बिहार
एक घंटा पहले
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बिहार में प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। सूबे के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) कल्याण विभाग के मंत्री लखींद्र पासवान के सामने ही विभाग के एक कर्मचारी द्वारा खुलेआम रिश्वत मांगे जाने की घटना घटी है। इस वाकये के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। फरियादी की शिकायत पर जब खुद मंत्री ने कार्रवाई की, तो भ्रष्टाचार की यह पोल सबके सामने आ गई।
मंत्री के निर्देश पर लगाया गया फोन और खुल गई पोल
पूरा मामला उस समय उजागर हुआ जब एक पीड़ित व्यक्ति अपनी फरियाद लेकर सीधे मंत्री लखींद्र पासवान के पास पहुंचा। फरियादी ने मंत्री को आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि विभाग की एक कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के लिए उससे भारी-भरकम रिश्वत की मांग की जा रही है। पीड़ित ने बताया कि डाटा एंट्री ऑपरेटर इस काम को आगे बढ़ाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है।
शिकायत सुनते ही मंत्री लखींद्र पासवान ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने सच का पता लगाने के लिए फरियादी से कहा कि वह तुरंत अपने मोबाइल फोन से संबंधित डाटा एंट्री ऑपरेटर को फोन मिलाए। फरियादी ने मंत्री और वहां उपस्थित अन्य लोगों के सामने ही ऑपरेटर को फोन लगा दिया। जैसे ही कॉल कनेक्ट हुई, फोन पर बातचीत के दौरान डाटा एंट्री ऑपरेटर ने बिना किसी डर के कथित तौर पर 50 हजार रुपये की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहरा दिया।
इस अप्रत्याशित बातचीत को सुनकर वहां मौजूद सभी लोग और खुद मंत्री भी सन्न रह गए। मंत्री के सामने ही इस तरह की घूसखोरी का लाइव प्रमाण मिलने से विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर मांगी जा रही थी घूस
यह पूरा मामला अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग द्वारा चलाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण अनुदान योजना से जुड़ा हुआ है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता या अनुदान प्रदान किया जाता है। पीड़ित लाभार्थी का आरोप है कि उसे नियमानुसार मिलने वाले इस अनुदान का लाभ दिलाने के एवज में ही डाटा एंट्री ऑपरेटर लगातार पैसों की मांग कर रहा था।
फरियादी का कहना था कि जब उसने इस अवैध मांग को पूरा करने यानी 50 हजार रुपये की घूस देने से साफ मना कर दिया, तो उसके आवेदन को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और उसका काम लंबे समय तक लटका कर रखा गया। परेशान होकर आखिरकार पीड़ित ने सीधे विभाग के मुखिया यानी मंत्री के पास जाकर गुहार लगाने का फैसला किया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश, विभाग में हड़कंप
इस पूरी घटना के बाद मंत्री लखींद्र पासवान ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने मौके पर ही मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे प्रकरण की तत्काल और गहन जांच करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जांच में डाटा एंट्री ऑपरेटर पर लगे रिश्वत मांगने के आरोप पूरी तरह सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ बिना किसी देरी के नियमानुसार कठोरतम अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
मंत्री ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही, ढिलाई या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी है कि वे एक निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें ताकि समाज के वंचित तबके के लोगों को बिना किसी परेशानी के सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
आरोपी कर्मचारी की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
इस सनसनीखेज वाकये के सामने आने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। विभागीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपी कर्मचारी के खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई की रूपरेखा तय की जाएगी। पीड़ित व्यक्ति को मंत्री की तरफ से पूरा भरोसा दिलाया गया है कि उसे नियमानुसार योजना का पूरा लाभ दिया जाएगा और उसकी शिकायत पर त्वरित न्याय होगा।
हालांकि, इस पूरे विवाद पर अभी तक आरोपी डाटा एंट्री ऑपरेटर की तरफ से कोई भी आधिकारिक सफाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग में चल रही इस जांच के पूरा होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह से साफ हो पाएगी कि इस घूसखोरी के पीछे और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।
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