आम की गुठली फेंकने की गलती न करें, सेहत के लिए है किसी वरदान से कम नहीं बिहार 3 महीने पहले 114
अक्सर लोग आम का स्वाद लेने के बाद उसकी गुठली को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से इसमें कई अनमोल गुण छिपे हैं। आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार यह पाउडर के रूप में कई बीमारियों में राहत देने का काम करता है।

आम की गुठली में मौजूद पोषक तत्व

गर्मियों के मौसम में आम फलों का राजा माना जाता है, लेकिन ज्यादातर लोग इसका गूदा खाने के बाद गुठली को कचरे में डाल देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आम की गुठली के अंदर के बीज में सेहत का बड़ा खजाना छिपा है। इसमें विटामिन A, B, C और E जैसे जरूरी विटामिन्स के अलावा फाइबर, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को कई रोगों से लड़ने में मदद करते हैं।

पाउडर बनाने की विधि

आम की गुठली के फायदों का लाभ उठाने के लिए इसे सही तरीके से तैयार करना जरूरी है। सबसे पहले गुठली के सख्त बाहरी खोल को सावधानीपूर्वक हटा दें। इसके अंदर निकलने वाले बीज को धूप में तब तक सुखाएं जब तक कि उसका सारा नमी खत्म न हो जाए। पूरी तरह सूख जाने के बाद इसे मिक्सी या ओखली में पीसकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें।

सेवन करने का सही तरीका

आयुर्वेद के अनुसार तैयार किए गए इस चूर्ण का सेवन करना काफी सरल है। आप रोजाना सुबह और शाम के समय 5 ग्राम पाउडर को गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं। यह मात्रा स्वास्थ्य के लिए काफी प्रभावी मानी गई है।

किन समस्याओं में है कारगर

नियमित रूप से आम की गुठली के चूर्ण का सेवन करने से शरीर को कई तरह से स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • पाचन तंत्र को बेहतर बनाना।
  • डायबिटीज के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक।
  • पेट की एसिडिटी और जलन में राहत।
  • कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखना।
  • शरीर की कमजोरी को दूर कर मजबूती प्रदान करना।

सावधानी बरतना भी है जरूरी

किसी भी घरेलू नुस्खे को जीवनशैली में शामिल करने से पहले यह ध्यान रखना आवश्यक है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपाय को आजमाने से पहले किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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