पश्चिम बंगाल
3 घंटे पहले
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पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी एक बार फिर राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई है। बुधवार की देर रात विश्वविद्यालय परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि कैंपस के भीतर जमकर मारपीट, पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इस हिंसक घटना के बाद से पूरे विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है।
यूनियन रूम को लेकर शुरू हुआ था विवाद
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे बवाल की शुरुआत बुधवार की शाम को हुई थी। कैंपस के भीतर एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें दोनों छात्र गुटों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस बैठक में मुख्य रूप से विश्वविद्यालय के यूनियन रूम के इस्तेमाल और उसकी व्यवस्था को लेकर चर्चा की जा रही थी। चर्चा के दौरान ही दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
बात इतनी बिगड़ गई कि दोनों तरफ के छात्र आमने-सामने आ गए और उनके बीच धक्का-मुक्की होने लगी। इसके बाद छात्रों का एक गुट विरोध प्रदर्शन करने के लिए जादवपुर पुलिस थाने के बाहर पहुंच गया। पुलिस स्टेशन के बाहर हंगामे के बाद स्थिति तब और अधिक संवेदनशील हो गई, जब कथित तौर पर कुछ बाहरी लोग जबरन विश्वविद्यालय परिसर के अंदर घुस आए। वामपंथी छात्र संगठनों का आरोप है कि इन बाहरी तत्वों के हाथों में डंडे, लाठियां और ईंटें थीं, जिनसे उन्होंने वहां मौजूद सामान्य छात्रों पर हमला कर दिया, जिससे कई छात्र लहूलुहान हो गए।
वामपंथी संगठनों ने एबीवीपी पर लगाए गंभीर आरोप
इस हिंसक टकराव के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन यानी अरविंद भवन के आस-पास की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई। वामपंथी छात्र संगठनों का आरोप है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने अरविंद भवन के कार पार्किंग क्षेत्र के सामने कूड़े-कचरे में आग लगा दी।
वामपंथी नेताओं ने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकर्ता खुद को बचाने के लिए पूरी रात अरविंद भवन के भीतर बंद रहने को मजबूर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद हमलावरों ने दरवाजे के बीच खाली जगहों से अंदर फंसे छात्रों पर पानी की बौछारें कीं। इसके अलावा, प्रदर्शनकारी वामपंथी छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनके छात्र संगठनों, DSF और SFI के झंडों को भी आग के हवाले कर दिया।
एबीवीपी का पलटवार, कार्यकर्ताओं के घायल होने का दावा
दूसरी तरफ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने वामपंथी संगठनों के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एबीवीपी नेतृत्व का कहना है कि हिंसा की शुरुआत वामपंथी छात्रों की तरफ से की गई थी। परिषद ने दावा किया है कि इस हिंसक हमले में उनके कई सक्रिय कार्यकर्ता और पदाधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायल कार्यकर्ताओं को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार चल रहा है। इस घटना के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन भी सतर्क हो गया है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है।
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