भारत
4 घंटे पहले
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नोएडा में मजदूरों के एक प्रदर्शन के दौरान एक छात्र को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून अर्थात NSA के तहत हिरासत में लेने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस बात की आधिकारिक जानकारी दी।
हाईकोर्ट ने लगाया था 5 लाख रुपये का जुर्माना
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए नोएडा प्रशासन के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने छात्र को NSA के तहत हिरासत में रखने के नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट यानी DM के आदेश को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़ित छात्र को राहत देते हुए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश सुनाया था। विशेष बात यह है कि अदालत ने इस मुआवजे की राशि को नोएडा की DM मेधा रूपम के वेतन से वसूलने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट की इस कार्रवाई पर बेहद तल्ख टिप्पणी की थी। अदालत का मानना था कि हिरासत का यह आदेश पूरी तरह से बिना सोचे-समझे और बिना विवेक का इस्तेमाल किए जल्दबाजी में जारी किया गया था।
कारण बताओ नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
यह पूरा मामला ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को CJP प्रदर्शन में भाग लेने के कारण जारी किए गए एक कारण बताओ नोटिस से शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस नोटिस की वैधानिकता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब अदालत पहले ही छात्रों के प्रदर्शनों में शामिल होने पर उनके खिलाफ किसी भी तरह की सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा चुकी है, तो फिर प्रशासन ने ऐसा नोटिस कैसे और क्यों जारी कर दिया?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दी सफाई
इस पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मीडिया में इस नोटिस को लेकर नोएडा की DM से कई तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यह कारण बताओ नोटिस नोएडा की DM ने नहीं बल्कि ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किया गया था।
इसी सुनवाई के दौरान जब चीफ जस्टिस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का जिक्र किया जिसमें नोएडा DM के NSA वाले आदेश को रद्द किया गया था, तो सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के उस पूरे फैसले से असहमत है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
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