बरसात में फूलगोभी की अगेती खेती से होगी बंपर कमाई, कृषि विशेषज्ञ ने बताया फसल बचाने और मुनाफा कमाने का अचूक तरीका बिहार एक घंटा पहले 4
पूर्णिया के कृषि विशेषज्ञ विकास कुमार ने बरसात के मौसम में अगेती फूलगोभी की सफल खेती के लिए खास वैज्ञानिक टिप्स साझा किए हैं, जिससे किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखकर बाजार में उसका दोगुना दाम पा सकते हैं।

आमतौर पर ठंड के दिनों में उगाई जाने वाली फूलगोभी की मांग बाजार में सालभर बनी रहती है। यही वजह है कि अगर किसान सीजन से पहले यानी अगेती (अगात) फूलगोभी की खेती करें, तो उन्हें बाजार में बेहद शानदार और मुनाफा देने वाले दाम मिल सकते हैं। हालांकि, गर्मी और बरसात के मौसम में इसकी खेती करना किसी चुनौती से कम नहीं होता। अत्यधिक तापमान और भारी बारिश के कारण फसल के खराब होने का खतरा हमेशा बना रहता है।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए बिहार के पूर्णिया में स्थित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ विकास कुमार ने किसानों के लिए बेहद उपयोगी और व्यावहारिक सुझाव साझा किए हैं। उनका मानना है कि यदि किसान सही कृषि प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं, तो वे विपरीत मौसम में भी फूलगोभी की बंपर पैदावार हासिल कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने नर्सरी से लेकर कटाई तक के कुछ बेहद महत्वपूर्ण नियम बताए हैं जिनका पालन करना किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा।

नर्सरी तैयार करने का सही तरीका और बीजों का चुनाव

कृषि विशेषज्ञ विकास कुमार के अनुसार, अगेती खेती की सफलता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी नर्सरी कितनी स्वस्थ है। इसके लिए सबसे पहले किसानों को उन्नत और अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करना चाहिए। चूंकि बरसात के मौसम में तापमान अधिक होता है और भारी बारिश की आशंका रहती है, इसलिए नर्सरी को सुरक्षित रखना सबसे बड़ा काम है।

इस मौसम में नर्सरी तैयार करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • नर्सरी की क्यारी हमेशा जमीन की सामान्य सतह से ऊंची उठी हुई होनी चाहिए। इससे बारिश का पानी क्यारी पर जमा नहीं हो पाता और जलभराव से बचाव होता है।
  • क्यारियों के ऊपर पारदर्शी प्लास्टिक (ट्रांसपेरेंट) शेड का इस्तेमाल जरूर करें।
  • यह प्लास्टिक शेड तेज धूप और सीधे गिरने वाली बारिश की बूंदों से छोटे और नाजुक पौधों की रक्षा करता है।
  • इस सुरक्षात्मक तरीके से नर्सरी के पौधे पूरी तरह स्वस्थ, मजबूत और बीमारी मुक्त तैयार होते हैं।

मुख्य खेत में रोपाई के लिए अपनाएं यह खास तकनीक

नर्सरी में पौधे तैयार होने के बाद जब उन्हें मुख्य खेत में रोपा जाता है, तो वहां भी विशेष सावधानी की जरूरत होती है। विकास कुमार ने सलाह दी है कि बरसात के दिनों में पौधों की रोपाई कभी भी खेत की नालियों में नहीं की जानी चाहिए। नालियों में पानी जमा होने से पौधों के गलने और सड़ने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।

इसके बजाय, किसानों को हमेशा उठी हुई क्यारियों (बेड) पर ही पौधों की रोपाई करनी चाहिए। इस विधि का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि लगातार होने वाली बारिश का अतिरिक्त पानी क्यारियों के बीच बनी नालियों के रास्ते आसानी से खेत से बाहर निकल जाता है। इससे खेत में जलभराव की स्थिति पैदा नहीं होती और पौधों की जड़ें सुरक्षित रहती हैं।

