वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में सफारी पर लगा ब्रेक, मानसून और वन्य जीवों की सुरक्षा के चलते लिया गया निर्णय बिहार 2 महीने पहले 87
वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में 29 जून से जंगल सफारी को पूरी तरह बंद किया जा रहा है। मानसून की बारिश और वन्य जीवों के प्रजनन काल को देखते हुए यह फैसला लिया गया है जो 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगा।

सफारी पर रोक का मुख्य कारण

पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व यानी VTR जाने वाले पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। यहाँ के घने जंगलों में बाघ और अन्य वन्यजीवों को देखने के शौकीन लोगों के लिए सफारी का सफर कुछ समय के लिए थमने वाला है। वन विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, मानसून की दस्तक के साथ ही जंगल के भीतर सफारी का संचालन रोक दिया जाएगा। यह फैसला पर्यटकों की सुरक्षा और प्रकृति के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक अब नेपाल सीमा से सटे इस खूबसूरत और सघन वन क्षेत्र में सफारी का आनंद नहीं उठा पाएंगे।

इस तारीख से बंद होगी सफारी

वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व प्रबंधन द्वारा दी गई सूचना के मुताबिक, जंगल सफारी को बंद करने की प्रक्रिया 29 जून से प्रभावी हो जाएगी। सफारी के बंद रहने का यह सिलसिला करीब तीन महीने से भी अधिक समय तक चलने वाला है। वन विभाग की योजना के अनुसार, सफारी का यह पड़ाव 30 सितंबर तक जारी रहेगा। पर्यटकों को अब अगली सफारी के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा, क्योंकि इसे नए सत्र में अक्टूबर के पहले सप्ताह से फिर से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, बंदी की इस अवधि के दौरान पर्यटक रिज़र्व के बाहर स्थित अन्य पर्यटन केंद्रों का दीदार कर सकते हैं।

ट्रैक की स्थिति और सुरक्षा इंतजाम

मानसून के दौरान सफारी को बंद करने के पीछे सबसे बड़ा कारण जंगल के रास्तों की स्थिति है। VTR एक प्राकृतिक जंगल है, जहाँ बाघों के संरक्षण हेतु विशेष योजनाएं चलाई जाती हैं। यहाँ की जैव-विविधता और वन संपदा से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ सख्त मना है। सफारी गाड़ियां आमतौर पर जंगल के कच्चे रास्तों पर बने निर्धारित ट्रैक पर ही चलती हैं। भारी बारिश के कारण ये कच्चे रास्ते काफी खराब हो जाते हैं, जिससे वाहनों का चलना सुरक्षित नहीं रहता। इसके अलावा, बरसात के दौरान चलने वाली तेज हवाओं और भारी बारिश से पेड़ों के गिरने का खतरा बना रहता है, जो पर्यटकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

वन्य जीवों का प्रजनन काल

सुरक्षा के अलावा एक और महत्वपूर्ण पहलू वन्य जीवों का ब्रीडिंग सीजन यानी प्रजनन काल है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का मौसम वन्य जीवों के लिए प्रजनन का समय होता है। इस दौरान वे अपने प्राकृतिक परिवेश में बिना किसी मानवीय दखल के रहना पसंद करते हैं। मानव आवाजाही से उनके व्यवहार और प्रजन क्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग प्रतिवर्ष बरसात के महीनों में सफारी पर प्रतिबंध लगा देता है। यह रोक पूरी तरह से प्रकृति के चक्र को सम्मान देने और जीवों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाई जाती है।

अक्टूबर में नए अंदाज़ में वापसी

उम्मीद जताई जा रही है कि बरसात का मौसम बीतने के बाद अक्टूबर की शुरुआत में जब सफारी दोबारा खुलेगी, तो पर्यटकों को एक नया अनुभव मिलेगा। 30 सितंबर तक सफारी पूरी तरह बंद रहेगी, लेकिन उसके बाद सैलानी फिर से फॉरेस्ट सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे। वन विभाग इस दौरान व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की तैयारी कर रहा है। आने वाले सत्र में पर्यटक यहाँ टाइगर, लेपर्ड, स्लॉथ बियर, हिमालयन सेरो, वाइल्ड डॉग्स और इंडियन बाइसन जैसे दुर्लभ वन्य जीवों को करीब से देख पाएंगे। रिज़र्व प्रशासन ने सभी पर्यटकों से अपील की है कि वे सफारी की नई समय सारणी और दिशानिर्देशों का पालन करें ताकि यात्रा सुरक्षित और सुखद बनी रहे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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