उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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प्रदेश भर में सुरक्षा मानकों की जांच के लिए महाअभियान
लखनऊ में हुई दुखद अग्निकांड की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्तर प्रदेश में स्थित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में प्रशासन, पुलिस, बिजली विभाग और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीमों ने छापेमारी शुरू कर दी है। इस महाअभियान के तहत 100 से अधिक कोचिंग सेंटरों को नियमों का पालन न करने के कारण सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज और आगरा सहित तमाम बड़े शहरों में व्यापक स्तर पर की जा रही है।
जांच के दायरे में अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास
प्रशासन की टीमें विशेष रूप से कोचिंग सेंटरों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास की सुविधा और भवन निर्माण के सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच कर रही हैं। प्रयागराज के मुख्य अग्निशमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा के अनुसार, शहर के 97 पंजीकृत संस्थानों में से केवल 15 के पास ही एनओसी उपलब्ध है। नियमों की अनदेखी के चलते प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने खान ग्लोबल स्टडीज जैसे संस्थानों को सील किया है। फायर विभाग ने स्थिति पर नजर रखने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है जो लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं।
कानपुर में पार्किंग की जगह चल रहे थे क्लासरूम
कानपुर के शैक्षणिक केंद्र काकादेव में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 से अधिक संस्थानों को बंद कराया है। जांच में सामने आया है कि कई संस्थान ऐसे भवनों के बेसमेंट में चल रहे थे, जिन्हें केवल पार्किंग के लिए आवंटित किया गया था। इन बेसमेंट में अवैध रूप से क्लासरूम बनाकर सैकड़ों छात्र बैठाए जा रहे थे, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है। मिर्जापुर में भी सुरक्षा मानकों की कमी के चलते लगभग एक दर्जन कोचिंग संस्थानों पर ताला जड़ दिया गया है।
वाराणसी से लेकर जौनपुर तक सख्ती
वाराणसी विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीमों ने वाराणसी की कोचिंग और लाइब्रेरियों में भी औचक निरीक्षण किया है। वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि बिना नक्शा पास कराए और निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित होने वाले कई सेंटरों को सील किया गया है। जौनपुर और चंदौली जैसे जिलों में भी प्रशासन की टीमें सक्रिय हैं और अवैध तरीके से चल रहे संस्थानों की सूची तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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