इसके अलावा, उन्होंने पौधों के बीच की दूरी का भी एक मानक तय किया है। बेहतर विकास और पौधों को पर्याप्त हवा व रोशनी मिलने के लिए पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर और लाइन से लाइन (पंक्ति से पंक्ति) की दूरी भी 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। इतनी जगह मिलने से पौधों का विकास तेजी से और सही ढंग से होता है और फूलों का आकार भी बड़ा मिलता है।

फूलगोभी को पीला होने से बचाने का आसान उपाय

बाजार में सफेद और चमकदार फूलगोभी की मांग सबसे अधिक होती है और उसके दाम भी अच्छे मिलते हैं। इसके विपरीत, यदि फूलगोभी का रंग पीला पड़ जाए, तो बाजार में उसकी कीमत काफी गिर जाती है। गर्मी और बरसात के मौसम में तेज धूप के कारण फूल अक्सर पीले पड़ने लगते हैं।

इस समस्या से निपटने के लिए कृषि विशेषज्ञ ने एक बहुत ही सरल और प्रभावी तरीका सुझाया है। उन्होंने बताया कि जैसे ही खेत में फूलगोभी के फूल विकसित होने लगें, किसानों को उसके चारों तरफ की पत्तियों को आपस में मोड़कर ऊपर से हल्के से बांध देना चाहिए। ऐसा करने से सीधे पड़ने वाली धूप फूलों तक नहीं पहुंच पाती और वे पूरी तरह से ढके रहते हैं। धूप से बचे रहने के कारण फूल का रंग बिल्कुल सफेद और आकर्षक बना रहता है, जिससे किसानों को मंडी में पीली फूलगोभी की तुलना में इसका बेहतरीन दाम मिलता है।

खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी चढ़ाने का काम

बरसात के मौसम में हवा में नमी और गर्मी के कारण खेतों में खरपतवार यानी अनचाही घास बहुत तेजी से बढ़ती है। यह खरपतवार मिट्टी के सारे आवश्यक पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे मुख्य फसल कमजोर हो जाती है। इसलिए समय-समय पर खेत की निकाई और गुड़ाई करना बेहद आवश्यक है।

विकास कुमार के अनुसार, जितनी बार भी खेत में निकाई-गुड़ाई का काम किया जाए, उसके तुरंत बाद पौधों के दोनों तरफ मिट्टी जरूर चढ़ा देनी चाहिए। मिट्टी चढ़ाने से पौधों के तने को अतिरिक्त सहारा मिलता है, जिससे वे तेज हवा या भारी बारिश में गिरते नहीं हैं और उनकी जड़ें भी गहराई तक जाकर मजबूत होती हैं।

संतुलित उर्वरक और पोषक तत्वों का सही गणित

फूलगोभी की फसल से अधिकतम और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन लेने के लिए मिट्टी को सही पोषण देना जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक संतुलित उर्वरक प्रबंधन की सलाह देते हैं। खेत की तैयारी और फसल के विकास के दौरान निम्नलिखित मात्रा में पोषक तत्व दिए जाने चाहिए:

  • सड़ी हुई गोबर की खाद: मुख्य खेत तैयार करते समय प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या अन्य जैविक खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाना चाहिए।
  • मुख्य रासायनिक उर्वरक: प्रति हेक्टेयर लगभग 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 100 किलोग्राम फॉस्फोरस और 120 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करना चाहिए। इस खाद को दो अलग-अलग चरणों में देना पौधों के विकास के लिए अधिक फायदेमंद होता है।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व: फसल के पूर्ण विकास और रोगों से सुरक्षा के लिए प्रति हेक्टेयर 10 से 15 किलोग्राम जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व अवश्य डालें।

इन सभी पोषक तत्वों के संतुलित इस्तेमाल से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और फूलों का आकार बड़ा व ठोस होता है, जिससे किसानों को कम लागत में बहुत बढ़िया मुनाफा हासिल होता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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