इंडोनेशिया में फिर डोली धरती, 5.9 की तीव्रता वाले भूकंप ने बढ़ाई लोगों की चिंता विश्व एक घंटा पहले 5
इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। हाल ही में आए 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप के बाद यह नई घटना वहां के निवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।

इंडोनेशिया में भूकंप की नई हलचल

इंडोनेशिया में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश का फ्लोरेस इलाका एक बार फिर शक्तिशाली भूकंप के झटकों से कांप उठा है। गुरुवार को आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.9 मापी गई है। यूरोपियन मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) की रिपोर्ट के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। अभी तक इस नई घटना से हुई जान-माल की क्षति का कोई स्पष्ट ब्योरा सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोग एक बार फिर खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।

हालिया भीषण आपदा का दंश

यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब पूरा क्षेत्र महज कुछ दिन पहले हुई भारी तबाही से उबरने की कोशिश कर रहा था। बीते 15 अगस्त को इसी फ्लोरेस द्वीप के करीब 7.7 तीव्रता का एक विनाशकारी भूकंप आया था, जिसने व्यापक स्तर पर तबाही मचाई थी। इस आपदा का केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा के एंडे शहर से लगभग 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप की गहराई कम होने के कारण इसका असर बहुत अधिक हुआ। झटकों के चलते बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ और सुनामी की लहरें भी उठने लगीं, जिनमें से एक लहर की ऊंचाई 1.61 मीटर तक दर्ज की गई थी। हालांकि, बाद में सुनामी की चेतावनी को वापस ले लिया गया था, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।

तबाही के आंकड़े और विस्थापन

15 अगस्त को आए उस भीषण भूकंप ने इंडोनेशिया के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उस आपदा में कम से कम 73 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 900 से अधिक लोग घायल हुए थे। घरों, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और स्वास्थ्य सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा। हालात इतने बिगड़ गए थे कि करीब 60,000 निवासियों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। राहत और बचाव कार्य में भी बड़ी बाधाएं आ रही हैं, क्योंकि भूस्खलन के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और कई दुर्गम इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

लगातार आफ्टरशॉक्स से बढ़ा डर

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य भूकंप के बाद से अब तक इलाके में 3,000 से अधिक आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटके) दर्ज किए जा चुके हैं। लगातार आ रहे इन झटकों के कारण स्थानीय प्रशासन और आम लोग अत्यधिक सतर्क हैं। जिस तरह से एक के बाद एक भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि इंडोनेशिया पर संकट के बादल अभी छटे नहीं हैं। राहत एजेंसियां और स्थानीय अधिकारी नुकसान का आकलन करने में जुटे हुए हैं, लेकिन बार-बार आ रहे भूकंप बचाव कार्यों की गति को धीमा कर रहे हैं। फिलहाल, प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और सतर्कता को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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