राजस्थान
2 महीने पहले
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विचारों
व्यवस्था से निराश होकर खुद संभाली कमान
राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता सिटी उपखंड में एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के लाम्बा जाटान और सोडास गांव के निवासी लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन जब हर तरफ से उन्हें केवल आश्वासन ही मिले, तो ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया।
बरसात में होती थी भारी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण विशेष रूप से बरसात के मौसम में उनका जीवन दूभर हो जाता था। कच्चा रास्ता होने की वजह से यहां चारों तरफ कीचड़ और गंदा पानी जमा हो जाता था, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता था। स्कूली बच्चों और बीमार लोगों को अस्पताल तक ले जाने में भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। कई वर्षों की शिकायतों के बाद भी जब अधिकारियों ने सुध नहीं ली, तो स्थानीय लोगों ने खुद ही सड़क बनाने की ठान ली।
श्रमदान और आर्थिक सहयोग से पूरी हुई मुहिम
इस अनूठी पहल के तहत गांव के युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं ने एक साथ आकर श्रमदान किया। लोगों ने केवल शारीरिक मेहनत ही नहीं की, बल्कि आर्थिक सहयोग देकर निर्माण सामग्री और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की। ग्रामीणों ने मिलकर लगभग आधा किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कर डाला। इस काम में गांव के हर वर्ग ने अपनी भागीदारी निभाई और साबित कर दिया कि जब जनता एकजुट हो जाए, तो बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।
प्रशासन के लिए एक सबक
ग्रामीणों द्वारा की गई इस मेहनत ने न केवल उनकी आवाजाही की समस्या का समाधान कर दिया है, बल्कि सरकारी तंत्र की विफलता को भी उजागर किया है। एक तरफ जहां सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं जमीनी स्तर पर लाम्बा जाटान और सोडास गांव के ग्रामीणों की यह पहल दर्शाती है कि आम आदमी अब वादों के भरोसे रहने के बजाय खुद की मदद के लिए आगे आ रहा है। यह सड़क अब पूरे क्षेत्र में सामाजिक एकजुटता और स्वावलंबन का बड़ा उदाहरण बन गई है।
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