महाराणा प्रताप जयंती: हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे, उदयपुर में उमड़ा शौर्य का सैलाब राजस्थान एक घंटा पहले 2
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने पर उदयपुर में भव्य आयोजन हो रहे हैं। गांधी ग्राउंड में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और सीएम भजनलाल शर्मा पहुंचे, जबकि मोती मगरी पर प्रताप के वंशज डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विशेष पूजन किया।

भारतीय इतिहास के आकाश में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप एक ऐसे चमकते नक्षत्र हैं, जिनका नाम सुनते ही स्वाभिमान, राष्ट्रनिष्ठा और अदम्य साहस की जीवंत छवि आंखों के सामने उभर आती है। आज उनकी 486वीं पावन जयंती पर समूचा देश उनके गौरवशाली अतीत को नमन कर रहा है। प्रताप का जीवन केवल एक राजा का संघर्ष भर नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध मातृभूमि की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने की एक महागाथा है।

महलों का सुख त्याग कर चुना संघर्ष का पथ

महाराणा प्रताप ने राजमहलों के ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं को ठुकराकर जंगलों की कठिन राह चुनी। उन्होंने घास की रोटियां खाना मंजूर किया, पर कभी दिल्ली के शासक अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। स्वतंत्रता के प्रति उनका यही अगाध प्रेम और दृढ़ संकल्प सदियों बाद आज भी हर भारतीय के मन में देशभक्ति का संचार करता है।

हल्दीघाटी का अमर महासंग्राम

मेवाड़ के इतिहास का सबसे स्वर्णिम और रोमांचित कर देने वाला अध्याय हल्दीघाटी का युद्ध है, जिसकी विजय के आज पूरे 450 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह केवल दो सेनाओं की टक्कर नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों और असीमित हौसलों के बीच का महायुद्ध था। जब मुगल सेनापति मानसिंह के नेतृत्व में विशाल सेना मेवाड़ को कुचलने पहुंची, तब महाराणा प्रताप ने अपने मुट्ठी भर भील योद्धाओं और वफादार सैनिकों के साथ ऐसा पराक्रम दिखाया कि मुगलों के पांव उखड़ गए।

चेतक पर सवार होकर जब प्रताप वायु वेग से दुश्मन के खेमे में घुसते थे, तो वे साक्षात महाकाल का रूप प्रतीत होते थे। इतिहास के इस निर्णायक मोड़ पर उनकी रणनीतिक कुशलता और वीरता का लोहा पूरी दुनिया मानती है, जिसकी गूंज 450 साल बाद भी हल्दीघाटी के कण-कण में समाई हुई है।

गांधी ग्राउंड में विराट आयोजन

हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर उदयपुर के गांधी ग्राउंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से एक विराट कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस महाधिवेशन में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रमुख रूप से शामिल हुए हैं। आयोजन में पूरे मेवाड़ और देश के कोने-कोने से 35 हजार से अधिक राष्ट्रभक्त इस गौरवशाली इतिहास को नमन करने पहुंचे हैं।

हल्दीघाटी की माटी से तिलक

शौर्य की इस पावन गाथा को जीवंत बनाए रखने के लिए गांधी ग्राउंड पहुंचने वाले हर आगंतुक का हल्दीघाटी की उसी वीर प्रसूता माटी से तिलक किया जा रहा है, जिसने कभी संघर्ष की गाथा लिखी थी। मुख्यमंत्री की अगवानी के लिए प्रभारी मंत्री हेमंत मीणा, चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी और उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत समेत कई दिग्गज मौजूद रहे।

मोती मगरी पर वंशज ने किया विशेष पूजन

इतिहास की इस गौरवशाली कड़ी को जीवित रखते हुए उदयपुर के मोती मगरी स्मारक पर भी श्रद्धा और गौरव का अनूठा संगम देखने को मिला। महाराणा प्रताप के सीधे वंशज और मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने चेतक पर सवार वीर प्रताप की भव्य अश्वारूढ़ प्रतिमा पर विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!