहार 2 घंटे पहले 4
पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे श्रीनगर गांव में एक बाघ के आने से हड़कंप मचा है, जिसने एक खेत में नीलगाय को अपना निवाला बनाया है। वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है और ट्रैकिंग अभियान शुरू किया गया है।

बाघ की मौजूदगी से गांव में छाया सन्नाटा

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व यानी VTR के आसपास के इलाकों में इन दिनों जंगली जानवरों की आवाजाही ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। खास तौर पर VTR डिविजन 01 की मंगुराहा रेंज से सटे इलाकों में एक बाघ के खुलेआम घूमने की जानकारी सामने आई है। इस बाघ ने रिहायशी बस्ती के बेहद करीब पहुंचकर एक नीलगाय का शिकार किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में खौफ का माहौल है। विशेष रूप से सहोदरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले श्रीनगर गांव के लोग अब दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।

हल्दी के खेत में बनाया शिकार

मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार की रात जंगल की सीमाओं को लांघकर एक बाघ आबादी वाले इलाके के पास पहुंच गया। शिकार की तलाश में निकले इस बाघ ने गांव के ही एक निवासी दिनेश महतो के घर के सामने स्थित हल्दी के खेत को अपना निशाना बनाया। वहां चर रही एक नीलगाय पर बाघ ने अचानक हमला बोल दिया और उसे मार गिराया। शिकार करने के बाद बाघ नीलगाय के शव को खेत से घसीटते हुए जंगल की दिशा में ले गया। ग्रामीणों के मुताबिक, शव को करीब 500 मीटर तक घसीटा गया है, जिसके निशान आज भी वहां मौजूद हैं।

ग्रामीणों में मची हड़कंप

शुक्रवार की सुबह जब स्थानीय ग्रामीण अपने खेतों की ओर गए, तो उन्हें हल्दी के खेत में खून के धब्बे और नीलगाय के अवशेष दिखाई दिए। इसके अलावा, वहां मौजूद बाघ के पंजों के निशान भी ग्रामीणों की नजरों से नहीं बच पाए। जैसे ही यह खबर पूरे गांव में फैली, लोगों के बीच हड़कंप मच गया। ग्रामीणों को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह किसी और का नहीं, बल्कि खूंखार बाघ का काम है। इस घटना के बाद से ही गांव की गलियों में सन्नाटा पसर गया है और लोग अपने घरों से निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं।

वन विभाग की जांच और पुष्टि

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां मौजूद तमाम साक्ष्यों तथा पंजों के निशानों की जांच की। जांच के बाद वन अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि नीलगाय का शिकार एक बाघ ने ही किया है। वन कर्मियों का यह भी मानना है कि शिकार को जंगल की ओर ले जाने के बाद बाघ भूखा होने पर दोबारा उसी स्थान या आसपास के इलाकों में लौट सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने का फैसला लिया है।

जारी है विशेष ट्रैकिंग अभियान

वन विभाग ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है। वन कर्मियों की टीम लगातार उस क्षेत्र में ट्रैकिंग अभियान चला रही है ताकि बाघ की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जा सके। विभाग ने शिकार वाले स्थान के आसपास लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसके अलावा, स्थानीय निवासियों को भी कड़ी हिदायत दी गई है कि वे अंधेरा होने के बाद घर से बाहर बिल्कुल न निकलें।

ग्रामीणों के लिए जारी की गई एडवाइजरी

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में खेतों या जंगल की तरफ अकेले न जाएं। लोगों से यह भी कहा गया है कि यदि उन्हें कोई भी संदिग्ध हलचल महसूस हो या बाघ के दिखने की सूचना मिले, तो तुरंत इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दें। फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता बाघ को वापस जंगल की गहराइयों में खदेड़ने और ग्रामीणों की जान-माल की रक्षा करना है। गांव में लगातार निगरानी के चलते वनकर्मी गश्त कर रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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