उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब साल में 9 नहीं, सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे व्यापार एक महीने पहले 23
सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सालाना सीमा 9 से घटाकर 4 कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक यह कदम लाभार्थियों की औसत घरेलू खपत को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

केंद्र सरकार ने 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (PMUY) के लाभार्थियों को मिलने वाले सब्सिडी युक्त एलपीजी सिलेंडरों की सालाना संख्या में बड़ी कटौती की है। पहले जहां एक साल में 9 सिलेंडर सब्सिडी पर मिलते थे, वहीं अब यह सीमा घटाकर सिर्फ 4 कर दी गई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को बताया कि यह फैसला औसत घरेलू खपत को ध्यान में रखकर लिया गया है। गौरतलब है कि साल 2016 में शुरू हुई इस योजना में शुरुआती दौर में लाभार्थियों को एक साल के भीतर 14.2 किलोग्राम वाले 12 सिलेंडर सब्सिडी पर दिए जाते थे। पिछले साल इनकी संख्या 12 से घटाकर 9 कर दी गई थी और अब इसे और कम करके 4 कर दिया गया है।

प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा का कहना है कि नई सीमा उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत सालाना गैस खपत के लगभग बराबर है। उन्होंने बताया कि सरकार का मकसद लाभार्थियों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से ही उन्हें सहायता देना है। सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडर 200 रुपये की लक्षित सब्सिडी की शुरुआत की थी, जिसे बाद में अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया। यह सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई जाती है।

लाभार्थियों को 642 रुपये में मिल रहा सिलेंडर

दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत हाल ही में दो बार बढ़ोतरी के बाद 942 रुपये तक पहुंच चुकी है। हालांकि सब्सिडी जुड़ने के बाद उज्ज्वला लाभार्थियों को एक सिलेंडर करीब 642 रुपये में उपलब्ध हो रहा है। अधिकारी के अनुसार, औसतन सरकार को एक सिलेंडर की डिलीवरी पर करीब 1,600 रुपये का खर्च आता है, जबकि सब्सिडी के जरिए लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर लगभग 1,000 रुपये की मदद दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि साल 2022 से अब तक सरकार करीब 52,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे चुकी है।

हर सिलेंडर पर कंपनियों को 700 रुपये का घाटा

प्रवीण मल खनूजा ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल में हुई बढ़ोतरी के बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी के दाम वैश्विक स्तर की तुलना में अब भी कम बने हुए हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी की बिक्री पर प्रति सिलेंडर करीब 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कुल मिलाकर 600-700 करोड़ रुपये का नुकसान

इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भी कंपनियों को घाटा हो रहा है, क्योंकि इन्हें लागत से कम कीमत पर बेचा जा रहा है। तेल और गैस के दाम बढ़ाने की वजह बताते हुए अधिकारी ने कहा कि कुल मिलाकर पेट्रोलियम कंपनियों को 600-700 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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