बिना अनुभव वाले युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, मध्य प्रदेश सरकार दे रही ट्रेनिंग के साथ 10 हजार रुपये तक स्टाइपेंड मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 51
मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के जरिए फ्रेशर्स युवाओं को उद्योगों में काम सीखने का मौका मिल रहा है, जिसमें ट्रेनिंग के दौरान हर महीने 10 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जा रही है।

युवाओं के लिए करियर की नई राह

आज के दौर में शिक्षा पूरी करने के बाद युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती नौकरी तलाशने की होती है। डिग्री हाथ में होने के बावजूद, जब युवा बाजार में कदम रखते हैं तो कंपनियां सबसे पहले कार्य अनुभव यानी वर्क एक्सपीरियंस की मांग करती हैं। फ्रेशर्स के लिए इस बड़ी समस्या को दूर करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार की एक अनूठी पहल रंग ला रही है। इस योजना का नाम है मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना। सतना जिले में इस पहल का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहां हर साल बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा स्किल डेवलपमेंट के जरिए रोजगार के नए अवसर प्राप्त कर रहे हैं।

सतना में युवाओं को मिल रहा है संबल

सतना के जिला रोजगार अधिकारी अजय शुक्ला ने बताया कि यह योजना उन युवाओं के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, जो सीधे कॉलेज या शिक्षण संस्थानों से पढ़ाई पूरी करके निकलते हैं और जिनके पास काम का कोई पूर्व अनुभव नहीं होता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो सतना जिले में वर्ष 2024 के दौरान लगभग 100 युवाओं ने इस योजना का लाभ उठाया है। इसके बाद वर्ष 2025 में करीब 150 बेरोजगार युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों और कंपनियों में प्रशिक्षण के साथ जोड़ा गया है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि स्थानीय युवाओं में इस योजना के प्रति खासा उत्साह है।

योजना के पात्रता और नियम

वर्ष 2023 से शुरू की गई मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ बुनियादी शर्तें तय की गई हैं। इस योजना के तहत केवल मध्य प्रदेश के मूल निवासी युवा ही आवेदन करने के पात्र हैं। आवेदकों की आयु सीमा 18 से 29 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार का कम से कम 12वीं पास, आईटीआई उत्तीर्ण, डिप्लोमा धारी या स्नातक होना आवश्यक है। योजना का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग की पूरी अवधि के दौरान युवाओं को उनकी शैक्षिक योग्यता के आधार पर हर महीने 8,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का मासिक स्टाइपेंड प्रदान किया जाता है, ताकि प्रशिक्षण के दौरान वे अपना दैनिक खर्च आसानी से उठा सकें।

पंजीकरण की आसान प्रक्रिया

इस योजना में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी तरह से सरल और डिजिटल है। इच्छुक उम्मीदवार जो लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले कुछ आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होंगे। आवेदक के पास समग्र आईडी का आधार ई-केवाईसी होना अनिवार्य है। इसके अलावा, आवेदक का बैंक खाता डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के लिए सक्रिय होना चाहिए। पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया निशुल्क है। अभ्यर्थियों को सरकार के आधिकारिक वेब पोर्टल mmsky.mp.gov.in पर जाना होगा और अपनी समग्र आईडी के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। पंजीकरण के बाद, युवा अपनी रुचि का कोर्स और प्रशिक्षण का स्थान चुनकर संबंधित कंपनियों में मौजूद रिक्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कंपनियों के लिए भी फायदेमंद सौदा

यह योजना केवल युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि उद्योग जगत और कंपनियों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर है। इस साझेदारी में सबसे बड़ा वित्तीय लाभ यह है कि प्रशिक्षुओं को मिलने वाले कुल स्टाइपेंड का 75 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाता है। कंपनियों को अपनी तरफ से केवल 25 प्रतिशत राशि ही देनी पड़ती है। इस व्यवस्था से उद्योगों को बहुत कम लागत पर काम सीखने के लिए तत्पर और ऊर्जावान मैनपावर मिल जाती है। साथ ही, कंपनियों को भविष्य की जरूरतों के लिए कुशल कर्मचारी पहले से ही तैयार मिल जाते हैं, जिससे उन्हें दोबारा भर्ती प्रक्रिया पर भारी खर्च नहीं करना पड़ता।

पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी चयन

इस पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसे डिजिटल रखा गया है। कंपनियां आधिकारिक पोर्टल पर अपनी जरूरतों के अनुसार रिक्त पद पोस्ट करती हैं। पोर्टल पर पंजीकृत युवा अपनी योग्यता के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करते हैं। कंपनियां अपनी लॉगिन आईडी के माध्यम से आवेदकों के प्रोफाइल और रिज्यूम की जांच करती हैं और योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करती हैं। इसके बाद उन्हें साक्षात्कार या सीधे चयन के लिए बुलाया जाता है। जब कंपनी और युवा दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं, तो एक ऑनलाइन डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होते हैं और युवा प्रशिक्षण शुरू कर देता है।

एक साल का गहन व्यावसायिक प्रशिक्षण

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 1 वर्ष यानी 12 महीने की अवधि के लिए होता है। काम के घंटे कंपनी के सामान्य नियमों के अनुसार तय किए जाते हैं। इस दौरान युवाओं को 700 से अधिक विभिन्न कोर्सेस के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में आधुनिक मशीनों का संचालन, आईटी सेक्टर में सॉफ्टवेयर विकास और डिजिटल मार्केटिंग, तथा बैंकिंग व रिटेल सेक्टर में सेल्स और कस्टमर मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। प्रोफेशनल माहौल में काम करने से युवाओं को टीम वर्क, कॉर्पोरेट कल्चर, समय प्रबंधन और बातचीत करने के कौशल को निखारने का मौका मिलता है।

ट्रेनिंग के बाद स्थायी नौकरी की संभावना

एक साल का व्यावहारिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद मध्य प्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड द्वारा एक राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है, जो युवाओं के बायोडाटा को मजबूती देता है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, कंपनियां अपनी आवश्यकता और छात्र के प्रदर्शन को देखते हुए योग्य युवाओं को ऑन-रोल यानी स्थायी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कर सकती हैं। इससे युवाओं का भविष्य सुरक्षित होता है और उन्हें रोजगार के लिए यहां-वहां भटकना नहीं पड़ता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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