पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सातवें वेतन आयोग के गठन का रास्ता साफ पश्चिम बंगाल एक महीने पहले 47
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का लक्ष्य है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक कर्मचारियों को संशोधित वेतन का लाभ मिलना शुरू हो जाए।

सातवें वेतन आयोग की तैयारी

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए सातवें वेतन आयोग के गठन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस बात की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि आयोग के कामकाज के लिए जरूरी नियम और शर्तें निर्धारित कर दी गई हैं। राज्य सरकार की मंशा है कि इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए ताकि चालू वित्त वर्ष के समापन से पहले ही राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को संशोधित वेतनमान और भत्तों का लाभ मिल सके।

वेतन आयोग की रिपोर्ट और वित्तीय समीक्षा

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि आम तौर पर वेतन आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने में करीब छह महीने का समय लगता है। जैसे ही आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा, उसके बाद वित्तीय प्रभाव का गहन आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही सरकार इसे लागू करने के संबंध में अंतिम निर्णय लेगी। आयोग मुख्य रूप से वेतन ढांचे, भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा ताकि मौजूदा आर्थिक स्थिति और महंगाई के अनुपात में वेतन में उचित बदलाव किया जा सके। उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर सातवें वेतन आयोग का गठन करने का वादा किया था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।

महंगाई भत्ते (DA) पर विशेष घोषणा

सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में केंद्र सरकार और राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते के बीच 42% का बड़ा अंतर है। इस खाई को भरने की दिशा में कदम उठाते हुए उन्होंने घोषणा की कि सरकार अक्टूबर से 20% महंगाई भत्ता देना शुरू करेगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार धीरे-धीरे इस अंतर को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विभिन्न विभागों और कंपनियों में कार्यरत थर्ड-पार्टी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा पर भी जोर दे रही है।

छठे वेतन आयोग की यादें और पुलिस भर्ती

पुराने अनुभवों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट में देरी का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि साल 2015 में अविरुप सरकार कमिटी का गठन किया गया था, लेकिन उस समय वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर रिपोर्ट को दबाने की कोशिश की गई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, उन्होंने खुद वित्त मंत्री के सामने यह मामला उठाया था और आयोग के चेयरमैन से चर्चा कर रिपोर्ट को जारी करने का आग्रह किया था। इसके अलावा, विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से 26 हजार कांस्टेबलों की भर्ती की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें से 16 हजार पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया दुर्गा पूजा के त्योहार से पहले ही पूरी कर ली जाएगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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